सोने में लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट के बीच बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने कीमतों को लेकर अनुमान जारी किया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।
बिजनेस न्यूज़: सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह कमजोरी के बीच Bank of America (BofA) के नए अनुमान ने बुलियन मार्केट में चर्चा बढ़ा दी है। बैंक ने अपने ताजा आउटलुक में कहा है कि 2026 की चौथी तिमाही में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे जा सकती है। BofA के अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 3,750 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
अगर इस स्तर को मौजूदा डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर भारतीय मुद्रा में बदलें, तो कीमत लगभग ₹1.15 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठ सकती है। हालांकि, भारत में सोने का वास्तविक भाव केवल अंतरराष्ट्रीय कीमत से तय नहीं होता। रुपये की चाल, आयात लागत, टैक्स, स्थानीय मांग और घरेलू प्रीमियम के कारण भारतीय बाजार में कीमत अलग हो सकती है।
BofA ने क्यों बदला सोने पर नजरिया?
Bank of America लंबे समय से सोने को लेकर तेजी वाला अनुमान रखने वाले प्रमुख संस्थानों में रहा है। बैंक ने पहले सोने के लिए 5,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य भी बताया था। अब उसके नए आकलन में कीमतों को लेकर ज्यादा सतर्क रुख दिखाई दे रहा है। बैंक के अनुसार, सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ऊर्जा की बढ़ती कीमतें हो सकती हैं।
अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो इससे कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं, जिसका असर सोने की मांग पर पड़ सकता है।
क्या ₹1.10 लाख के आसपास आ सकता है सोना?
BofA के एक वैकल्पिक परिदृश्य में इससे भी कम कीमत का अनुमान सामने आया है। बैंक के मुताबिक, अगर मध्य पूर्व में लंबे समय तक तनाव बना रहता है और कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो 2027 में सोने की औसत कीमत करीब 3,500 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। भारतीय मुद्रा में यह स्तर लगभग ₹1.08 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठता है।
हालांकि, बैंक ने साफ तौर पर इसे अपना मुख्य अनुमान नहीं बताया है। इसलिए इसे संभावित जोखिम परिदृश्य के तौर पर देखना चाहिए, न कि निश्चित भविष्यवाणी के रूप में।
$5,000 के पुराने अनुमान का क्या हुआ?

इस साल की शुरुआत में BofA ने सोने के लिए 5,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य दिया था। बैंक का मानना था कि इस स्तर को हासिल करने के लिए निवेशकों की मांग में पर्याप्त वृद्धि जरूरी होगी। अब बैंक के आकलन में मौजूदा निवेश मांग लगभग 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को सपोर्ट करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
5,000 डॉलर के स्तर तक पहुंचने के लिए निवेश मांग में और बड़ा उछाल आवश्यक होगा। यही वजह है कि मौजूदा परिस्थितियों में बैंक ने अपने मूल्य आकलन को लेकर अधिक सावधानी बरती है।
सेंट्रल बैंकों की गोल्ड बिकवाली भी जोखिम
सोने की कीमतों के लिए दूसरा बड़ा जोखिम केंद्रीय बैंकों की बिकवाली हो सकता है। BofA के मुताबिक, अगर तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं तो ऊर्जा आयात करने वाले देशों की करेंसी और बाहरी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे हालात में कुछ केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा या अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए अपने गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा बेच सकते हैं। बैंक के अनुसार, दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने करीब 60 टन सोना बेचा था, जिसमें तुर्की की बिक्री प्रमुख रही।
अगर केंद्रीय बैंकों की बिक्री बढ़ती है और साथ ही छोटे निवेशक गोल्ड ETF से पैसा निकालते हैं, तो बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ सकती है। इससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनने की संभावना रहेगी।
अभी सोने और चांदी का क्या भाव है?
दिए गए बाजार आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,217 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी 61 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बनी हुई है। भारतीय वायदा बाजार यानी MCX पर सोना करीब ₹1,50,250 प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2,25,545 प्रति किलोग्राम के स्तर पर बताई गई है।
इस सप्ताह सोने में लगभग ₹3,200 और चांदी में करीब ₹9,100 की गिरावट दर्ज की गई है। यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब दोनों कीमती धातुओं में कमजोरी देखने को मिली है।











