आधुनिक युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा, CDS जनरल राजा सुब्रमणि ने बताया ‘BUILD’ फॉर्मूला

CDS जनरल राजा सुब्रमणि ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए ‘BUILD’ फॉर्मूले की जानकारी दी। जानें इस रणनीति में टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आत्मनिर्भरता

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इसकी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

नई दिल्ली: दुनिया में युद्ध लड़ने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब सैन्य ताकत का आकलन केवल सैनिकों, हथियारों या बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म से नहीं होता, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा, सॉफ्टवेयर, साइबर क्षमता, ऑटोनॉमस सिस्टम और तेजी से उत्पादन करने की क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभा रही है। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने आधुनिक युद्ध में हो रहे इसी बदलाव पर जोर दिया है।

24 सितंबर 2026 को आयोजित एक रक्षा सम्मेलन में बोलते हुए CDS ने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसके साथ भारत के रक्षा ढांचे को भी अपनी तैयारी और क्षमताओं में तेजी से बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में उन्नत तकनीक महत्वपूर्ण होगी, लेकिन केवल तकनीक का होना पर्याप्त नहीं है। असली रणनीतिक लाभ तब मिलेगा, जब इनोवेशन को वास्तविक सैन्य क्षमता और ठोस परिणामों में बदला जा सके।

तकनीक से सैन्य क्षमता तक का सफर

जनरल सुब्रमणि के अनुसार, किसी नई तकनीक का सैन्य महत्व कई चरणों में सामने आता है। सबसे पहले तकनीक को उपयोगी क्षमता में बदलना होगा। इसके बाद उस क्षमता से वास्तविक ऑपरेशनल फायदा मिलना चाहिए और अंत में वह फायदा रणनीतिक प्रभाव में परिवर्तित होना चाहिए। इस दृष्टिकोण का मतलब है कि भविष्य की रक्षा व्यवस्था में केवल अत्याधुनिक उपकरण खरीदना पर्याप्त नहीं होगा। 

सेना को ऐसे सिस्टम विकसित करने होंगे जो वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में तेजी से सूचना जुटा सकें, उसका विश्लेषण कर सकें और निर्णय लेने में मदद कर सकें।

क्या है CDS का ‘BUILD’ फॉर्मूला?

जनरल राजा सुब्रमणि ने आधुनिक युद्ध को समझने के लिए BUILD शब्द का इस्तेमाल किया। यह पांच महत्वपूर्ण बदलावों की ओर संकेत करता है।

  • B यानी Changing Battlefield — पहला बदलाव युद्धक्षेत्र में हो रहा है। आधुनिक संघर्ष अब केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं हैं। साइबरस्पेस, अंतरिक्ष, सूचना और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र भी सैन्य अभियानों का हिस्सा बन रहे हैं।
  • U यानी Changing Economics of War — युद्ध की अर्थव्यवस्था भी बदल रही है। महंगे रक्षा प्लेटफॉर्म के साथ-साथ ऐसे सिस्टम की जरूरत बढ़ रही है जिन्हें कम समय और लागत में बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सके।
  • I यानी Integration of Technology and Data — तकनीक और डेटा का एकीकरण भविष्य के युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण होगा। CDS ने डेटा को रणनीतिक संसाधन बताते हुए इसके सुरक्षित संग्रह, प्रसंस्करण और सही व्यक्ति तक तेजी से पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया है।
  • L यानी Learning — सैन्य संगठनों के लिए लगातार सीखना और तेजी से अनुकूलन करना जरूरी होगा। बदलती तकनीक और युद्ध परिस्थितियों में जो संगठन तेजी से सीखकर अपनी रणनीति बदल सकेगा, उसकी तैयारी अधिक प्रभावी हो सकती है।
  • D यानी Delivery at Scale — अंतिम चरण बड़े पैमाने पर उत्पादन और आपूर्ति की क्षमता है। किसी तकनीक या हथियार का प्रोटोटाइप तैयार करना अलग बात है, जबकि जरूरत पड़ने पर उसे सैकड़ों या हजारों इकाइयों में तेजी से उपलब्ध कराना अलग चुनौती है।

AI, साइबर और डेटा बनेंगे भविष्य के युद्ध का हिस्सा

रक्षा क्षेत्र में AI, साइबर क्षमताओं, स्वायत्त प्रणालियों, सूचना युद्ध और डेटा आधारित निर्णय लेने की भूमिका लगातार बढ़ रही है। रक्षा मंत्रालय की एक आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, भविष्य के युद्ध पर चर्चा में AI, साइबर क्षमता, ऑटोनॉमस सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया है।

जनरल सुब्रमणि ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य के युद्ध में सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम की भूमिका प्लेटफॉर्म के साथ-साथ महत्वपूर्ण होगी। इसका अर्थ है कि आधुनिक सैन्य शक्ति में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का एकीकृत ढांचा तेजी से अहम होता जाएगा।

Leave a comment