बुर्किना फासो ने फ्रांस से तोड़े राजनयिक संबंध: सैन्य सरकार का बड़ा फैसला, पश्चिम अफ्रीका की भू-राजनीति में नया मोड़

बुर्किना फासो की सैन्य सरकार ने फ्रांस से राजनयिक संबंध खत्म कर दिए है । फ्रांस पर नव-औपनिवेशिक नीति और देश के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया।

बुर्किना फासो की सैन्य सरकार ने फ्रांस से राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा की है। सरकार ने फ्रांस पर देश के हितों के खिलाफ गतिविधियां चलाने और नव-औपनिवेशिक सोच अपनाने का आरोप लगाया, जबकि फ्रांस ने इन आरोपों को निराधार बताया।

औगाडूगू: पश्चिम अफ्रीका के देश बुर्किना फासो ने अपने पूर्व औपनिवेशिक शासक फ्रांस के साथ राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। सैन्य शासन ने आरोप लगाया है कि फ्रांस लगातार ऐसे कदम उठा रहा था, जो बुर्किना फासो के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं। सरकार का कहना है कि दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और विश्वास का आधार समाप्त हो चुका है, इसलिए यह निर्णय लिया गया।

इस फैसले को केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम अफ्रीका में बदलते रणनीतिक समीकरण, फ्रांसीसी प्रभाव में गिरावट और रूस-चीन जैसे नए वैश्विक खिलाड़ियों के बढ़ते प्रभाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पूरे साहेल क्षेत्र की कूटनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

सैन्य सरकार ने फ्रांस पर लगाए गंभीर आरोप

बुर्किना फासो के संचार मंत्री पिंगडवेंडे गिल्बर्ट ओएद्राओगो ने राष्ट्रीय प्रसारण के माध्यम से सरकार का आधिकारिक रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि फ्रांस लंबे समय से देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और उसकी नीतियां नव-औपनिवेशिक सोच को दर्शाती हैं।

सरकार के अनुसार फ्रांस केवल राजनीतिक दबाव ही नहीं बना रहा था, बल्कि ऐसे नेटवर्क का समर्थन भी कर रहा था जो देश की स्थिरता को कमजोर कर सकते हैं। सैन्य प्रशासन का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बुर्किना फासो को हाशिये पर धकेलने की कोशिश की जा रही थी।

इन्हीं कारणों से सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान परिस्थितियों में सामान्य राजनयिक संबंध बनाए रखना संभव नहीं है।

फ्रांस ने फैसले को बताया निराधार

फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने बुर्किना फासो के आरोपों को खारिज करते हुए इस निर्णय को "शत्रुतापूर्ण और निराधार" बताया है। फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि यह फैसला दोनों देशों के लंबे संबंधों के अनुरूप नहीं है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

फ्रांस ने अपने नागरिकों से बुर्किना फासो में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील भी की है। हालांकि उसने यह भी स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों के महत्व को समझता है।

2022 के सैन्य तख्तापलट के बाद लगातार बिगड़ते गए संबंध

दोनों देशों के संबंधों में तनाव अचानक नहीं आया। इसकी शुरुआत सितंबर 2022 में हुई, जब कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे ने सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता संभाली।

सत्ता में आने के बाद नई सरकार ने पश्चिमी देशों, विशेष रूप से फ्रांस, के प्रति आलोचनात्मक रुख अपनाया। सैन्य नेतृत्व ने दावा किया कि वर्षों तक फ्रांसीसी सैन्य सहयोग के बावजूद देश में सुरक्षा की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद बुर्किना फासो ने फ्रांसीसी सैनिकों की मौजूदगी समाप्त करने का फैसला लिया और उन्हें देश छोड़ने के लिए कहा। यह कदम दोनों देशों के रिश्तों में निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

