Sunil Bharti Mittal के Bharti Airtel से जुड़े समूह द्वारा ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी BT Group में हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावित योजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बिजनेस न्यूज़: भारत के प्रमुख उद्योगपति और भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कारोबारी दुनिया में सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी निवेश इकाई भारती ग्लोबल ब्रिटेन की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी BT Group plc में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस संभावित कदम को लेकर ब्रिटेन सरकार की ओर से विरोध की संभावना जताई जा रही है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश सरकार का मानना है कि BT जैसी रणनीतिक और महत्वपूर्ण टेलीकॉम कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी बढ़ने से राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे पर नियंत्रण से जुड़े सुरक्षा सवाल उठ सकते हैं।
BT Group क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?
BT Group, जिसे पहले British Telecom के नाम से जाना जाता था, यूनाइटेड किंगडम की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण दूरसंचार कंपनियों में से एक है। यह कंपनी देश की संचार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अहम भूमिका निभाती है। ब्रॉडबैंड, मोबाइल नेटवर्क और सरकारी संचार सेवाओं में इसकी मजबूत मौजूदगी इसे ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है। इसी वजह से सरकार इस कंपनी में किसी भी बड़े विदेशी निवेश या नियंत्रण परिवर्तन को संवेदनशील मुद्दा मानती है।
सुनील भारती मित्तल का BT में निवेश

साल 2024 में भारती एंटरप्राइजेज की अंतरराष्ट्रीय निवेश इकाई Bharti Global ने लगभग 33,000 करोड़ रुपये (करीब 3.6 बिलियन डॉलर) का निवेश करते हुए Altice UK से BT Group में 24.5% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस बड़े निवेश के बाद सुनील भारती मित्तल BT के सबसे बड़े शेयरधारकों में शामिल हो गए और उन्हें कंपनी के बोर्ड में भी जगह मिली। यह सौदा भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार का एक बड़ा उदाहरण माना गया था।
हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारती ग्रुप अपनी हिस्सेदारी को लगभग 24.5% से बढ़ाकर 29.9% तक ले जाने की संभावना पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह BT Group में एक और बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जाएगा। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसी भी संभावित बढ़ोतरी के लिए नियामक मंजूरी और ब्रिटिश सरकार की स्वीकृति आवश्यक होगी, जो इस प्रक्रिया को जटिल बना सकती है।
ब्रिटेन सरकार का संभावित विरोध
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ब्रिटिश सरकार इस तरह के किसी भी कदम का विरोध कर सकती है। इसका मुख्य कारण देश के “क्रिटिकल नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर” यानी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय ढांचे पर नियंत्रण बनाए रखना है। टेलीकॉम सेक्टर को ब्रिटेन में रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं से सीधे जुड़ा होता है। ऐसे में किसी भी बड़े विदेशी निवेश पर सरकार सख्त नजर रखती है।
इस मामले पर अभी तक BT Group, ब्रिटेन सरकार और भारती एयरटेल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के भीतर भी इस विषय पर स्पष्ट रणनीति को लेकर सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है। पिछले सप्ताह आई एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि भारती एंटरप्राइजेज संभावित रूप से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है, लेकिन कंपनी के एक प्रवक्ता ने बाद में यह स्पष्ट किया कि फिलहाल मौजूदा हिस्सेदारी से संतुष्टि है और कोई तत्काल विस्तार योजना नहीं है।










