झारखंड के बोकारो में हज यात्रा कराने के नाम पर 34.20 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। माराफारी थाना क्षेत्र में दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी मोहम्मद आलमगीर और उसकी बहन यासमीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि दोनों ने हज यात्रा कराने का भरोसा देकर कई लोगों से लाखों रुपये लिए, लेकिन बाद में न तो यात्रा कराई और न ही जमा रकम वापस की।
शिकायत के मुताबिक मामले की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी। शिकायतकर्ता खाजा मोइनुद्दीन अंसारी की मुलाकात सिवानडीह स्थित अपने ससुराल आने के दौरान मोहम्मद आलमगीर से हुई थी। बातचीत के दौरान आलमगीर ने हज यात्रा कराने की बात कही और प्रति व्यक्ति करीब 5.70 लाख रुपये खर्च आने की जानकारी दी। उसने बरेली में अपनी कंपनी होने का भी दावा किया था। उसकी बातों पर भरोसा कर शिकायतकर्ता और उनके परिचितों ने हज यात्रा के लिए रकम जमा कर दी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके साथ उनके साले जमील अहमद और डुमरो सिवानडीह निवासी गोल बाबू अंसारी ने भी अपनी-अपनी पत्नियों के साथ हज यात्रा पर जाने की तैयारी की थी। सभी ने आरोपियों को अलग-अलग तारीखों में पैसे दिए। इस तरह कुल 34.20 लाख रुपये आरोपियों के पास जमा किए गए।
लोगों ने रकम इसलिए दी थी क्योंकि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि आरोपियों की व्यवस्था के जरिए हज यात्रा कराई जाएगी। धार्मिक यात्रा होने के कारण परिवारों ने भी इस उम्मीद में पैसे जुटाए कि वे निर्धारित समय पर पवित्र हज यात्रा के लिए रवाना हो सकेंगे। कई लोगों के लिए यह जीवन की महत्वपूर्ण धार्मिक इच्छा से जुड़ा हुआ था।
लेकिन बाद में आरोपियों की ओर से बताया गया कि हज का सरकारी कोटा कम हो गया है, जिसके कारण वर्ष 2025 में यात्रा कराना संभव नहीं होगा। इसके बाद शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित लोगों ने अपने खर्च पर हज यात्रा करने का फैसला किया। यानी जिन लोगों ने आरोपियों को यात्रा कराने के लिए पैसे दिए थे, उन्हें खुद ही यात्रा की व्यवस्था करनी पड़ी।
इसके बाद जब जमा की गई रकम वापस मांगने की कोशिश की गई तो कथित तौर पर पैसा वापस नहीं किया गया। आरोप है कि सिवानडीह स्थित कंपनी का कार्यालय भी बाद में बंद हो गया। इससे शिकायतकर्ता और अन्य लोगों की चिंता और बढ़ गई। काफी समय तक रकम वापस नहीं मिलने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
शिकायत के आधार पर माराफारी पुलिस ने अब मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने वास्तव में हज यात्रा कराने के नाम पर लोगों से पैसे लिए थे या इसके पीछे कोई अन्य व्यवस्था थी। जांच के दौरान पैसों के लेनदेन, कंपनी और आरोपियों के संपर्कों की जानकारी भी जुटाई जा सकती है।
पुलिस के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि कुल कितने लोगों से रकम ली गई थी। शिकायत में कई लोगों द्वारा पैसे दिए जाने की बात सामने आई है। यदि जांच में और लोगों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी की पुष्टि होती है तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।
हज यात्रा के नाम पर ठगी का मामला सामने आने के बाद लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। धार्मिक यात्रा के लिए किसी एजेंट या निजी कंपनी को बड़ी रकम देने से पहले उसकी वैधता, पंजीकरण और यात्रा कराने की अधिकृत व्यवस्था की जानकारी हासिल करना जरूरी है। केवल किसी व्यक्ति के भरोसे या मौखिक आश्वासन पर लाखों रुपये देना जोखिम भरा हो सकता है।
इस मामले में भी आरोपियों ने कंपनी और हज यात्रा कराने की व्यवस्था का भरोसा दिया था। लोगों ने इसी भरोसे पर बड़ी रकम जमा कर दी। बाद में यात्रा नहीं हो सकी और रकम वापस नहीं मिलने का आरोप लगाया गया। अब पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में वास्तव में क्या हुआ और आरोपियों की भूमिका कितनी थी।
मामले की जांच में बैंक खातों और पैसों के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज अहम सुराग साबित हो सकते हैं। पुलिस यह भी देख सकती है कि शिकायतकर्ताओं से ली गई रकम किन खातों में गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। यदि रकम अलग-अलग लोगों के खातों में ट्रांसफर हुई है तो उससे कथित नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सकती है।
आरोपियों के बताए गए कार्यालय और कंपनी से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कंपनी वास्तव में किस तरह का कारोबार करती थी और क्या उसके पास हज यात्रा कराने से संबंधित कोई वैध अनुमति या व्यवस्था थी।
शिकायतकर्ताओं के लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी बड़ी है। हज यात्रा के लिए रकम जमा करने के बाद उन्हें अपनी धार्मिक यात्रा की योजना बदलनी पड़ी। इसके अलावा जमा की गई बड़ी रकम वापस नहीं मिलने का आरोप उनके लिए अलग चिंता का विषय बन गया।
बोकारो में सामने आया यह मामला यह भी दिखाता है कि धार्मिक और भावनात्मक विश्वास का फायदा उठाकर आर्थिक धोखाधड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए किसी भी धार्मिक यात्रा की बुकिंग या एजेंट के माध्यम से भुगतान करने से पहले दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी की जांच करना जरूरी है।
फिलहाल माराफारी पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान, पैसों के लेनदेन, कंपनी से जुड़े दस्तावेज और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। इसके बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
कुल मिलाकर, बोकारो के माराफारी थाना क्षेत्र में हज यात्रा कराने के नाम पर 34.20 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। बरेली निवासी मोहम्मद आलमगीर और उसकी बहन यासमीन पर कई लोगों से रकम लेने और बाद में हज यात्रा नहीं कराने तथा पैसा वापस नहीं करने का आरोप है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कितने लोग प्रभावित हुए और जमा रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया।











