नेपाल के एकमात्र अरबपति कारोबारी बिनोद चौधरी ने राजनीति में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। उन्हें नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में पार्टी के उपाध्यक्षों में से एक चुना गया है।
काठमांडू: नेपाल के प्रमुख उद्योगपति और देश के एकमात्र अरबपति बिनोद चौधरी ने राजनीति में एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। उन्हें नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में पार्टी के उपाध्यक्षों में से एक चुना गया है। कारोबार की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले चौधरी अब पार्टी संगठन में भी मजबूत भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कम्युनिस्ट पार्टी से की थी और बाद में नेपाली कांग्रेस का हिस्सा बन गए।
फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में शामिल चौधरी का कारोबार नेपाल से निकलकर भारत समेत कई देशों तक फैला हुआ है। खाद्य उत्पादों, होटल, बैंकिंग और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में उनकी कारोबारी मौजूदगी है। उनकी संपत्ति और राजनीतिक सफर को लेकर नेपाल के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जगत में भी दिलचस्पी बनी हुई है।
नेपाली कांग्रेस के उपाध्यक्ष कैसे बने बिनोद चौधरी?
नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में हुए चुनाव में बिनोद चौधरी ने समावेशी कोटे के तहत उपाध्यक्ष पद हासिल किया। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, उन्हें 1,745 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जीवन परियार को 1,658 वोट प्राप्त हुए। मधु आचार्य और चंद्र भंडारी को भी पार्टी के उपाध्यक्षों में चुना गया।
चौधरी ने जीत के बाद उनका समर्थन करने वाले महाधिवेशन प्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने इससे पहले कहा था कि वह नेपाली कांग्रेस को आर्थिक बदलाव और विकास का नेतृत्व करने में सक्षम राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से इस पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। नेपाली कांग्रेस को नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रमुख पार्टियों में गिना जाता है। ऐसे में चौधरी का पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में पहुंचना उनके राजनीतिक करियर के लिए अहम माना जा रहा है।
Binod Chaudhary Net Worth: कितनी है कुल संपत्ति?

फोर्ब्स के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बिनोद चौधरी की कुल संपत्ति 2017 में लगभग 1.3 अरब डॉलर आंकी गई थी, जो 2026 में बढ़कर करीब 2.1 अरब डॉलर बताई गई है। इस तरह उनकी अनुमानित संपत्ति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, उनकी संपत्ति का मूल्य कारोबार के प्रदर्शन, कंपनियों के मूल्यांकन और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के साथ बदल सकता है। कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 और 2021 में भी उनकी संपत्ति पर दबाव देखने को मिला था।
चौधरी को अक्सर नेपाल का सबसे अमीर व्यक्ति कहा जाता है। उनकी पहचान केवल संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने नेपाल के निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी समुदाय में भी प्रभावशाली स्थान बनाया है।
भारत समेत कई देशों में फैला है कारोबार
बिनोद चौधरी का कारोबारी साम्राज्य CG Corp Global समूह के इर्द-गिर्द विकसित हुआ है। इस समूह की गतिविधियां खाद्य उत्पादों, होटल और हॉस्पिटैलिटी सहित कई क्षेत्रों में फैली हुई हैं। चौधरी समूह में नियंत्रक हिस्सेदारी रखते हैं और इसके कारोबार का इतिहास कई दशकों पुराना है। उनके समूह से जुड़ा लोकप्रिय नूडल्स ब्रांड वाई-वाई (Wai Wai) नेपाल के बाहर भी अपनी पहचान बना चुका है। पैकेज्ड खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में इस ब्रांड की मौजूदगी ने चौधरी के कारोबारी विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में भी समूह की गतिविधियां कई देशों तक फैली हैं। भारत में होटल कारोबार से जुड़ी उसकी मौजूदगी भी उल्लेखनीय है। समूह की कंपनियां अलग-अलग बाजारों में निवेश और विस्तार के जरिए अपनी अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने की कोशिश करती रही हैं। इसी विविध कारोबारी नेटवर्क के कारण चौधरी को नेपाल के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में गिना जाता है। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि क्षेत्रीय बाजार से शुरुआत करके खाद्य उत्पादों और हॉस्पिटैलिटी जैसे उद्योगों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है।
कम्युनिस्ट पार्टी से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
कारोबार में बड़ी सफलता हासिल करने वाले बिनोद चौधरी की राजनीति में शुरुआत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी), यानी CPN-UML, के साथ हुई थी। वर्ष 2008 में नेपाल की संविधान सभा के चुनाव के बाद वह आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत संविधान सभा के सदस्य बने। उस समय उन्होंने सीपीएन-यूएमएल का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी संसद में एंट्री सीधे निर्वाचन क्षेत्र से जीतने के बजाय पार्टी की आनुपातिक सूची के माध्यम से हुई थी।
बाद में उन्होंने नेपाली कांग्रेस का रुख किया। वर्ष 2017 में वह आनुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत निर्वाचित सांसद के रूप में इस पार्टी से जुड़े। इसके बाद पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। नेपाली कांग्रेस के 14वें महाधिवेशन में 2021 में वह मधेशी कोटे के तहत 2,206 वोट हासिल करके केंद्रीय समिति के सदस्य चुने गए थे। इस तरह कारोबारी पहचान के साथ-साथ उन्होंने पार्टी के भीतर भी अपना राजनीतिक आधार मजबूत किया।









