BRICS में मोदी बोले- ‘हम किसी के खिलाफ नहीं’, सबको साथ लेकर चलने पर जोर; संयुक्त बयान पर बनी सहमति

18वें BRICS समिट में PM मोदी ने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं, सबको साथ लेकर चलने का मंच है। ईरान, सऊदी और UAE के बीच मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति

18वें BRICS समिट में PM मोदी ने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाला मंच है। पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ईरान, सऊदी अरब और UAE के अलग रुख के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति बनी।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाला मंच है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के अलग-अलग रुख के बावजूद BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति बनी।

मोदी ने BRICS की एकता को ठोस परिणामों में बदलने की बात कही

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें BRICS समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य सदस्य देशों के नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS अब एक परिपक्व संगठन बन चुका है और इसकी एकता तथा आपसी सहमति को ठोस नतीजों में बदलने का समय आ गया है।

उन्होंने संगठन के लिए अगले 20 वर्षों का एक नया और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री के मुताबिक, BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संगठन के कामकाज की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मोदी ने इसके लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा, जिससे अलग-अलग देशों के अध्यक्ष बनने के बावजूद पहले लिए गए फैसलों पर काम जारी रखा जा सके और उनके क्रियान्वयन की निगरानी हो।

फैसलों की निगरानी के लिए डिजिटल रिकॉर्ड का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री ने BRICS के फैसलों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का सुझाव भी दिया। इसमें प्रत्येक निर्णय से जुड़ी जिम्मेदारी, उसे पूरा करने की समयसीमा और अब तक हुई प्रगति का विवरण दर्ज किया जा सकेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य संगठन के फैसलों को केवल घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय उनके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है। मोदी ने BRICS की एकता को वास्तविक परिणामों में बदलने पर जोर दिया।

ईरान, सऊदी अरब और UAE के बीच मतभेद के बावजूद संयुक्त बयान

BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति इस समिट का महत्वपूर्ण घटनाक्रम रही। इसके लिए सदस्य देशों के बीच बातचीत सुबह 4 बजे तक चलने की जानकारी सामने आई।

यह सहमति ऐसे समय बनी, जब पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ईरान, सऊदी अरब और UAE BRICS के मंच पर साथ हैं, लेकिन क्षेत्र के कई मुद्दों पर इन देशों के रुख अलग-अलग रहे हैं।

भारत ने बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर करने और साझा सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि क्षेत्रीय मतभेद BRICS की सामूहिक बातचीत और साझा बयान के रास्ते में बाधा न बनें।

‘ग्लोबल साउथ’ को नियम बनाने में बराबर भागीदारी मिले

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के भविष्य के नियम तय करने में सभी देशों की बराबर भागीदारी होनी चाहिए।

मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को केवल दूसरे देशों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें वैश्विक नियम बनाने की प्रक्रिया में भी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से नई तकनीकों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, नई तकनीकें आने वाले समय को तेजी से बदल रही हैं और इनसे जुड़े नियम भी भविष्य में तय किए जाएंगे। ऐसे में ग्लोबल साउथ की इन चर्चाओं में समान भागीदारी आवश्यक है।

भारत की BRICS अध्यक्षता में 350 से ज्यादा बैठकें

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान हुई गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता का फोकस आम लोगों और मानवता को प्राथमिकता देने पर रहा।

इस दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया। मोदी ने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें हुईं और BRICS देशों की टीमों का करीब 30 शहरों में स्वागत किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS के कामकाज को आम लोगों से जोड़ना भी भारत की अध्यक्षता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। BRICS समिट के लिए उनका नई दिल्ली के भारत मंडपम में स्वागत किया गया।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 15 जून 2020 की गलवान झड़प के बाद यह जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है। गलवान घटना के बाद भारत और चीन के संबंधों में तनाव बढ़ा था, हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा।

भारत में चीन से आयात 2020-21 में करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से अधिक हो गया। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में चीन से भारत का आयात करीब दोगुना हुआ।

BRICS समिट के बाद प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी होने की जानकारी दी गई है।

पुतिन और जिनपिंग समेत कई नेता भारत मंडपम पहुंचे

BRICS सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और अन्य सदस्य देशों के नेता शामिल हुए।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान भारत मंडपम पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने उनका स्वागत किया। वहीं, शी जिनपिंग भी सम्मेलन स्थल पहुंचे। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का भी प्रधानमंत्री ने स्वागत किया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने BRICS समिट के दौरान बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिज़ेंकोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं की बैठक दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई।

BRICS में डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी समिट के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। सदस्य देश आपसी कारोबार में अमेरिकी डॉलर के इस्तेमाल को कम करने और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि, BRICS का अभी अपना कोई एक साझा भुगतान सिस्टम या साझा मुद्रा नहीं है।

भारत की अध्यक्षता में स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और आसान डिजिटल भुगतान पर जोर दिए जाने की जानकारी सामने आई है। भारत BRICS देशों के डिजिटल भुगतान सिस्टम और डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

BRICS के अगले 20 साल के एजेंडे पर फोकस

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश BRICS के दीर्घकालिक विस्तार और प्रभाव पर केंद्रित रहा। उन्होंने संगठन की एकता को मजबूत करने, निर्णयों को लागू करने और अगले दो दशकों के लिए नया एजेंडा तैयार करने पर जोर दिया।

भारत के लिए इस समिट की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि एक ही मंच पर चीन, रूस, ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे अलग-अलग रणनीतिक हित रखने वाले देश मौजूद हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच साझा बयान पर सहमति को बहुपक्षीय संवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है।

मोदी ने अपने संबोधन में BRICS को किसी के खिलाफ खड़े संगठन के बजाय सभी को साथ लेकर चलने वाला मंच बताया। भारत ने भी सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद संवाद और सहमति बनाने की दिशा में अपनी भूमिका पर जोर दिया।

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