भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए डिकैथलॉन स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है। ग्लास्गो में आयोजित खेलों में तेजस्विन का यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि वह कॉमनवेल्थ गेम्स के डिकैथलॉन इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।
स्पोर्ट्स न्यूज़: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स को एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है। भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डिकैथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में डिकैथलॉन इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।
ग्लास्गो में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में तेजस्विन ने दो दिनों तक चले बेहद चुनौतीपूर्ण मुकाबले में कुल 7,979 अंक अर्जित किए और तीसरा स्थान हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने घुटने की चोट से जूझते हुए यह सफलता हासिल की। प्रतियोगिता शुरू होने से ठीक पहले लगी चोट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंत तक शानदार संघर्ष करते हुए भारत को पदक दिलाया।
डिकैथलॉन में पहली बार भारत का पदक
डिकैथलॉन एथलेटिक्स की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इसमें खिलाड़ियों को दो दिनों के भीतर 10 अलग-अलग ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में हिस्सा लेना होता है। इन सभी प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और कुल अंक के आधार पर विजेता तय होता है। भारत ने वर्षों से इस बहुआयामी स्पर्धा में भाग लिया है, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में कभी भी पदक हासिल नहीं कर पाया था। तेजस्विन शंकर ने इस लंबे इंतजार को समाप्त करते हुए देश के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता।
चोट के बावजूद नहीं छोड़ी उम्मीद
तेजस्विन के लिए यह टूर्नामेंट आसान नहीं था। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतियोगिता शुरू होने से एक दिन पहले ही उन्हें घुटने में चोट लग गई थी। ऐसे में उनके मैदान पर उतरने को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। हालांकि भारतीय एथलीट ने असाधारण साहस और मानसिक मजबूती का परिचय दिया। उन्होंने चोट की परवाह किए बिना प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और शुरुआत में संघर्ष करने के बावजूद धीरे-धीरे वापसी की।
100 मीटर दौड़ में वह अपने हीट में अंतिम स्थान पर रहे, जिससे उनकी चुनौती मुश्किल होती दिखाई दी। लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर प्रतियोगिता में वापसी की और लगातार अंक जुटाते रहे।

लॉन्ग जंप और हाई जंप में दिखाया दम
100 मीटर स्पर्धा के बाद तेजस्विन ने लॉन्ग जंप में 7.82 मीटर की छलांग लगाकर मजबूत वापसी की। यह प्रदर्शन उन्हें पदक की दौड़ में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। शॉट पुट में उन्होंने 13.09 मीटर का प्रयास किया और अंक अर्जित किए। इसके बाद हाई जंप में उनका प्रदर्शन प्रतियोगिता के सबसे प्रभावशाली क्षणों में से एक रहा।
उन्होंने 2.15 मीटर की छलांग लगाई और इस स्पर्धा में दो मीटर का आंकड़ा पार करने वाले एकमात्र खिलाड़ी बने। हाई जंप में मिली सफलता ने उन्हें पदक की दौड़ में मजबूती से वापस ला खड़ा किया।
दूसरे दिन भी जारी रखा शानदार प्रदर्शन
डिकैथलॉन के दूसरे दिन तेजस्विन ने 110 मीटर बाधा दौड़ में 14.41 सेकंड का समय निकाला और अपनी स्थिति को और मजबूत किया। डिस्कस थ्रो में उन्होंने 40.44 मीटर का प्रयास किया, जबकि पोल वॉल्ट में 4.30 मीटर का प्रदर्शन किया। जेवलिन थ्रो में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 53.12 मीटर रहा। इसके बाद अंतिम स्पर्धा 1500 मीटर दौड़ में उन्होंने 4 मिनट 36.19 सेकंड का समय निकाला और कुल अंकों के आधार पर कांस्य पदक सुनिश्चित कर लिया। उनकी निरंतरता और बहुमुखी प्रतिभा ने साबित किया कि वह दुनिया के शीर्ष डिकैथलॉन खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाने की क्षमता रखते हैं।











