राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की नए सिरे से होगी जांच, नई SIT ने तैयार किया विस्तृत रोडमैप

Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच को नई दिशा देने के लिए गठित SIT ने विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। मामले की नए सिरे से पड़ताल

सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में तेजी आ गई है। नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बुधवार को अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर जांच की रूपरेखा तैयार की।

Ram Mandir: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब नए चरण में प्रवेश कर गई है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद गठित नई विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले की व्यापक जांच के लिए अपनी कार्ययोजना तैयार कर ली है। अधिकारियों के साथ आयोजित एक वर्चुअल बैठक में जांच की दिशा, प्राथमिकताओं और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

यह मामला देश और दुनिया भर में चर्चा का विषय रहा है, क्योंकि यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की गहन पड़ताल करने की तैयारी में हैं।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद तेज हुई कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट की सहमति के बाद गठित नई एसआईटी ने सबसे पहले अब तक हुई जांच की समीक्षा की। बैठक के दौरान अधिकारियों से विस्तृत फीडबैक लिया गया और पूर्व में जुटाए गए साक्ष्यों का मूल्यांकन किया गया। टीम ने पुलिस जांच से लेकर अब तक की सभी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाइयों की जानकारी एकत्र की।

सूत्रों के अनुसार, जांच दल ने बैंकिंग प्रक्रियाओं, संबंधित बैंक कर्मियों की संभावित भूमिका और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों का भी अध्ययन किया है। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सामने लाया जा सके।

आईजी किरण एस के नेतृत्व में काम कर रही है नई SIT

नई एसआईटी का नेतृत्व लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस कर रहे हैं। टीम को मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों का मानना है कि नई जांच से उन पहलुओं की भी समीक्षा हो सकेगी जिन पर पहले पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था। बैठक में जेल में बंद आठ आरोपितों की स्थिति और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों पर भी चर्चा की गई। 

इसके अलावा उन व्यक्तियों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई जो जांच के दौरान संदेह के दायरे में आए हैं या जिनकी भूमिका की आगे जांच की आवश्यकता हो सकती है।

वित्तीय गतिविधियों और संपत्तियों की होगी जांच

नई एसआईटी केवल मौजूदा साक्ष्यों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संदिग्धों की वित्तीय गतिविधियों और संपत्तियों की भी जांच करेगी। अधिकारियों के अनुसार, आरोपितों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति, बैंक खातों, लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा सकता है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगी कि कथित अनियमितताओं से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ तो नहीं मिला। इसके लिए वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा का गहन परीक्षण किया जाएगा।

मामले की जांच में आधुनिक तकनीकी संसाधनों का भी उपयोग किया जाएगा। एसआईटी डिजिटल साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच करेगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों से दोबारा पूछताछ भी की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जांच को और अधिक पेशेवर तथा वैज्ञानिक बनाने के लिए एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी टीम से जोड़ा जा सकता है। हालांकि, इन विशेषज्ञों की नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।

ट्रस्ट ने बैंकिंग प्रक्रिया में किए बदलाव

इस बीच, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए कुछ प्रशासनिक बदलाव किए हैं। ट्रस्ट ने अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, मंदिर निर्माण से जुड़े वरिष्ठ इंजीनियर जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय को बैंकिंग लेनदेन के लिए अधिकृत किया है।

नई व्यवस्था के तहत बैंकिंग से संबंधित किसी भी भुगतान या वित्तीय प्रक्रिया के लिए तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में से कम से कम दो के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। ट्रस्ट का मानना है कि इस कदम से वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही को और मजबूत किया जा सकेगा।

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