अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और कथित चोरी के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पलटवार किया है। उन्होंने विपक्ष पर मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को बाबरी मस्जिद के लिए जुटाए गए चंदे का हिसाब देना चाहिए।
ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक स्टंट बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे को लेकर सवाल उठा रहा है, उसमें पहले उसे अपने पुराने रिकॉर्ड और चंदे से जुड़े मामलों पर जवाब देना चाहिए। उनके बयान के बाद राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
दरअसल, संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और कथित चोरी के मुद्दे को लेकर अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान दान पेटी रखी गई थी और सांसदों ने इसके जरिए अपना विरोध दर्ज कराया। इसी प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर ऐसे मुद्दे उठा रहा है जिससे जनता का ध्यान दूसरे महत्वपूर्ण विषयों से हटाया जा सके। उनके मुताबिक राम मंदिर से जुड़े विषय पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को यह बताना चाहिए कि बाबरी मस्जिद के नाम पर लोगों से लिए गए चंदे का क्या हुआ।
डिप्टी सीएम के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में चढ़ावे और चंदे के हिसाब को लेकर दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
विपक्षी सांसदों ने अपने प्रदर्शन के जरिए धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे की पारदर्शिता का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी राशि के इस्तेमाल और प्रबंधन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
इसके जवाब में ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के पुराने संदर्भ को सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष हिसाब-किताब की बात कर रहा है तो उसे पहले अपने स्तर पर भी जवाब देना चाहिए। उनका इशारा बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे की ओर था।
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान और चढ़ावा देते हैं। मंदिर ट्रस्ट की ओर से दान और बैंकिंग व्यवस्था को लेकर समय-समय पर व्यवस्थाएं निर्धारित की जाती रही हैं।
चढ़ावे को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन ने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
ब्रजेश पाठक ने इसी राजनीतिक विवाद के बीच विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता को गुमराह करने के बजाय अपने पुराने मामलों पर जवाब देना चाहिए। उनके बयान को विपक्ष के प्रदर्शन का सीधा राजनीतिक जवाब माना जा रहा है।
इस पूरे विवाद में अब सवाल यह है कि राम मंदिर के चढ़ावे और कथित चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष आगे क्या कदम उठाता है। वहीं भाजपा की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिए जाने की संभावना है।
अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े मामलों पर राजनीतिक दलों के बीच पहले भी तीखी बयानबाजी होती रही है। मंदिर निर्माण के बाद चढ़ावे, दान, ट्रस्ट की व्यवस्था और श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं को लेकर अलग-अलग समय पर राजनीतिक बहस सामने आती रही है।
फिलहाल ब्रजेश पाठक के बयान ने इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। उन्होंने विपक्ष के राम मंदिर चढ़ावे को लेकर किए गए प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए पहले बाबरी मस्जिद के चंदे का हिसाब देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।
अब इस बयान पर विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी बढ़ने के साथ राम मंदिर के चढ़ावे और पुराने धार्मिक चंदे से जुड़े सवाल राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन सकते हैं