कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: दिलीप गावित ने दिलाया तीसरा गोल्ड, पैरा 100 मीटर में भारत का शानदार प्रदर्शन

CWG में दिलीप महादु गावित ने पैरा 100 मीटर T47 स्पर्धा मे गोल्ड जीता। मोहम्मद बासिल ने सिल्वर और मुरली श्रीशंकर ने लॉन्ग जंप में रजत पदक दिलाकर भारत का मान बढ़ा।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के छठे दिन भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक गोल्ड और दो सिल्वर पदक जीते। दिलीप महादु गावित ने पैरा 100 मीटर T47 स्पर्धा में स्वर्ण जीता, जबकि मोहम्मद बासिल और मुरली श्रीशंकर ने रजत पदक अपने नाम किए।

CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के छठे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की पदक तालिका को और मजबूत किया। पैरा एथलेटिक्स की पुरुष 100 मीटर T47 स्पर्धा में दिलीप महादु गावित ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता का तीसरा गोल्ड दिलाया। इसी स्पर्धा में भारत के मोहम्मद बासिल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि लॉन्ग जंप में मुरली श्रीशंकर ने भी सिल्वर जीतकर भारत की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन उपलब्धियों के साथ भारत ने कुल 15 पदकों का आंकड़ा छू लिया और पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया।

दिलीप गावित ने बनाया गेम्स रिकॉर्ड

पुरुषों की पैरा T47 श्रेणी की 100 मीटर दौड़ में दिलीप महादु गावित ने 10.71 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह प्रदर्शन केवल गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया और इस सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया। भारत के ही मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के केविन सैंटोस 10.85 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। T47 श्रेणी उन पैरा एथलीट्स के लिए होती है जिनके एक या दोनों हाथों में शारीरिक अक्षमता होती है, लेकिन वे ट्रैक प्रतियोगिताओं में उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते हैं।

संघर्ष से सफलता तक दिलीप गावित का सफर

दिलीप महादु गावित की सफलता उनके संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी भी है। महाराष्ट्र के नासिक के निकट स्थित तोरण डोंगरी गांव के किसान परिवार में जन्मे दिलीप बचपन से ही खेतों में माता-पिता का हाथ बंटाते थे। महज पांच से छह वर्ष की उम्र में पेड़ से गिरने के कारण उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगी। समय पर इलाज नहीं मिलने से संक्रमण बढ़ गया और चिकित्सकों को कोहनी के नीचे से उनका हाथ काटना पड़ा। 

इस दुर्घटना के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। गांव की कच्ची सड़कों पर दौड़ का अभ्यास शुरू किया और बाद में प्रशिक्षक वैजनाथ काले के मार्गदर्शन में पेशेवर पैरा एथलेटिक्स में कदम रखा। वर्षों की मेहनत का परिणाम अब कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।

मोहम्मद बासिल ने भी रचा इतिहास

केरल के रहने वाले मोहम्मद बासिल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने लगभग आठ वर्षों तक सामान्य एथलेटिक्स में हिस्सा लिया और वर्ष 2025 तक उन्हें पैरा एथलेटिक्स की जानकारी भी नहीं थी। विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने पैरा स्पोर्ट्स अपनाया और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में प्रशिक्षण प्राप्त किया। 

मई 2026 में आयोजित इंडियन ओपन इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के बाद उनका चयन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हुआ था। अब अपने पहले बड़े बहु-खेल आयोजन में उन्होंने भारत के लिए रजत पदक जीतकर भविष्य की मजबूत संभावनाओं का संकेत दिया है।

मुरली श्रीशंकर ने लगातार दूसरा सिल्वर जीता

भारतीय लॉन्ग जम्पर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक हासिल किया। इसके साथ ही वह लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय लॉन्ग जम्पर बन गए। स्वर्ण पदक जमैका के तजय गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर जीता, जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी 8.08 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मुरली स्वर्ण पदक से केवल छह सेंटीमीटर पीछे रह गए।

चोट के बाद दमदार वापसी

मुरली श्रीशंकर के लिए यह सफलता विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2024 में गंभीर चोट के कारण वह पेरिस ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाए थे। लंबी पुनर्वास प्रक्रिया और कठिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और अपने सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। उनका यह पदक भारतीय एथलेटिक्स में निरंतरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।

बॉक्सिंग में भारत के लिए कई पदक पक्के

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन भी प्रभावशाली रहा। जैस्मिन लैम्बोरिया ने महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में इंग्लैंड की इलिस ग्लिन को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। अरुंधति, साक्षी चौधरी, नरेंद्र बेरवाल, अंकुश पंघल और सचिन ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर अंतिम चार में प्रवेश किया। इससे पहले लवलीना बोरगोहेन, प्रीति पवार, प्रिया घंगस और जादुमणि सिंह भी सेमीफाइनल में पहुंच चुके थे। कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में सेमीफाइनल में पहुंचने वाले सभी खिलाड़ियों का कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित हो जाता है। इस तरह भारत के लिए मुक्केबाजी में कई पदक पहले ही पक्के हो चुके हैं।

शॉटपुट में तूर और समरदीप फाइनल में

भारतीय शॉटपुट खिलाड़ी तजिंदरपाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है। तजिंदरपाल ने दूसरे प्रयास में 20.14 मीटर का थ्रो कर सीधे फाइनल में जगह बनाई, जबकि समरदीप सिंह गिल ने 19.95 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ शीर्ष खिलाड़ियों में स्थान बनाकर फाइनल का टिकट हासिल किया। दोनों खिलाड़ियों से भारत को पदक की उम्मीदें हैं।

वेटलिफ्टिंग में संजना पदक से चूकीं

महिलाओं की 77 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में 19 वर्षीय संजना पदक जीतने से चूक गईं। स्नैच के तीनों प्रयासों में वह 94 किलोग्राम वजन उठाने में सफल नहीं हो सकीं। इस वर्ष एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली संजना से अच्छी उम्मीदें थीं, लेकिन इस बार वह अपनी चुनौती पूरी नहीं कर सकीं।

मेडल टैली में भारत की स्थिति मजबूत

छठे दिन की प्रतियोगिताओं के बाद भारत के खाते में 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य सहित कुल 15 पदक हो गए हैं। इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय दल पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है। ऑस्ट्रेलिया 47 स्वर्ण सहित कुल 103 पदकों के साथ शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। भारतीय दल अब एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और शॉटपुट जैसी स्पर्धाओं में आगामी मुकाबलों से अपनी पदक संख्या और बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का अब तक का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि देश के पारंपरिक खेलों के साथ-साथ पैरा स्पोर्ट्स में भी भारत लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आने वाले दिनों में कई और स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है।

Leave a comment