आतंकवाद से जूझ रहा है बुर्किना फासो

बुर्किना फासो पिछले एक दशक से इस्लामी चरमपंथी हिंसा और आतंकवादी हमलों की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। देश के उत्तरी और पूर्वी इलाकों में सक्रिय उग्रवादी समूहों ने हजारों लोगों की जान ली है और लाखों नागरिकों को विस्थापित होने पर मजबूर किया है।

इसी सुरक्षा संकट के कारण फ्रांस ने लंबे समय तक क्षेत्र में सैन्य अभियान चलाए थे। हालांकि सैन्य सरकार का मानना है कि इन अभियानों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और विदेशी हस्तक्षेप ने समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया। इसी सोच के आधार पर सरकार ने सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव किए हैं।

रूस और चीन की ओर बढ़ रहा है बुर्किना फासो

फ्रांस से दूरी बढ़ाने के साथ-साथ बुर्किना फासो ने अपनी विदेश नीति में भी बदलाव किया है। हाल के वर्षों में देश ने रूस और चीन के साथ सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है।

रूस के साथ सुरक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में कई पहल की गई हैं। वहीं चीन के साथ बुनियादी ढांचे, निवेश और आर्थिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सरकार का ध्यान केंद्रित है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल बुर्किना फासो तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साहेल क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदलने का संकेत है।

साहेल क्षेत्र में बदल रही है क्षेत्रीय राजनीति

बुर्किना फासो अकेला ऐसा देश नहीं है जिसने पश्चिमी प्रभाव से दूरी बनाई हो। पड़ोसी देश माली और नाइजर भी हाल के वर्षों में सैन्य शासन के अधीन आ चुके हैं और उन्होंने भी फ्रांस के साथ अपने संबंध सीमित किए हैं।

इन तीनों देशों ने जनवरी 2025 में पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्रीय संगठन ECOWAS से अलग होकर एलायंस ऑफ साहेल स्टेट्स (Alliance of Sahel States) नामक नया क्षेत्रीय समूह बनाया। इसका उद्देश्य सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सामूहिक रक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया।

इस गठबंधन को क्षेत्रीय राजनीति में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

लोकतंत्र बहाली का वादा पूरा नहीं हुआ

सैन्य सरकार ने सत्ता संभालने के बाद लोकतांत्रिक चुनाव कराने और नागरिक शासन बहाल करने का वादा किया था। प्रारंभिक योजना के अनुसार 2024 तक लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल की जानी थी।

हालांकि बाद में सरकार इस समयसीमा से पीछे हट गई। इसके बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए और इस वर्ष जनवरी में कई राजनीतिक संगठनों को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया।

इन घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है।

ऐतिहासिक संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं होंगे

दिलचस्प बात यह है कि बुर्किना फासो ने अपने आधिकारिक बयान में यह भी स्पष्ट किया कि राजनयिक संबंध समाप्त करने का निर्णय केवल सरकारी और संस्थागत स्तर तक सीमित है।

सरकार ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच मौजूद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और मानवीय संबंधों को प्रभावित करना नहीं है। फ्रांस और बुर्किना फासो के नागरिकों के बीच दशकों पुराने सामाजिक संबंध आगे भी बने रहेंगे।

इस बयान को दोनों देशों के बीच भविष्य में संवाद की संभावनाओं को खुला रखने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

पहले ही खाली था फ्रांसीसी राजदूत का पद

फ्रांस का बुर्किना फासो में राजदूत पद जनवरी 2023 से ही खाली पड़ा हुआ था। यह स्वयं इस बात का संकेत था कि दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहे थे।

अब औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर पर संवाद और अधिक सीमित हो सकता है। भविष्य में व्यापार, सुरक्षा सहयोग और विकास परियोजनाओं पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है असर

साहेल क्षेत्र पहले से ही आतंकवाद, राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में फ्रांस और बुर्किना फासो के बीच संबंध समाप्त होना क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा सहयोग में कमी आती है तो आतंकवादी संगठनों के खिलाफ संयुक्त अभियान कमजोर पड़ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर सैन्य सरकार का विश्वास है कि नई रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वह अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकेगी।

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