गाजियाबाद की वैशाली शाखा में 10 गोल्ड लोन खातों में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर करीब 45 लाख रुपये का लोन लेने का मामला सामने आया है। बैंक ने जांच के बाद पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
गाजियाबाद: फेडरल बैंक की राजनगर शाखा के बाद अब वैशाली शाखा में भी गोल्ड लोन फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। बैंक की आंतरिक जांच में 10 लोन खातों में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर करीब 45 लाख रुपये का लोन जारी किए जाने की जानकारी मिली। बैंक ने पुलिस को शिकायत देकर मामले में केस दर्ज करने की मांग की है।
वैशाली शाखा में 10 खातों से 45 लाख का लोन
फेडरल बैंक की राजनगर शाखा में 1.46 करोड़ रुपये के गोल्ड लोन फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद अब वैशाली शाखा में भी इसी तरह का मामला सामने आया है। बैंक की आंतरिक जांच में पता चला कि वैशाली शाखा के 10 गोल्ड लोन खातों में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखे गए थे।

इन आभूषणों के आधार पर करीब 45 लाख रुपये का गोल्ड लोन जारी किया गया। जांच में फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने के बाद बैंक की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है और मामले में कार्रवाई की मांग की गई है।
वैशाली शाखा के मामले में सामने आए 10 खातों में से तीन खाताधारक ऐसे हैं, जो फेडरल बैंक की आरडीसी शाखा में सामने आए गोल्ड लोन फर्जीवाड़े में भी आरोपित हैं।
आरडीसी मामले की जांच के दौरान सामने आया कनेक्शन
आरडीसी शाखा में गोल्ड लोन फर्जीवाड़े की जांच के दौरान बैंक के सामने यह जानकारी आई थी कि वहां इस्तेमाल किए गए बैंक के वैल्यूअर और लोन के लिए केस लाने वाली फिनटेक कंपनी रूपीन के पूर्व अधिकारियों ने वैशाली शाखा में भी कुछ गोल्ड लोन केस प्रोसेस किए थे।
इसके बाद बैंक ने वैशाली शाखा के मामलों की आंतरिक जांच कराई। जांच के दौरान 10 लोन खातों में रखे गए सोने के आभूषणों की जांच की गई। बैंक के अनुसार, इन खातों में गिरवी रखे गए आभूषण नकली पाए गए।
वैशाली शाखा के प्रबंधक गगन शर्मा के अनुसार, उन्होंने कौशांबी थाने में शिकायत दी थी, लेकिन अभी तक केस दर्ज नहीं हुआ है।
राजनगर शाखा में 1.46 करोड़ का मामला
इससे पहले फेडरल बैंक की राजनगर शाखा में भी गोल्ड लोन से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। बैंक की शिकायत के अनुसार, 20 खातों में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर करीब 1.46 करोड़ रुपये का लोन जारी किया गया था।
इस मामले में 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
आरडीसी शाखा के मामले में बैंक ने फिनटेक कंपनी रूपीन के दो अधिकारियों, वैल्यूअर और ग्राहकों के खिलाफ आरोप लगाए हैं। बैंक की शिकायत में अपने कर्मचारियों को नामजद नहीं किया गया है।
बैंककर्मियों की भूमिका की भी होगी जांच
गोल्ड लोन फर्जीवाड़े में बैंककर्मियों की संभावित भूमिका की जांच भी की जाएगी। रूपीन कंपनी के अधिकारियों की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि यदि बैंक स्तर पर किसी तरह की मिलीभगत नहीं थी, तो कई महीनों तक इस तरह के लोन फर्जीवाड़े कैसे चलते रहे।
अब पुलिस जांच में यह देखा जाएगा कि नकली सोने की पहचान और लोन स्वीकृति की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच का हिस्सा होगा कि वैल्यूएशन, दस्तावेजों की जांच और लोन जारी करने के दौरान बैंक की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
वैशाली शाखा के 45 लाख रुपये के मामले में पुलिस की जांच और केस दर्ज होने के बाद ही फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।











