बम धमकी के चलते टली सुनवाई, पप्पू यादव की बेल पर लगी रोक, जानिए पूरा मामला

पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी के बाद अदालत की कार्यवाही रोक दी गई। सुरक्षा कारणों से पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी।

पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी के बाद अदालत की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। सुरक्षा कारणों से पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गईं, जेल में रहना होगा।

Bihar: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रहीं। सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन अचानक बदले हालातों के कारण यह संभव नहीं हो सका। पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा कारणों से कोर्ट की कार्यवाही स्थगित कर दी गई, जिससे पप्पू यादव की बेल पर ब्रेक लग गया। अब उन्हें कुछ और दिन बेऊर जेल में ही रहना होगा।

पटना सिविल कोर्ट में हड़कंप

सोमवार सुबह पटना सिविल कोर्ट को ईमेल के जरिए गंभीर धमकी मिली। मेल में कोर्ट को RDX और IED से उड़ाने की बात कही गई थी। धमकी मिलते ही पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में आ गए। बिना समय गंवाए पूरे न्यायालय परिसर को खाली कराया गया। MP-MLA कोर्ट समेत सभी अदालतों की कार्यवाही रोक दी गई। कोर्ट परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई और तलाशी अभियान चलाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायिक व्यवस्था को कुछ समय के लिए ठप कर दिया।

सुनवाई टलने से बढ़ी मुश्किल

धमकी की वजह से कोर्ट की नियमित कार्यवाही नहीं हो सकी। इसी कारण पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी गई। सांसद को उम्मीद थी कि सोमवार को उनकी बेल पर फैसला आ सकता है, लेकिन हालात उनके पक्ष में नहीं रहे। अब अगली तारीख का इंतजार करना होगा। जब तक कोर्ट में सुनवाई नहीं होती, तब तक पप्पू यादव को जेल में ही रहना पड़ेगा।

बेऊर जेल में बंद सांसद

पप्पू यादव इस समय पटना की बेऊर जेल में बंद हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पहले PMCH ले जाया गया था, जहां उनकी मेडिकल जांच कराई गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी तबीयत सामान्य पाई गई थी। हालांकि, जेल ले जाते वक्त वे एंबुलेंस में लेटे हुए नजर आए, जिसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं। फिलहाल जेल प्रशासन की निगरानी में उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

31 साल पुराने केस की वापसी

पप्पू यादव की गिरफ्तारी एक 31 साल पुराने मामले में हुई है। यह गिरफ्तारी ऐसे वक्त पर हुई, जब वे NEET छात्रा की मौत के मामले को लेकर लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे थे। अचानक हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। समर्थकों का कहना है कि पुराने मामले को दोबारा सक्रिय करना राजनीतिक दबाव का नतीजा है, जबकि सरकार इसे कानून की प्रक्रिया बता रही है।

NEET छात्रा मामला बना वजह

NEET छात्रा की मौत का मामला हाल के दिनों में बिहार की राजनीति का केंद्र बन गया है। पप्पू यादव इस मुद्दे पर काफी मुखर रहे हैं। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। कुछ कथित ऑडियो क्लिप भी उन्होंने सार्वजनिक किए, जिनमें इलाज में देरी और अनदेखी की बातें कही गई थीं। इसी सक्रियता के बाद उनकी गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठने लगे।

बिहार से दिल्ली तक सियासी हलचल

पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया। पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। विधानसभा से लेकर सड़कों तक ‘पप्पू यादव को रिहा करो’ के नारे लगाए गए। कुछ जगहों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पोस्टर जलाए गए। वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन देखने को मिला, जहां NEET छात्रा को न्याय दिलाने की मांग उठी। इस प्रदर्शन में पीड़िता की मां और परिवार के सदस्य भी शामिल हुए।

विपक्ष का सरकार पर हमला

विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उनके मुताबिक, जो भी सरकार से सवाल पूछता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोषियों को बचाया जा रहा है और सवाल उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। विपक्ष ने साफ संकेत दिया है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा होगा।

सरकार का पक्ष साफ

सरकार की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया आई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि देश में कानून का राज है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अगर किसी ने कानून तोड़ा है तो उस पर कार्रवाई तय है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने भी कहा कि सरकार न किसी को फंसाती है और न ही किसी को बचाती है। उनके अनुसार यह पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया का मामला है।

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