सितंबर 2026 में चीन और लैटिन अमेरिका के संबंधों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। चीन ने क्यूबा का समर्थन दोहराया, पनामा को ताइवान मुद्दे पर चेतावनी दी और पेरू, निकारागुआ तथा ब्राजील में उसकी आर्थिक और कूटनीतिक सक्रियता चर्चा में रही।
बीजिंग: लैटिन अमेरिका में चीन की आर्थिक और कूटनीतिक सक्रियता सितंबर 2026 में चर्चा के केंद्र में रही। क्यूबा के समर्थन से लेकर पनामा में ताइवान से जुड़े संसदीय समूह, पेरू के रणनीतिक चांके बंदरगाह, निकारागुआ में चीनी खनन कंपनियों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की चीन समर्थित कूटनीतिक पहल तक कई घटनाओं ने क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों को रेखांकित किया।
1. चीन ने क्यूबा को समर्थन देने की बात दोहराई
अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव बढ़ने के बीच चीन ने हवाना के समर्थन में अपनी स्थिति दोहराई। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन क्यूबा की संप्रभुता की रक्षा और बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करने के उसके प्रयासों का समर्थन करेगा। यह बयान दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 66वीं वर्षगांठ के मौके पर आया। चीन ने कहा कि वह क्यूबा को उसकी परिस्थितियों के अनुरूप विकास का रास्ता चुनने और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करने में समर्थन देता रहेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब वॉशिंगटन ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र में भी चीन ने क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव की आलोचना की तथा द्वीप की संप्रभुता और बाहरी हस्तक्षेप के मुद्दे को उठाया।
2. इक्वाडोर में बेल्ट एंड रोड परियोजना से जुड़ा मामला
इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो और क्विटो में चीन के पूर्व राजदूत ने अगस्त के अंत में सुनाई गई पांच साल की सजा से बचने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया।
यह मामला चीन की बेल्ट एंड रोड पहल से जुड़ी एक बांध परियोजना के कथित भ्रष्टाचार मामले से संबंधित है। मामले में करीब 76 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कथित रिश्वत योजना का आरोप है।
इस प्रकरण ने लैटिन अमेरिका में चीन समर्थित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और उनसे जुड़े प्रशासनिक तथा कानूनी सवालों पर ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, आरोपों और दोषसिद्धि से जुड़े अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
3. संयुक्त राष्ट्र के अगले प्रमुख की दौड़ में लैटिन अमेरिका की दो महिलाएं
संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चयन में लैटिन अमेरिका की दो महिला राजनयिक प्रमुख दावेदारों के रूप में सामने आई हैं।
कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिनस्पैन और गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट का नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अनौपचारिक मतदान के कई दौर के बाद प्रमुखता से सामने आया।
सितंबर में तीन दौर के अनौपचारिक मतदान के बाद भी किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में स्पष्ट सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में चीन समेत सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि इनमें से कोई उम्मीदवार महासचिव बनती हैं तो वह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला होंगी।
4. ताइवान को लेकर चीन और पनामा के बीच तनाव
पनामा में सांसदों के एक समूह ने ताइवान के साथ संसदीय आदान-प्रदान समूह स्थापित किया। इस कदम पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने चेतावनी दी कि इस कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बीजिंग का कहना है कि यह कदम चीन-पनामा संबंधों के राजनीतिक आधार के रूप में माने जाने वाले ‘वन-चाइना’ सिद्धांत के विपरीत है।
पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने इस संसदीय पहल से सार्वजनिक रूप से दूरी बनाई थी। इसके बावजूद सांसदों का समूह आगे बढ़ा। चीन ने पनामा से अपने एक-चीन रुख को वास्तविक कदमों के जरिये बनाए रखने का आग्रह किया।
यह विवाद लैटिन अमेरिका में ताइवान को लेकर चीन की कूटनीतिक संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।
5. पेरू में चांके बंदरगाह को लेकर अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा
