झारखंड के चतरा में पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। दो थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर 23 लाख रुपये की अफीम, डोडा और पोस्ता दाना जब्त किया गया। एक युवक गिरफ्तार हुआ और नेटवर्क की जांच जारी है।
चतरा: झारखंड के चतरा जिले में नशा कारोबार के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस संयुक्त अभियान में पुलिस ने करीब 23 लाख रुपये मूल्य के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए हैं, जिनमें अफीम, डोडा और पोस्ता दाना शामिल हैं। यह कार्रवाई दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक साथ की गई, जिससे नशा तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
पुलिस ने इस अभियान के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि कई संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
गुप्त सूचना के आधार पर शुरू हुई कार्रवाई
पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली थी कि लावालौंग थाना क्षेत्र के जोरदाग गांव में कुछ लोग अपने घरों में भारी मात्रा में अफीम और डोडा का भंडारण कर रहे हैं। इन मादक पदार्थों को आगे सप्लाई करने की योजना बनाई जा रही थी।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए सिमरिया के उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने रणनीति बनाकर एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिससे तस्करों को संभलने का मौका नहीं मिला।
लावालौंग क्षेत्र में 18 लाख रुपये की बरामदगी
लावालौंग थाना क्षेत्र के जोरदाग गांव में की गई छापेमारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सफलता साबित हुई। यहां अलग-अलग घरों से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए।
पुलिस ने सकिंद्र यादव के घर से लगभग 1.570 किलोग्राम सूखी अफीम जब्त की। इसके अलावा धनेशर यादव के घर से दो बोरा डोडा बरामद किया गया। वहीं रामबली यादव के घर से सात बोरा डोडा और एक बोरा पोस्ता दाना भी जब्त किया गया।
इस कार्रवाई में कुल 69.87 किलोग्राम डोडा और 25.850 किलोग्राम पोस्ता दाना बरामद हुआ। इसके साथ ही मौके से 30 हजार रुपये नकद और दो आधार कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस पूरी बरामदगी की कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है।
पुलिस ने इस मामले में लावालौंग थाना कांड संख्या 34/26 दर्ज कर लिया है और एनडीपीएस एक्ट के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कुन्दा क्षेत्र में दूसरी बड़ी कार्रवाई, युवक गिरफ्तार
इसी अभियान के तहत चतरा जिले के कुन्दा थाना क्षेत्र के मरगड़ा गांव में भी पुलिस ने एक अलग छापेमारी की। इस कार्रवाई का नेतृत्व कुन्दा अंचलाधिकारी ने किया, जिसमें पुलिस टीम ने एक घर पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान पुलिस को 1 किलो 12 ग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। इस अफीम की बाजार में कीमत लगभग 5 लाख रुपये आंकी गई है।
मौके से 19 वर्षीय युवक उमेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। प्राथमिक पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में कुन्दा थाना कांड संख्या 34/2026 दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।

संगठित नेटवर्क की आशंका
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिले हैं कि यह मामला केवल व्यक्तिगत तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। गांवों में बड़ी मात्रा में अफीम और डोडा का भंडारण इस बात की ओर इशारा करता है कि यह सामग्री आगे बड़े बाजारों तक पहुंचाई जानी थी।
बरामद आधार कार्ड और नकदी भी इस बात को मजबूत करते हैं कि यह कारोबार पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुट गई है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई
पुलिस ने सभी मामलों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। इस कानून के तहत दोषियों को कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी स्तर पर क्यों न जुड़ा हो। गांवों से लेकर बड़े नेटवर्क तक, हर स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रशासन का सख्त संदेश
सिमरिया एसडीपीओ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चतरा जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और नशे के कारोबार में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का उद्देश्य सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करना है ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके।
स्थानीय स्तर पर बढ़ती चिंता
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर नशा तस्करी को लेकर चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में अफीम और डोडा जैसे मादक पदार्थों की अवैध खेती और भंडारण लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्थानीय स्तर पर जागरूकता और सख्त निगरानी नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल रहेगा।










