भारत बंद 2026 में ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों की हड़ताल शुरू हो गई है। लगभग 30 करोड़ वर्कर इसमें हिस्सा ले रहे हैं। बैंक, परिवहन और सरकारी कामकाज प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन जरूरी सेवाएं सामान्य रहेंगी।
Bharat Bandh: देशभर के ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आज राष्ट्रव्यापी भारत बंद बुलाया है। इस हड़ताल में लगभग 30 करोड़ मजदूर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे बैंक, परिवहन और कुछ सरकारी कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि, आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी और नागरिकों के लिए जरूरी कामकाज प्रभावित नहीं होंगे।
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का आह्वान
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार हड़ताल में भागीदारी का स्तर पहले से ज्यादा होगा। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी को होने वाली इस हड़ताल में कम से कम 30 करोड़ वर्कर शामिल होंगे। पिछले साल 9 जुलाई, 2025 को हुए विरोध प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ वर्कर ने हिस्सा लिया था।
कौर ने यह भी बताया कि यह हड़ताल 600 से अधिक जिलों में कार्यों को प्रभावित करेगी, जबकि पिछले साल लगभग 550 जिलों में आंदोलन हुआ था। उन्होंने कहा कि यह विरोध केंद्र की 'श्रमिक-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों' के खिलाफ है।
संयुक्त मंच ने बताया कि किसान समूह, कृषि मजदूर यूनियन, छात्र, युवा संगठन और अन्य फेडरेशन भी इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में भी हड़ताल का असर देखने को मिलेगा। ओडिशा और असम में पूरी तरह से बंद रहने की उम्मीद है और अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होंगे।
कौनसे क्षेत्र प्रभावित
भारत बंद के दौरान कई क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, औद्योगिक क्लस्टर और निजी कार्यालयों में नोटिस जारी किए गए हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जिला और ब्लॉक स्तर पर अभियान चलाए गए हैं।

इस हड़ताल के कारण राज्य परिवहन की बसें और ऑटो सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बाजार, थोक मंडियां और दुकानें बंद रहने की संभावना है। सार्वजनिक बैंकों की सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं, जिससे आम जनता को कुछ समय के लिए असुविधा हो सकती है।
आवश्यक सेवाओं की स्थिति
हालांकि हड़ताल का असर व्यापक रहेगा, लेकिन कुछ आवश्यक सेवाएं पूरी तरह से चालू रहेंगी। अस्पताल, एम्बुलेंस, मेडिकल स्टोर और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तरह संचालित होंगी। एयरपोर्ट और हवाई सेवाएं भी सामान्य रूप से काम करेंगी। निजी दफ्तर और एटीएम सेवाएं भी खुली रहेंगी।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस हड़ताल को पूरा समर्थन दिया है। कृषि मजदूर यूनियनों का फोकस MGNREGA के फिर से शुरू होने पर रहेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में हड़ताल का असर महसूस किया जा सकता है, लेकिन जरूरी कामकाज बाधित नहीं होंगे।
हड़ताल का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत बंद के यह आंदोलन पिछले कई वर्षों से हो रहे विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं। पिछले साल जुलाई 2025 में हुए प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ वर्कर ने हिस्सा लिया था। इस बार भागीदारी बढ़कर 30 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मजदूरों और किसान संगठनों में व्यापक असंतोष है।
AITUC और अन्य ट्रेड यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यह हड़ताल केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि श्रमिकों और किसानों के अधिकारों की रक्षा का प्रयास है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियों ने आम जनता और कृषि मजदूरों के हितों को अनदेखा किया है।
हड़ताल का असर आम जनता पर
भारत बंद के दौरान आम जनता को कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी कामकाज और बैंकिंग सेवाओं में देरी हो सकती है। सार्वजनिक परिवहन सेवा बाधित होने के कारण लोगों को व्यक्तिगत वाहन या alternative transport का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
बाजार और थोक मंडियां बंद रहने के कारण सामान की खरीदारी पर असर पड़ सकता है। हालांकि, जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन सेवाएं बाधित नहीं होंगी, जिससे गंभीर परिस्थितियों में मदद उपलब्ध रहेगी।










