बोकारो जिले में बारिश के बीच तेनुघाट-बोकारो नहर मार्ग पर एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। गुरुवार देर रात चांपी के समीप बारिश के कारण सड़क पर जमा भारी कीचड़ के चलते एक फॉर्च्यूनर कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई और सीधे नहर के पानी में जा गिरी। हादसे के समय कार में दो लोग सवार थे। गनीमत रही कि दोनों ने कार के नहर में गिरते ही समय रहते बाहर छलांग लगा दी, जिससे उनकी जान बच गई। हादसे में दोनों घायल हुए हैं और उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने दोनों को खतरे से बाहर बताया।
हादसे की सूचना मिलते ही तेनुघाट ओपी प्रभारी भजनलाल महतो पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मौके की स्थिति का जायजा लेने के बाद घायल दोनों लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसा देर रात हुआ था, जिसके कारण घटनास्थल पर तत्काल लोगों की संख्या कम थी। सुबह होते ही नहर में फॉर्च्यूनर गिरने की खबर आसपास के इलाकों में फैल गई और वाहन को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचने लगे।
घायलों की पहचान जैनामोड़ के मोहनपुर निवासी रोहित कुमार और बबलू कुमार के रूप में हुई है। दोनों तेनुघाट-बोकारो नहर मार्ग से होकर वापस जैनामोड़ लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार दोनों चांपी स्थित अपने मामा अजय महतो के घर आए हुए थे। वहां से वापस लौटने के दौरान लगातार बारिश के कारण सड़क पर कीचड़ की स्थिति काफी खराब हो गई थी। इसी दौरान उनकी फॉर्च्यूनर कार का संतुलन बिगड़ गया और वाहन नहर में जा गिरा।
बताया जा रहा है कि हादसे के समय सड़क पर काफी मात्रा में कीचड़ जमा था। बारिश लगातार होने के कारण सड़क की सतह फिसलन भरी हो गई थी। कार जैसे ही कीचड़ वाले हिस्से से गुजरी, चालक का वाहन पर नियंत्रण नहीं रहा। फॉर्च्यूनर सड़क छोड़कर नहर की ओर चली गई। वाहन के नहर में गिरते ही दोनों सवारों ने स्थिति को भांपते हुए बाहर छलांग लगा दी। इसी वजह से दोनों की जान बच सकी। अगर वे समय रहते वाहन से बाहर नहीं निकलते तो हादसा और गंभीर हो सकता था।
नहर में वाहन गिरने के बाद आसपास के लोगों को घटना की जानकारी हुई। पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। दोनों घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी प्राथमिक जांच की। इलाज के बाद दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई गई। हादसे में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन फॉर्च्यूनर के नहर में गिरने से वाहन को काफी नुकसान होने की आशंका है। शुक्रवार सुबह तक वाहन नहर में ही पड़ा था और उसे बाहर निकालने की तैयारी की जा रही थी।
सुबह घटनास्थल पर पहुंचने वाले लोगों के लिए नहर में फॉर्च्यूनर का गिरा होना चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और लोग हादसे के बारे में जानकारी लेते रहे। लोगों ने वाहन को नहर से बाहर निकालने की कोशिश और तैयारियों को भी देखा। घटनास्थल की स्थिति से अंदाजा लगाया जा रहा था कि बारिश के कारण सड़क की हालत काफी खराब हो गई थी और इसी वजह से वाहन के लिए नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हुआ।
स्थानीय लोगों ने तुपकाडीह से लेकर तेनुघाट तक नहर मार्ग की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। कई हिस्सों में सड़क की मरम्मत का काम भी चल रहा है। बारिश के कारण निर्माण और मरम्मत वाले हिस्सों में कीचड़ बढ़ गया है, जिससे वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा हो रही है। स्थानीय लोगों ने सड़क की खराब स्थिति और कीचड़ को हादसे की प्रमुख वजह बताया है।
इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। बारिश के मौसम में सड़क पर कीचड़ और गड्ढे होने से वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। खासकर रात के समय सड़क की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नजर नहीं आने से जोखिम और बढ़ सकता है। हादसा भी देर रात हुआ, जब बारिश के कारण सड़क पर फिसलन थी। ऐसे में वाहन के अचानक नियंत्रण से बाहर होने की स्थिति बनी और फॉर्च्यूनर नहर में जा गिरी।
तेनुघाट-बोकारो नहर मार्ग का यह हिस्सा पहले से ही स्थानीय आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। तेनुघाट डैम से जुड़ा नहर तंत्र बोकारो स्टील प्लांट के लिए भी महत्वपूर्ण है। झारखंड पर्यटन विभाग के अनुसार तेनुघाट डैम से करीब 29 किलोमीटर लंबी नहर के जरिए बोकारो स्टील प्लांट के उपयोग के लिए पानी पहुंचाया जाता है। ऐसे में इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही के साथ-साथ सड़क की स्थिति भी स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
