BRICS एक अंतरराष्ट्रीय समूह है जिसमें प्रमुख रूप से India, China, Russia और South Africa शामिल हैं। इसका उद्देश्य विकासशील देशों की वैश्विक मंच पर भूमिका को मजबूत करना और बहुध्रुवीय (multipolar) विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना माना जाता है।
नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में 14 मई को नई दिल्ली में होने वाली BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले वैश्विक कूटनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस अहम बैठक में चीन का कोई उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए सवाल खड़े हो गए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि वह इस बैठक में शीर्ष स्तर पर भाग नहीं लेगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंच पर भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा पहले से ही चरम पर है।
चीन की अनुपस्थिति ने बढ़ाई कूटनीतिक चर्चाएं
China की गैरहाजिरी को लेकर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आम तौर पर ब्रिक्स जैसे मंचों पर चीन की सक्रिय भूमिका रहती है, लेकिन इस बार उसका उच्च प्रतिनिधित्व न भेजना रणनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, चीन की ओर से शेरपा स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने की संभावना है, लेकिन विदेश मंत्री स्तर की भागीदारी नहीं होगी।
अमेरिका-चीन तनाव का असर?

इस घटनाक्रम के पीछे वैश्विक शक्ति संतुलन और अमेरिका-चीन संबंधों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लंबे समय से ब्रिक्स की नीतियों और इसके विस्तार को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाते रहे हैं। ट्रंप ने कई बार आरोप लगाया है कि ब्रिक्स समूह अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि कोई देश “अमेरिका विरोधी नीतियों” का समर्थन करता है, तो उस पर अतिरिक्त व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।इसी पृष्ठभूमि में चीन के इस निर्णय को अमेरिका-चीन तनाव और रणनीतिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता में अहम बैठक
वर्तमान में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है, और यह बैठक भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। India ने इस वर्ष के लिए “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” थीम निर्धारित की है। नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में वैश्विक दक्षिण (Global South), आर्थिक साझेदारी, बहुपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
बैठक में कई प्रमुख सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें Russia, Brazil, South Africa, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और इंडोनेशिया शामिल हैं। United Arab Emirates की ओर से उप-विदेश मंत्री स्तर पर प्रतिनिधित्व किए जाने की संभावना है, जबकि ईरान भी उप-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेज सकता है।










