मध्यप्रदेश के जबलपुर में बरगी बांध नाव हादसे के बाद जांच प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। एक जीवित बचे व्यक्ति ने नाव को काटने पर आपत्ति जताई, जबकि प्रशासन ने इसे राहत और सुरक्षा कारणों से जरूरी बताया।
जबलपुर: बरगी बांध नाव हादसे के बाद अब जांच को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। हादसे में बचे अधिवक्ता ने नाव को काटे जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे तकनीकी जांच प्रभावित हो सकती है और असली वजह सामने आने में दिक्कत आएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि SDRF और NDRF ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया, जबकि इंजन को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
बरगी बांध नाव हादसा: नाव काटने पर उठे सवाल, जांच पर असर की आशंका
मध्यप्रदेश के Jabalpur जिले में हुए बरगी बांध नाव हादसे के बाद अब जांच प्रक्रिया को लेकर नए सवाल सामने आए हैं। हादसे से बचने वाले अधिवक्ता रोशन आनंद कोरी ने नाव को काटे जाने पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे हादसे की असली वजह तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने बताया कि जब नाव को पानी से बाहर निकाला गया था, तब वह काफी हद तक सुरक्षित स्थिति में थी। ऐसे में पूरी संरचना और इंजन की तकनीकी जांच जरूरी थी, ताकि दुर्घटना के कारणों का सही पता लगाया जा सके। उनका आरोप है कि नाव को काट देने से उसकी मजबूती और डिजाइन का वैज्ञानिक विश्लेषण अब प्रभावित होगा।
रेस्क्यू ऑपरेशन में नाव काटने का फैसला, पुलिस ने दी सफाई
बरगी सिटी के पुलिस अधीक्षक अंजुल अयंक मिश्रा के अनुसार, National Disaster Response Force और State Disaster Response Force की टीमों ने यह सुनिश्चित करने के लिए नाव को काटा था कि उसके भीतर कोई व्यक्ति फंसा न रह जाए। यह कदम बचाव कार्य के दौरान सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी जांच के लिए नाव का इंजन सुरक्षित रूप से जब्त कर लिया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी नाव की संरचनात्मक जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, जिससे हादसे के वास्तविक कारणों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
13 लोगों की मौत, पुरानी नाव और सुरक्षा मानकों पर सवाल
यह हादसा 30 अप्रैल को Bargi Dam में हुआ था, जब राज्य पर्यटन विभाग की नाव अचानक पलट गई। इस दुर्घटना में महिलाओं और बच्चों समेत 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
घटना के बाद नाव की उम्र और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल उठ रहे हैं। रोशन कोरी के मुताबिक, यह नाव 2006 मॉडल की थी और लगभग दो दशक पुरानी हो चुकी थी। ऐसे में इसके मटेरियल, मेंटेनेंस और सुरक्षा इंतजामों की गहन जांच जरूरी थी, क्योंकि केवल इंजन की जांच से पूरी तस्वीर सामने आना मुश्किल है।
सरकार ने जांच के आदेश दिए, जिम्मेदारों पर कार्रवाई
हादसे के बाद राज्य सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही नाव संचालित करने वाले चालक दल के तीन सदस्यों को बर्खास्त कर दिया गया है और फिलहाल ऐसी नौकाओं के संचालन पर रोक लगा दी गई है।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस बीच, हादसे ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।










