CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान: न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24x7 काम करना होगा

=सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24x7 काम करना चाहिए। उन्होंने न्याय व्यवस्था में= टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर दिया। मरीज का दर्द कम हो

सूर्यकांत ने कहा कि आम लोगों को त्वरित न्याय देने के लिए न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24x7 काम करना चाहिए। उन्होंने मामलों के तेजी से निपटारे के लिए टेक्नोलॉजी और AI आधारित न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया।

जबलपुर: भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने न्यायपालिका में व्यापक सुधार और तकनीकी बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि अदालतों को अस्पतालों की तरह चौबीसों घंटे काम करने वाली व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। उनका कहना है कि आम नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने के लिए न्यायिक प्रणाली को अधिक तेज, सुलभ और तकनीक-आधारित बनाना अब समय की मांग है।

उन्होंने यह बयान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जिसका विषय था — “फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन।” इस कार्यक्रम में उन्होंने हाई कोर्ट के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्घाटन भी किया।

“आम आदमी की पीड़ा समझनी होगी”

अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह आम नागरिकों की वास्तविक जरूरतों और समस्याओं का समाधान भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों की तरह न्यायपालिका को भी ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां लोगों को तत्काल राहत मिल सके। उनके अनुसार, आम आदमी अक्सर वर्षों तक अदालतों में न्याय का इंतजार करता है, जिससे आर्थिक, मानसिक और सामाजिक दबाव बढ़ता है।

CJI ने कहा कि अगर न्याय में देरी होती है, तो उसका असर सीधे नागरिकों के मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विश्वास पर पड़ता है। इसलिए न्यायिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना जरूरी है।

टेक्नोलॉजी और AI को बताया भविष्य

मुख्य न्यायाधीश ने अपने भाषण में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक न्यायिक प्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

उनके मुताबिक, भारतीय न्यायपालिका केवल पुरानी तकनीकी व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह नए AI आधारित मॉडल और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके न्याय प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी केवल सुविधा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका के समय और संसाधनों की बर्बादी रोकने का सबसे प्रभावी तरीका भी है।

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि भविष्य की न्यायिक प्रणाली डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन सुनवाई और AI आधारित विश्लेषण पर अधिक निर्भर होगी।

कोविड-19 काल का किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान CJI सूर्यकांत ने कोविड-19 महामारी के कठिन दौर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय पूरी दुनिया में कई संस्थाएं ठप हो गई थीं, लेकिन भारतीय न्यायपालिका ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाना जारी रखा।

उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान अदालतों ने पूरी तरह बंद होने के बजाय वर्चुअल सुनवाई और डिजिटल तकनीक का सहारा लिया। इसी वजह से जरूरी मामलों की सुनवाई जारी रह सकी।

CJI ने कहा कि उस कठिन समय में भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक स्तर पर सराहना हुई थी क्योंकि अदालतों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी न्याय प्रक्रिया को जारी रखा।

उनके अनुसार, कोविड-19 ने यह साबित कर दिया कि तकनीक का सही उपयोग न्यायिक व्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बना सकता है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के डिजिटल मॉडल की तारीफ

कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकी पहलें न्यायिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस मॉडल को देशभर की अदालतों में लागू किया जाना चाहिए, ताकि सभी राज्यों में न्यायिक प्रक्रियाओं को एक समान डिजिटल ढांचे से जोड़ा जा सके।

इस अवसर पर केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री Arjun Ram Meghwal भी मौजूद थे। उन्होंने भी डिजिटल न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

CJI ने कहा कि एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से केस मैनेजमेंट, दस्तावेजों की उपलब्धता, सुनवाई की गति और पारदर्शिता में सुधार होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने बनाई विशेष समिति

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी जानकारी दी कि Supreme Court of India ने एक विशेष समिति का गठन किया है, जो यह अध्ययन कर रही है कि न्यायिक प्रक्रियाओं में AI का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।

यह समिति विशेष रूप से लंबित मामलों के तेजी से निपटारे, दस्तावेजों के विश्लेषण और केस मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने के विकल्पों पर काम कर रही है।

भारत में अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में AI आधारित तकनीक को न्यायिक सुधार के एक महत्वपूर्ण समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से केस वर्गीकरण, कानूनी रिसर्च और प्रारंभिक विश्लेषण जैसी प्रक्रियाएं तेज हो सकती हैं, जिससे न्यायाधीशों पर काम का दबाव कम होगा।

भारत की न्याय व्यवस्था के सामने चुनौतियां

भारत की न्यायिक प्रणाली लंबे समय से लंबित मामलों और धीमी सुनवाई की समस्या से जूझ रही है। देशभर की अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं, जिनमें से कई मामलों का फैसला आने में वर्षों लग जाते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायिक ढांचे पर बढ़ते दबाव, न्यायाधीशों की कमी और पारंपरिक प्रक्रियाओं के कारण न्याय में देरी होती है।

इसी वजह से डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल हियरिंग जैसी व्यवस्थाओं को भविष्य के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

CJI सूर्यकांत का बयान भी इसी दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में भारतीय न्यायपालिका तकनीक आधारित मॉडल की ओर तेजी से बढ़ सकती है।

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रहा डिजिटल न्याय का चलन

दुनिया के कई देशों में डिजिटल कोर्ट और AI आधारित न्यायिक प्रक्रियाओं पर तेजी से काम हो रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर और एस्टोनिया जैसे देशों ने न्यायिक प्रक्रियाओं में डिजिटल तकनीक को व्यापक रूप से अपनाया है।

भारत भी अब इसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक का उपयोग सही तरीके से किया जाए, तो इससे आम नागरिकों को सस्ता, तेज और पारदर्शी न्याय मिल सकता है।

हालांकि, इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और AI के नैतिक उपयोग जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।

न्यायपालिका के भविष्य की ओर बड़ा संकेत

CJI सूर्यकांत का यह बयान केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि भारतीय न्यायपालिका के भविष्य की दिशा का संकेत माना जा रहा है। उनका जोर इस बात पर है कि अदालतों को अधिक मानवीय, तकनीकी रूप से सक्षम और जनता की जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा।

यदि न्यायपालिका अस्पतालों की तरह लगातार काम करने वाली व्यवस्था की ओर बढ़ती है, तो इससे आम नागरिकों को त्वरित राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

तकनीक, AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारत की न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की कोशिश आने वाले वर्षों में न्यायिक सुधार का सबसे बड़ा एजेंडा बन सकती है।

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