राहुल गांधी के भाषण से क्यों रहे गायब चरणजीत सिंह चन्नी? सामने आई बड़ी वजह

राहुल गांधी के भाषण के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी फरीदकोट में भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस के धरने में शामिल रहे।

लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के दौरान पंजाब के कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी मौजूद नहीं थे। वह फरीदकोट में फार्मेसी भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस के धरने का नेतृत्व कर रहे थे। इस घटनाक्रम ने पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और रणनीतिक मतभेदों की चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है।

चंडीगढ़: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। जहां पंजाब के अन्य कांग्रेस सांसद संसद में राहुल गांधी का भाषण सुन रहे थे, वहीं चन्नी फरीदकोट में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ पार्टी के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।

राहुल गांधी के भाषण के समय फरीदकोट में थे चन्नी

लोकसभा में राहुल गांधी जब छात्रों से जुड़े मुद्दों और नीट पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे थे, उसी समय चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के फरीदकोट में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। यह धरना बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के बाहर आयोजित किया गया था, जहां फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन किया।

पंजाब कांग्रेस के सात सांसदों में चन्नी अकेले ऐसे सांसद रहे जो राहुल गांधी के संबोधन के दौरान सदन में मौजूद नहीं थे। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस भाषण के लिए कोई आधिकारिक व्हिप जारी नहीं किया गया था। कांग्रेस संसदीय दल के प्रमुख और अमृतसर सांसद गुरजीत सिंह औजला ने केवल व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से सांसदों से दोपहर 12 बजे तक लोकसभा में मौजूद रहने का अनुरोध किया था।

समर्थकों ने बताया पहले से तय था कार्यक्रम

चन्नी के समर्थकों का कहना है कि उनकी गैरमौजूदगी को पार्टी अनुशासन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार फरीदकोट का कार्यक्रम पहले से तय था और यह पंजाब के युवाओं के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा था। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना कांग्रेस की जिम्मेदारी थी।

समर्थकों ने यह भी कहा कि राज्य के मुद्दों पर सड़क पर उतरकर संघर्ष करना भी उतना ही जरूरी है जितना संसद में सरकार को घेरना। उनका मानना है कि पंजाब में युवाओं के रोजगार और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर पार्टी को सक्रिय रहना चाहिए।

राजा वडिंग ने संसद परिसर में किया विरोध प्रदर्शन

दूसरी ओर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने दिल्ली में संसद परिसर के भीतर पार्टी सांसदों गुरजीत सिंह औजला, अमर सिंह और धर्मवीर गांधी के साथ पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर लगातार भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगाए तथा शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की।

एक तरफ चन्नी पंजाब में धरने का नेतृत्व कर रहे थे तो दूसरी ओर राजा वडिंग दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दोनों नेताओं की अलग-अलग राजनीतिक सक्रियता ने पंजाब कांग्रेस की रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

गुटबाजी की चर्चा फिर हुई तेज

फरीदकोट का प्रदर्शन कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों की चर्चा को भी हवा दे गया। यह धरना पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह 'किक्की' ढिल्लों की अगुवाई में आयोजित किया गया था, जिन्हें चरणजीत सिंह चन्नी का करीबी माना जाता है। प्रदर्शन में विधायक राणा गुरजीत सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और पूर्व सांसद मोहम्मद सादिक सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग के करीबी माने जाने वाले कई नेता इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए। जिला कांग्रेस की ओर से 31 जुलाई को अलग प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, जिसे बाद में राज्य नेतृत्व के साथ समन्वय के बाद स्थगित कर दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चन्नी की संसद से गैरमौजूदगी और पंजाब में उनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

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