दरभंगा शिक्षा विभाग में ‘धनकुबेर’ का खेल DEO कार्यालय के कर्मी पर गंभीर आरोप जांच के घेरे में भ्रष्टाचार के मामले

दरभंगा के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों से हड़कंप है। DEO कार्यालय के एक कर्मी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, मामले में जांच की मांग तेज हुई है।
दरभंगा शिक्षा विभाग में ‘धनकुबेर’ का खेल DEO कार्यालय के कर्मी पर गंभीर आरोप जांच के घेरे में भ्रष्टाचार के मामले
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दरभंगा: जिले के शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय के एक कर्मी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप सामने आए हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट में कार्यालय के इस कर्मी को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं और उसकी कथित संपत्ति तथा कामकाज को लेकर चर्चा तेज होने की बात कही गई है।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शिक्षा विभाग का जिला कार्यालय सीधे तौर पर सरकारी स्कूलों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विभागीय योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों का केंद्र होता है। ऐसे कार्यालय में किसी कर्मचारी पर यदि आर्थिक अनियमितता या अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने जैसे आरोप लगते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है।

दरभंगा के DEO कार्यालय में सरकारी कामकाज से जुड़े अलग-अलग मामलों के लिए बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी पहुंचते हैं। स्थानांतरण, सेवा संबंधी कार्य, दस्तावेज, विभागीय अनुमति, भुगतान और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए कार्यालय पर निर्भरता रहती है। ऐसे में किसी कर्मचारी के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आना विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

रिपोर्ट में जिस कर्मी को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उसके बारे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह जरूरी है कि संबंधित संपत्ति, आय के स्रोत और सरकारी सेवा के दौरान किए गए वित्तीय लेन-देन की जांच की जाए। हालांकि, किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों को जांच और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष से पहले अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। हाल ही में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने शिक्षा विभाग के उप निदेशक अजय कुमार सिंह से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। रिपोर्ट के अनुसार उन पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप है और पटना से बेगूसराय तक तीन स्थानों पर कार्रवाई की गई।

इससे यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि जिला स्तर के शिक्षा कार्यालयों में कर्मचारियों और अधिकारियों की संपत्ति तथा आय के स्रोतों की निगरानी किस तरह की जाती है। यदि किसी कर्मचारी की संपत्ति उसकी ज्ञात आय से काफी अधिक दिखाई देती है, तो नियमानुसार जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि संपत्ति अर्जित करने के लिए आय के वैध स्रोत क्या थे।

दरभंगा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से संबंधित विभागीय सूचनाएं और विभिन्न प्रशासनिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार DEO कार्यालय शिक्षा विभाग के तहत संचालित होता है और जिले के शिक्षा संबंधी प्रशासनिक कार्यों से जुड़ा है।

दरभंगा में शिक्षा विभाग को लेकर पहले भी गंभीर आरोपों पर कार्रवाई हो चुकी है। नवंबर 2024 में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी और एक DPO को निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। जांच में बेंच-डेस्क, सबमर्सिबल पंप, फैब्रिकेटेड भवन निर्माण, व्हीलचेयर की खरीद और भवन मरम्मत जैसे कामों में कथित अवैध वसूली के आरोपों का उल्लेख किया गया था। TRE-1 और TRE-2 की काउंसलिंग में भी भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की गई थी।

हालांकि, मौजूदा मामले को पुराने मामलों से सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। वर्तमान आरोपों की स्वतंत्र जांच ही यह तय करेगी कि संबंधित कर्मी के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जिस कर्मचारी पर ‘धनकुबेर’ जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी संपत्ति और आय के बीच वास्तविक संबंध क्या है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि सरकारी वेतन या ज्ञात आय के मुकाबले संपत्ति काफी अधिक है, तो आय से अधिक संपत्ति के कोण से भी जांच आगे बढ़ सकती है।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय हो सकता है कि संबंधित कर्मचारी की पोस्टिंग के दौरान उसके पास किस तरह के विभागीय कार्य रहे और क्या उन कार्यों से जुड़े लोगों से किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हुआ। शिकायतों में यदि किसी खास काम के बदले पैसे मांगने या लेने का आरोप है तो संबंधित दस्तावेज, शिकायतकर्ता के बयान और डिजिटल लेन-देन जैसे साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का असर केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव शिक्षक, स्कूल कर्मचारी और कभी-कभी विद्यार्थियों तक पड़ सकता है। यदि किसी प्रशासनिक काम को नियम के मुताबिक पूरा कराने के बजाय अवैध भुगतान की जरूरत महसूस होने लगे, तो इससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

दरभंगा के DEO कार्यालय में काम कराने वाले लोगों के लिए भी यह मामला चिंता का विषय है। सरकारी कार्यालय में किसी भी सेवा या विभागीय प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियम और शुल्क से अलग पैसे की मांग की जाती है तो इसकी शिकायत सक्षम अधिकारियों के पास की जानी चाहिए। इसी तरह किसी कर्मचारी पर लगे आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्य जुटाना जरूरी होता है।

मामले में यदि विभागीय स्तर पर जांच होती है तो जांच एजेंसी संबंधित कर्मचारी की सेवा पुस्तिका, वेतन विवरण, संपत्ति का ब्योरा, बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल कर सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों के बयान भी लिए जा सकते हैं।

इस तरह की जांच का उद्देश्य केवल किसी एक कर्मचारी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह पता लगाना होता है कि सरकारी व्यवस्था में कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो संबंधित व्यक्ति को भी इससे राहत मिलेगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

दरभंगा में शिक्षा विभाग का काम जिले के हजारों शिक्षकों और बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालयों से जुड़ा हुआ है। इसलिए कार्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता की शिकायत सामने आने पर समयबद्ध जांच से न केवल आरोपों की सच्चाई सामने आती है बल्कि विभाग में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश जाता है।

फिलहाल सामने आए आरोपों को लेकर सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग या सक्षम जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल आरोपों तक सीमित है या इसके पीछे वास्तविक वित्तीय अनियमितता भी मौजूद है।

दरभंगा के शिक्षा विभाग से जुड़ा यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि आरोप सीधे DEO कार्यालय की कार्यप्रणाली और एक कर्मचारी की कथित संपत्ति से जुड़े हैं। अब जरूरत इस बात की है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, आय और संपत्ति का मिलान किया जाए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जब तक

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