बोधगया में धर्म और संस्कृति के संगम का भव्य आयोजन शुरू हुआ, जहां देश के अलग-अलग राज्यों से साधु-संत, बौद्ध भिक्षु और धर्मावलंबी बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक विविधता और भाईचारे के संदेश से भरा दिखाई दिया।
इस आयोजन में विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोग एक मंच पर नजर आए। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में शांति, सद्भाव और एकता का संदेश फैलाना बताया गया। आयोजन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं और अतिथियों की भीड़ उमड़ने लगी थी।
मुख्य अतिथियों और संतों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच से संबोधन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और आपसी भाईचारा है।
कार्यक्रम में पहुंचे Dr. Indresh Kumar ने कहा कि भाईचारा, प्रेम और मानवता ही सच्चे धर्म की पहचान है। उन्होंने कहा कि धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं। समाज में शांति और सहयोग की भावना मजबूत करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
बोधगया को विश्वभर में बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसी वजह से यहां आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी भी शामिल हुए। कई विदेशी अनुयायी भी पारंपरिक परिधान में कार्यक्रम में पहुंचे।
आयोजन स्थल पर अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली। कहीं भजन-कीर्तन हो रहे थे तो कहीं बौद्ध मंत्रों का उच्चारण वातावरण को आध्यात्मिक बना रहा था।
साधु-संतों ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में बढ़ती नफरत और तनाव को खत्म करने के लिए धर्मों के बीच संवाद और सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच अपनाने और मानव सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने की अपील की।
कार्यक्रम में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों से लोग पहुंचे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे।
महाबोधि मंदिर के आसपास भी श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ गई। कई लोग कार्यक्रम में शामिल होने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए भी पहुंचे।
बौद्ध भिक्षुओं ने शांति और करुणा का संदेश देते हुए कहा कि पूरी दुनिया को हिंसा और संघर्ष से ऊपर उठकर मानवता की राह पर चलने की जरूरत है। उन्होंने ध्यान और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर भी जोर दिया।
आयोजन के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियों के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया गया।









