चंडीगढ़: फेमा उल्लंघन मामले में ईडी का समन, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और बेटे रणिंदर से होगी पूछताछ

चंडीगढ़ में फेमा उल्लंघन मामले में ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह को समन भेजा। आज होगी पूछताछ, जानें पूरा अपडेट।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के उल्लंघन से जुड़े एक मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह को पूछताछ के लिए समन जारी किया है।

चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह को औपचारिक रूप से पूछताछ के लिए समन जारी किया है। यह कदम वित्तीय अनियमितताओं और विदेशी संपत्तियों से जुड़े आरोपों की जांच के तहत उठाया गया है, जो एक दशक से अधिक पुराने लेन-देन से संबंधित हैं।

ईडी अधिकारियों के अनुसार, कैप्टन अमरिंदर सिंह को गुरुवार को जालंधर स्थित एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है, जबकि उनके बेटे रणिंदर सिंह को अगले दिन उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जांच से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया है कि हाल ही में अमरिंदर सिंह के मोहाली के एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के कारण उनकी पेशी की तारीख में बदलाव किया जा सकता है।

मामला क्या है?

यह जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के कथित उल्लंघन से जुड़ी है। ईडी का संदेह है कि अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह कुछ विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी रहे हैं, जिनमें स्विट्जरलैंड के एक बैंक खाते से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी शामिल हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन संपत्तियों और लेन-देन की जानकारी भारतीय कानूनों के तहत उचित रूप से घोषित की गई थी या नहीं।

यह कार्रवाई सितंबर 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले से जुड़ी हुई है। उस समय अदालत ने अमरिंदर सिंह और उनके बेटे द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आयकर विभाग की आरोप पत्र संबंधी फाइलों के निरीक्षण पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत के इस निर्णय के बाद जांच एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी रास्ता साफ मिला था।

फ्रांस सरकार से मिली जानकारी से शुरू हुई जांच

मामले की जड़ें 2011 तक जाती हैं, जब फ्रांस सरकार ने भारत के साथ कुछ वित्तीय सूचनाएं साझा की थीं। इन सूचनाओं में विदेशी कंपनियों के माध्यम से स्विस बैंक खातों और दुबई में संपत्तियों से जुड़े लेन-देन का उल्लेख था। इन खुलासों के आधार पर भारतीय आयकर विभाग ने प्रारंभिक जांच शुरू की थी।इसके बाद 2016 में आयकर विभाग ने लुधियाना की एक अदालत में औपचारिक अभियोजन शिकायत दर्ज की थी। 

इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ विदेशी संपत्तियों से जुड़े लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी नहीं थे और इनका खुलासा नियमानुसार नहीं किया गया था। अब ईडी ने इसी आधार पर फेमा के तहत अपनी अलग जांच तेज कर दी है।

कानूनी और राजनीतिक असर

यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। ऐसे में ईडी का समन राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। उनके समर्थकों का कहना है कि सभी लेन-देन कानून के दायरे में थे, जबकि आलोचक जांच को जरूरी बताते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि फेमा से जुड़े मामलों में ईडी की जांच काफी तकनीकी होती है और इसमें अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग रिकॉर्ड, विदेशों में संपत्ति की प्रकृति और धन के स्रोत की गहन पड़ताल की जाती है। यदि जांच में उल्लंघन साबित होता है तो भारी जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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