सितंबर 2025 में अमेरिका दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर को 670 किलोमीटर सड़क यात्रा करनी पड़ी। अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय हवाई सेवाएं ठप होने के कारण यह असामान्य फैसला लिया गया।
New Delhi: सितंबर 2025 में अमेरिका दौरे के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर को एक ऐसा सफर करना पड़ा, जिसने चार महीने बाद जाकर दुनिया का ध्यान खींचा। अमेरिका जैसे विकसित देश में, जहां हवाई यात्रा सबसे आसान मानी जाती है, वहां एक वरिष्ठ भारतीय मंत्री को करीब 670 किलोमीटर सड़क के रास्ते यात्रा करनी पड़ी। अब अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस पूरे घटनाक्रम की असली वजह स्पष्ट हुई है।
चार महीने बाद सामने आया खुलासा
इस पूरी घटना का खुलासा अमेरिकी विदेश विभाग की राजनयिक सुरक्षा सेवा (Diplomatic Security Service) की रिपोर्ट से हुआ है। यह रिपोर्ट 30 दिसंबर को तैयार की गई थी और 8 जनवरी को सार्वजनिक की गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि सितंबर 2025 में अमेरिका में वाणिज्यिक उड़ानें पूरी तरह ठप हो गई थीं। इसके साथ ही सरकारी कामकाज भी आंशिक रूप से बंद था। ऐसे हालात में अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को 416 मील यानी करीब 670 किलोमीटर सड़क मार्ग से उनके गंतव्य तक पहुंचाने का फैसला लिया।
संयुक्त राष्ट्र बैठक थी मुख्य वजह
डॉ एस जयशंकर की अमेरिका यात्रा का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करना था। यह बैठक भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से काफी अहम मानी जा रही थी।

हालांकि, जिस समय यह बैठक तय थी, उस दौरान अमेरिका में हालात सामान्य नहीं थे। हवाई सेवाएं बंद थीं और कई शहरों में प्रशासनिक गतिविधियां सीमित हो गई थीं। इसके बावजूद बैठक को टालने का विकल्प नहीं चुना गया।
हवाई यात्रा क्यों नहीं हो सकी
रिपोर्ट के अनुसार, उस समय अमेरिका में सरकारी शटडाउन जैसे हालात बने हुए थे। सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक बाधाओं के कारण अधिकांश वाणिज्यिक उड़ानें रद्द कर दी गई थीं।
जब यह स्पष्ट हो गया कि फ्लाइट के जरिए समय पर मैनहट्टन पहुंचना संभव नहीं है, तब अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने सड़क मार्ग से यात्रा कराने का निर्णय लिया। यह निर्णय सुरक्षा, समयबद्धता और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर लिया गया।
कनाडा सीमा से शुरू हुआ सफर
एस जयशंकर की यह सड़क यात्रा अमेरिकी कनाडाई सीमा के पास स्थित लेविस्टन क्वीनस्टन ब्रिज से शुरू हुई। वहीं अमेरिकी सुरक्षा एजेंटों ने उनका स्वागत किया।
इसके बाद मैनहट्टन तक करीब सात घंटे की लगातार ड्राइव की गई। यह सफर न केवल लंबा था, बल्कि सुरक्षा दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण माना गया। पूरे रास्ते उच्च स्तरीय सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी सर्विस की भूमिका
अमेरिकी विदेश विभाग की राजनयिक सुरक्षा सेवा इस पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदार थी। यह एजेंसी अमेरिकी राजनयिकों तथा विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा का काम संभालती है। रिपोर्ट में बताया गया कि इस मिशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी शटडाउन और परिवहन संकट के बावजूद भारत के विदेश मंत्री अपनी निर्धारित संयुक्त राष्ट्र बैठक समय पर कर सकें।











