कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ की ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। आर्थिक संघर्षों के बावजूद उन्होंने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया।
CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा वेटलिफ्टर और छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला 53 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने कुल 199 किलोग्राम (88 किलोग्राम स्नैच और 111 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर भारत को एक और महत्वपूर्ण पदक दिलाया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और भारत की पदक तालिका को भी मजबूत किया।
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित इस प्रतियोगिता में ज्ञानेश्वरी ने न केवल रजत पदक जीता, बल्कि स्नैच वर्ग में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश, विशेषकर छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर दौड़ा दी।
रिकॉर्ड प्रदर्शन से जीता रजत पदक
23 वर्षीय ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रतियोगिता की शुरुआत स्नैच इवेंट से की, जहां उन्होंने 88 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने क्रमशः 103, 107 और अंतिम प्रयास में 111 किलोग्राम वजन उठाया। कुल 199 किलोग्राम वजन के साथ उन्होंने सिल्वर मेडल सुनिश्चित किया। गोल्ड मेडल नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडीह ने 206 किलोग्राम (93+113) वजन उठाकर जीता। हालांकि ज्ञानेश्वरी का प्रदर्शन उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में शामिल रहा और उन्होंने भारत के लिए बहुमूल्य पदक हासिल किया।
पहला कॉमनवेल्थ गेम्स, पहला बड़ा पदक
मेडल जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी ने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और उनका लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता का स्तर बेहद ऊंचा था और सभी खिलाड़ी मजबूत थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि गोल्ड जीतना कठिन था, लेकिन सिल्वर मेडल उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। उन्होंने अपने प्रदर्शन का श्रेय अपने परिवार, कोच और सहयोगी स्टाफ को दिया, जिन्होंने हर कठिन समय में उनका साथ दिया।
भाई अस्पताल में, फिर भी निभाया वादा
ज्ञानेश्वरी की यह सफलता इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि प्रतियोगिता के दौरान उनके भाई रितेश यादव एक दुर्घटना में घायल होकर अस्पताल में भर्ती थे। परिवार के सदस्य उनकी देखभाल में व्यस्त थे। प्रतियोगिता से पहले ज्ञानेश्वरी ने अपने भाई से फोन पर बात की थी और उनसे पदक जीतकर लौटने का वादा किया था। उन्होंने अपना वादा निभाते हुए भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता। इस भावनात्मक पहलू ने उनकी जीत को और भी प्रेरणादायक बना दिया।
आर्थिक तंगी के बीच तैयार हुआ चैंपियन
ज्ञानेश्वरी यादव का सफर किसी आधुनिक स्पोर्ट्स अकादमी से नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों वाले एक साधारण परिवार से शुरू हुआ। उनके पिता दीपक यादव पहले बॉडीबिल्डिंग करते थे और बाद में इलेक्ट्रिशियन का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते रहे। परिवार की मासिक आय लगभग 3,000 से 5,000 रुपए के बीच थी। इसी सीमित आय में घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और ज्ञानेश्वरी के प्रशिक्षण, पोषण, खेल सामग्री तथा प्रतियोगिताओं का खर्च उठाना आसान नहीं था। बावजूद इसके परिवार ने कभी उनकी तैयारी में कमी नहीं आने दी।

साइकिल से तय होता था प्रशिक्षण का सफर
ज्ञानेश्वरी का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उनका परिवार गांव से रोजाना लगभग 8 किलोमीटर साइकिल चलाकर राजनांदगांव पहुंचता था। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे घंटों अभ्यास करती थीं और देर रात परिवार के साथ वापस घर लौटती थीं। मां दुर्गा यादव ने सीमित संसाधनों में पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली, जबकि पिता अतिरिक्त काम करके बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहे।
एशियन चैंपियनशिप से कॉमनवेल्थ गेम्स तक
कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले भी ज्ञानेश्वरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित कर चुकी थीं। 2026 एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्नैच में सिल्वर और कुल प्रदर्शन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया था। इन लगातार सफलताओं ने उन्हें भारत की उभरती हुई वेटलिफ्टरों में शामिल कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो वे भविष्य में विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी भारत के लिए पदक जीत सकती हैं।
खेल के साथ निभा रही हैं पुलिस की जिम्मेदारी
ज्ञानेश्वरी यादव केवल एक सफल खिलाड़ी ही नहीं हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस में सहायक उप निरीक्षक (ASI) के पद पर भी कार्यरत हैं। खेल और नौकरी के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अनुशासन, मेहनत और निरंतर अभ्यास से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
देशभर से मिली बधाइयां
ज्ञानेश्वरी की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया है और उनकी उपलब्धि युवाओं को प्रेरित करेगी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी उनकी सफलता को पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित कई नेताओं और खेल जगत की हस्तियों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं।
भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए वेटलिफ्टिंग सबसे सफल खेलों में से एक बनकर उभरा है। ज्ञानेश्वरी का सिल्वर मेडल भारत की पदक तालिका को मजबूत करने के साथ यह भी दिखाता है कि देश की नई पीढ़ी के खिलाड़ी विश्व स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।