हादसे के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी। इससे पहले तेनुघाट डैम के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के कारण बांध के छह रेडियल गेट भी खोले गए थे और करीब 9,710 क्यूसेक पानी दामोदर नदी में छोड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। लगातार बारिश के कारण क्षेत्र की सड़कों पर जलजमाव और कीचड़ की समस्या बढ़ने की संभावना बनी हुई थी।
हालांकि इस हादसे में राहत की बात यह रही कि कार में सवार दोनों लोग समय रहते वाहन से बाहर निकल गए। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई। हादसे के बाद पुलिस ने घटना की जानकारी जुटाई और वाहन को नहर से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क पर मौजूद गड्ढे और कीचड़ की वजह से वाहन चालकों को काफी परेशानी हो रही है। बारिश के दौरान सड़क का बड़ा हिस्सा फिसलन वाला हो जाता है। ऐसे में तेज रफ्तार से चलने वाले वाहन के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। लोगों ने सड़क की मरम्मत का काम जल्द पूरा कराने और ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था करने की जरूरत बताई है।
घटना के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि सड़क की मरम्मत के दौरान बारिश के मौसम में वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं या नहीं। जहां सड़क पर गड्ढे या कीचड़ अधिक हो, वहां संकेतक, बैरिकेड या अन्य चेतावनी व्यवस्था होने से वाहन चालकों को पहले से सावधान किया जा सकता है। खासकर नहर के किनारे चलने वाले मार्गों पर ऐसी व्यवस्था और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि वाहन का संतुलन बिगड़ने पर सीधे पानी में गिरने का खतरा रहता है।
पुलिस ने हादसे के बाद घटनास्थल का जायजा लिया। शुरुआती जानकारी में सड़क पर जमा कीचड़ के कारण वाहन के अनियंत्रित होने की बात सामने आई है। फिलहाल किसी अन्य वाहन की टक्कर या किसी आपराधिक कारण की जानकारी नहीं है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक हादसा सड़क की स्थिति और बारिश के कारण पैदा हुई फिसलन से जुड़ा हुआ है।
नहर में फॉर्च्यूनर गिरने की खबर के बाद आसपास के लोगों की भीड़ जमा होने से कुछ समय के लिए घटनास्थल पर लोगों की आवाजाही बढ़ गई। लोग वाहन को देखने और हादसे की जानकारी लेने के लिए पहुंचते रहे। वाहन को बाहर निकालने की तैयारी भी की जाती रही। नहर में गिरे वाहन को निकालने के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी व्यवस्था की जा रही थी।
इस घटना में घायल हुए रोहित कुमार और बबलू कुमार के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि दोनों की हालत गंभीर नहीं हुई। कार के नहर में गिरने के बाद भी दोनों समय रहते बाहर निकल गए। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों के खतरे से बाहर होने की जानकारी दी गई है। हादसे में किसी अन्य व्यक्ति के घायल होने या मौत की सूचना सामने नहीं आई है।
बारिश के मौसम में बोकारो और आसपास के इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। सड़क पर पानी और कीचड़ जमा होने से टायरों की पकड़ कमजोर हो सकती है। वहीं गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल होता है। यदि सड़क के किनारे नहर या जलाशय हो तो ऐसी स्थिति में वाहन चालक के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।
तेनुघाट-बोकारो नहर मार्ग पर हुए इस हादसे ने सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता को फिर सामने ला दिया है। लोगों का कहना है कि सड़क मरम्मत का काम चल रहा है, लेकिन जब तक इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जाता, तब तक बारिश के दौरान दुर्घटना का खतरा बना रह सकता है।
फिलहाल पुलिस की ओर से हादसे में घायल दोनों लोगों की स्थिति सामान्य बताई गई है। नहर में गिरी फॉर्च्यूनर को बाहर निकालने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। घटना की शुरुआती वजह बारिश के कारण सड़क पर जमा कीचड़ और वाहन के अनियंत्रित होने को माना जा रहा है। स्थानीय लोगों की ओर से सड़क की खराब स्थिति को लेकर उठाए गए सवालों के बीच अब मार्ग की स्थिति सुधारने की मांग भी सामने आ रही है।
बोकारो के चांपी के पास हुआ यह हादसा इस बात की याद दिलाता है कि बारिश के दौरान खराब सड़क और जलस्रोत के किनारे बने मार्ग पर वाहन चलाते समय अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। इस घटना में समय रहते कार से बाहर निकलने के कारण दोनों लोगों की जान बच गई, लेकिन नहर में वाहन गिरने की घटना ने सड़क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब स्थानीय लोगों की नजर सड़क की मरम्मत और मार्ग को सुरक्षित बनाने की कार्रवाई पर है।











