केंद्रीय बजट 2026 पेश होने के बाद आज संसद में इस पर आम चर्चा होगी। Budget Session के तहत सत्तापक्ष और विपक्ष आर्थिक नीतियों पर अपनी राय रखेंगे। राहुल गांधी के भाषण पर विशेष ध्यान रहेगा।
Budget S ession 2026: केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) पेश होने के बाद आज संसद में इस पर आम चर्चा होने जा रही है। रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में बजट प्रस्तुत किए जाने के बाद यह चर्चा बजट सत्र (Budget Session) का अहम हिस्सा मानी जा रही है। संसद में होने वाली इस बहस पर देशभर की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यहीं से यह साफ होगा कि सरकार के आर्थिक एजेंडे पर सत्तापक्ष और विपक्ष का रुख क्या है।
बजट सत्र की कार्यवाही का एजेंडा
संसदीय प्रक्रिया के तहत बजट पेश होने के बाद पहले आम चर्चा होती है। इस दौरान सांसद बजट के समग्र ढांचे, प्राथमिकताओं और संभावित असर पर अपनी राय रखते हैं। इसके बाद अलग-अलग मंत्रालयों की अनुदान मांगों (Demands for Grants) पर विस्तार से बहस और वोटिंग होती है। आज की चर्चा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें विपक्ष सरकार की नीतियों पर सीधे सवाल उठाएगा और अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगा।
राहुल गांधी के भाषण पर सबकी नजर
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आज संसद में बोलने की पूरी संभावना है। बजट पेश होने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की थी। इससे संकेत मिला कि वह अपनी बात सीधे सदन के पटल पर रखना चाहते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि राहुल गांधी बजट 2026 को लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़ा हमला कर सकते हैं।
मीडिया से दूरी, संसद में जवाब का संकेत
रविवार को संसद परिसर में पत्रकारों ने जब राहुल गांधी से बजट पर उनकी राय पूछी, तो उन्होंने बाहर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने संक्षेप में कहा कि वह अपनी बात संसद में रखेंगे। उनके इस बयान से यह साफ हो गया कि कांग्रेस की रणनीति मीडिया बाइट से ज्यादा संसदीय बहस पर केंद्रित है। इस मौके पर उनके साथ उनकी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। दोनों ने अतिरिक्त सवालों का जवाब दिए बिना परिसर छोड़ दिया।
सोशल मीडिया पर उठाए गए सवाल
हालांकि राहुल गांधी ने संसद के बाहर बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बजट को लेकर अपनी चिंताएं जरूर साझा कीं। उन्होंने एक पोस्ट के जरिए उन मुद्दों की सूची दी, जिनके बारे में उनका कहना है कि बजट 2026 उन्हें ठीक से संबोधित करने में नाकाम रहा है। यह पोस्ट विपक्ष के संभावित तर्कों की झलक देता है, जो आज की बहस में सुनाई दे सकते हैं।

युवाओं की बेरोजगारी पर सवाल
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में सबसे पहले युवाओं की बेरोजगारी (unemployment) का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में हैं, लेकिन बजट में उनके लिए ठोस समाधान नहीं दिखता। उनका आरोप है कि सरकार रोजगार सृजन की बजाय आंकड़ों और दावों पर ज्यादा भरोसा कर रही है। यह मुद्दा लंबे समय से विपक्ष के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गिरावट
पोस्ट में राहुल गांधी ने गिरते हुए मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) सेक्टर की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि घरेलू विनिर्माण कमजोर हो रहा है, जिससे न सिर्फ रोजगार पर असर पड़ रहा है, बल्कि आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी हो सकती है। विपक्ष का तर्क है कि बजट में इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
निवेश और बचत पर चिंता
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि निवेशक (investors) देश से पूंजी निकाल रहे हैं और घरेलू बचत में लगातार गिरावट आ रही है। उनके अनुसार यह संकेत है कि अर्थव्यवस्था में भरोसा कमजोर हो रहा है। विपक्ष का मानना है कि बजट को इस चुनौती का सामना करने के लिए ज्यादा प्रभावी नीतिगत संकेत देने चाहिए थे।
किसानों की समस्याओं का जिक्र
कांग्रेस नेता ने किसानों की स्थिति को भी बजट की बड़ी कमी बताया। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही परेशान हैं और उन्हें राहत देने के लिए बजट में मजबूत प्रावधान नजर नहीं आते। विपक्ष अक्सर यह मुद्दा उठाता रहा है कि कृषि आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए मौजूदा कदम नाकाफी हैं।
ग्लोबल जोखिमों पर अनदेखी का आरोप
अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने आने वाले वैश्विक झटकों (global shocks) का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है, लेकिन बजट में इससे निपटने की स्पष्ट तैयारी नहीं दिखती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन जोखिमों को नजरअंदाज किया है।
भारत के असली संकटों से दूरी का दावा
राहुल गांधी ने अपने बयान में बजट को भारत के असली संकटों से अनजान बताया। उनके अनुसार यह ऐसा बजट है जो सुधार करने से इनकार करता है और जमीनी समस्याओं को हल करने में असफल रहता है। यह टिप्पणी संकेत देती है कि आज की बहस में विपक्ष सरकार की आर्थिक दिशा पर सवाल खड़े करेगा।