पेरू में चांके मेगापोर्ट चीन और अमेरिका के बीच क्षेत्रीय आर्थिक प्रतिस्पर्धा का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की पेरू यात्रा के दौरान चीन की बढ़ती आर्थिक मौजूदगी और रणनीतिक बुनियादी ढांचे में उसके निवेश पर चर्चा हुई। इसके जवाब में लीमा स्थित चीनी दूतावास ने चीन के निवेश का बचाव किया।
SCMP के अनुसार, पेरू में चीनी निवेश का कुल स्टॉक लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर बताया गया है। चांके बंदरगाह चीन के क्षेत्रीय व्यापार नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पेरू के खनन क्षेत्र में भी चीन और अमेरिका की कंपनियां सक्रिय हैं। तांबा और अन्य महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
6. निकारागुआ में चीनी कंपनी को मिला बड़ा गोल्ड कंसेशन
निकारागुआ ने एक चीनी स्वामित्व वाली कंपनी को 262 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सोने की खोज और खनन का अधिकार दिया है। यह क्षेत्र वर्षावन में स्थित है और करीब 25 वर्षों के लिए दिया गया कंसेशन ‘जेड’ ब्लॉक के नाम से जाना जाता है।
इस मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि संबंधित कंपनी के अधिकारियों और अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित एक अन्य चीनी खनन कंपनी के बीच कारोबारी संबंध बताए गए हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अप्रैल में Nicaragua Xinxin Linze Mineria Group पर प्रतिबंध लगाए थे। वॉशिंगटन का आरोप था कि कंपनी ने निकारागुआ सरकार से बड़े पैमाने पर खनन अधिकार हासिल किए और 2025 की पहली छमाही में 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य का सोना अमेरिका भेजा।
निकारागुआ ने 2021 में ताइवान से संबंध समाप्त कर चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और 2024 में चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू किया।
7. लूला ने संयुक्त राष्ट्र में चीन की शांति पहल का समर्थन किया
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए चीन के साथ शुरू की गई शांति पहल के समर्थन को दोहराया।
लूला ने अमेरिका की व्यापार नीतियों, सैन्य दबाव और महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने ब्राजील की संप्रभुता पर जोर देते हुए कहा कि उनका देश किसी अन्य शक्ति का पिछवाड़ा नहीं है।
लैटिन अमेरिका में चीन के साथ ब्राजील के आर्थिक और कूटनीतिक संबंध पहले से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, ब्राजील और चीन के बीच संबंध केवल राजनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं; व्यापार, कृषि, खनिज और औद्योगिक निवेश भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
चीन की बढ़ती मौजूदगी और अमेरिकी प्रतिक्रिया
सितंबर के इन घटनाक्रमों को एक साथ देखने पर लैटिन अमेरिका में चीन की मौजूदगी के कई आयाम सामने आते हैं। क्यूबा में राजनीतिक समर्थन, निकारागुआ में खनन, पेरू में बुनियादी ढांचा और खनिज निवेश तथा ब्राजील के साथ रणनीतिक संबंध चीन के क्षेत्रीय प्रभाव के अलग-अलग हिस्से हैं।
दूसरी ओर, अमेरिका भी इस क्षेत्र में अपनी आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। महत्वपूर्ण खनिज, बंदरगाह, व्यापार मार्ग, ऊर्जा और सुरक्षा अब अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के प्रमुख विषय बन चुके हैं।
हाल के महीनों में वॉशिंगटन ने लैटिन अमेरिका में चीन के आर्थिक प्रभाव को लेकर अधिक सक्रिय रुख अपनाया है। वहीं बीजिंग ने कई मौकों पर संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और विकासशील देशों के साथ सहयोग को अपनी कूटनीतिक भाषा का आधार बनाया है।
लैटिन अमेरिका में बदलते भू-राजनीतिक समीकरण
क्यूबा से पनामा और पेरू से ब्राजील तक सितंबर के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि लैटिन अमेरिका अब केवल क्षेत्रीय राजनीति का केंद्र नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है।
चीन के लिए यह क्षेत्र व्यापार, कृषि, ऊर्जा, खनिज और बुनियादी ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अमेरिका के लिए यह क्षेत्र भौगोलिक निकटता, सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक संसाधनों के कारण अहम है।
आने वाले समय में ताइवान, महत्वपूर्ण खनिज, बंदरगाह, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं चीन-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ लैटिन अमेरिकी देशों की विदेश नीति को भी प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, अलग-अलग देशों के अपने आर्थिक और राजनीतिक हित हैं और वे हर मुद्दे पर किसी एक वैश्विक शक्ति के साथ समान रुख अपनाएं, ऐसा जरूरी नहीं है।











