Budget 2026 में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। टैक्स स्लैब, TDS रेट्स, स्टैंडर्ड डिडक्शन, ज्वाइंट टैक्सेशन और LTCG लिमिट में संभावित बदलाव से मिडिल क्लास और निवेशकों की जेब मजबूत हो सकती है।
Budget 2026: यूनियन बजट 2026 से पहले देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की नजरें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। पिछले कुछ सालों में सरकार की प्रायोरिटी मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स को राहत देने की रही है, ताकि उनकी जेब में ज्यादा पैसा बचे और खपत बढ़े। इससे इकोनॉमी को भी रफ्तार मिलती है।
2020 में नई इनकम टैक्स रीजीम की शुरुआत और उसके बाद हर साल उसमें सुधार इसी रणनीति का हिस्सा रहे हैं। पिछले बजट में नई रीजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स-फ्री कर दिया गया था, जिससे टैक्सपेयर्स को बड़ा तोहफा मिला। अब सवाल यह है कि Budget 2026 में क्या फिर से कोई बड़ा सरप्राइज मिलने वाला है और किस तरह से टैक्स स्ट्रक्चर बदल सकता है।
1. टैक्स स्लैब में बदलाव की संभावना
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार सरकार पुरानी टैक्स रीजीम के स्लैब में बदलाव कर सकती है। फिलहाल ओल्ड रीजीम में टैक्स स्ट्रक्चर जस का तस बना हुआ है, जबकि नई रीजीम को लगातार अट्रैक्टिव बनाया जा रहा है। सरकार का फोकस मिडिल इनकम ग्रुप को राहत देने पर हो सकता है, ताकि कंजम्प्शन बढ़े और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।
अगर टैक्स स्लैब में बदलाव होता है, तो छोटे और मिडिल इनकम ग्रुप के लिए टैक्स बोझ कम होगा। इससे टैक्सपेयर्स की बचत बढ़ सकती है और वे अपनी इनकम का अधिक हिस्सा खर्च या निवेश कर पाएंगे।
2. TDS रेट्स में सुधार की संभावना
वर्तमान में अलग-अलग ट्रांजेक्शंस पर कई TDS रेट्स लागू हैं, जिससे टैक्सपेयर्स को कंप्लायंस में परेशानी होती है। Budget 2026 में सरकार TDS रेट्स को सरल बनाने पर विचार कर सकती है। ऐसा होने पर TDS को केवल 2–3 स्लैब तक सीमित किया जा सकता है।
इस बदलाव का फायदा यह होगा कि टैक्सपेयर्स को अलग-अलग रेट्स और नियमों को याद रखने की जरूरत नहीं होगी। कंप्लायंस आसान होगा और टैक्स भरने की प्रक्रिया सरल बन जाएगी।
3. ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ सकती है
नई टैक्स रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि पुरानी रीजीम में यह अभी भी 50,000 रुपये है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए सरकार ओल्ड रीजीम में भी स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की संभावना पर विचार कर सकती है।
अगर यह ऐलान होता है, तो पुराने टैक्स रीजीम को अपनाने वाले सैलरीड टैक्सपेयर्स को सालाना 25,000 रुपये तक अतिरिक्त राहत मिल सकती है। इससे उनकी कुल टैक्स लायबिलिटी कम होगी और बचत बढ़ेगी।
4. पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन का प्रस्ताव
आईसीएआई की सिफारिश के अनुसार सरकार पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम लाने पर विचार कर सकती है। इस सिस्टम से परिवार की कुल टैक्स लायबिलिटी कम हो सकती है।
ज्वाइंट टैक्सेशन लागू होने पर पति-पत्नी की कुल इनकम को मिलाकर टैक्स स्लैब पर टैक्स लगेगा। इसका फायदा यह होगा कि एक परिवार में दोनों की कमाई को मिलाकर टैक्स कम से कम लगे और टैक्स सिस्टम ज्यादा संतुलित बन सके। यह बदलाव मिडिल क्लास परिवारों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
5. LTCG टैक्स-फ्री लिमिट में बढ़ोतरी
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी Budget 2026 में राहत की संभावना है। वर्तमान में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) की टैक्स-फ्री लिमिट 1.25 लाख रुपये है। सरकार इसे 1.5 लाख रुपये तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है।
इस बढ़ोतरी का असर निवेशकों पर सीधे पड़ेगा। म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश करने वाले टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त राहत मिलेगी और उन्हें अपनी निवेश रणनीति में अधिक लचीलापन मिलेगा।
Budget 2026 से टैक्सपेयर्स को क्या उम्मीदें
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स को प्राथमिकता दी जाएगी। नई टैक्स रीजीम, स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी, TDS रेट्स में सरलता और LTCG की राहत ऐसे कदम हो सकते हैं जो सीधे निवेशकों और आम टैक्सपेयर्स की जेब पर असर डालेंगे।









