SSP की बैठक से 12 थानों के पदाधिकारी गायब, सभी से मांगा गया स्पष्टीकरण; बहेड़ी थानाध्यक्ष और IT पदाधिकारी से भी जवाब-तलब

दरभंगा में SSP की समीक्षा बैठक से 12 थानों के पदाधिकारी अनुपस्थित रहे। सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि बहेड़ी थानाध्यक्ष और आईटी पदाधिकारी से भी जवाब-तलब हुआ।
SSP की बैठक से 12 थानों के पदाधिकारी गायब, सभी से मांगा गया स्पष्टीकरण; बहेड़ी थानाध्यक्ष और IT पदाधिकारी से भी जवाब-तलब
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दरभंगा। जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने और लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने के लिए वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी थानों के पीसी प्रभारी सह आईटी प्रभारियों को शामिल होना था, लेकिन 12 थानों के पदाधिकारी अनुपस्थित रहे। इस पर एसएसपी ने संबंधित पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, वर्ष 2026 में दर्ज मामलों की केस डायरी अपडेट नहीं रहने के मामले में बहेड़ी थानाध्यक्ष और संबंधित आईटी पदाधिकारी से भी जवाब-तलब किया गया है। यह कार्रवाई पुलिस के कामकाज में समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

जानकारी के अनुसार, बैठक में बेंता, महिला थाना, मोरो, रैयाम, मनीगाछी, नेहरा, वाजितपुर, अलीनगर, घनश्यामपुर, तिलकेश्वर, जमालपुर और नदी थाना के पदाधिकारी शामिल नहीं हुए। बैठक में सभी संबंधित पदाधिकारियों की मौजूदगी अपेक्षित थी, क्योंकि इसमें न्यायालय से जुड़े लंबित मामलों, पुलिस के डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन कार्यप्रणाली की समीक्षा की जानी थी। इन पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर एसएसपी ने स्पष्टीकरण मांगा है। अब संबंधित अधिकारियों को अपनी गैरहाजिरी का कारण बताना होगा।

बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य न्यायालय से संबंधित लंबित मामलों को समय पर निपटाना था। पुलिस के सामने कई बार समन, वारंट, कुर्की और इश्तिहार जैसी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी होती है। यदि इन प्रक्रियाओं में देरी होती है, तो जांच और न्यायिक कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एसएसपी ने संबंधित अधिकारियों को लंबित मामलों की समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया।

बहेड़ी थानाध्यक्ष और आईटी पदाधिकारी से जवाब-तलब किए जाने का मामला केस डायरी से जुड़ा है। वर्ष 2026 में दर्ज मामलों की केस डायरी को अद्यतन नहीं पाए जाने पर दोनों से स्पष्टीकरण मांगा गया। केस डायरी किसी भी आपराधिक मामले की जांच का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। इसमें जांच की प्रगति, साक्ष्य जुटाने से संबंधित कार्रवाई और मामले में किए गए अन्य जरूरी कदमों का विवरण दर्ज रहता है। इसका समय पर अद्यतन रहना जरूरी है, ताकि वरिष्ठ अधिकारी जांच की स्थिति का आकलन कर सकें और न्यायालय में आवश्यक कार्रवाई समय पर की जा सके।

समीक्षा बैठक में ई-समन, जमानतीय और गैर-जमानतीय वारंट, समन, कुर्की तथा इश्तिहार से संबंधित प्रक्रियाओं के समय पर अनुपालन पर भी जोर दिया गया। पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि न्यायालय से प्राप्त आदेशों और लंबित प्रक्रियाओं को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। जिन मामलों में वारंट या अन्य कानूनी कार्रवाई बाकी है, उनमें नियमानुसार जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही प्राथमिकी और गिरफ्तारी मेमो को निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया। बैठक में सभी दर्ज प्राथमिकी और गिरफ्तारी मेमो को 24 घंटे के भीतर एससीआरबी पोर्टल पर अपलोड करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। डिजिटल रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध रहने से मामलों की निगरानी, सूचना का आदान-प्रदान और वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा अधिक प्रभावी हो सकती है।

एसएसपी ने पुलिस थानों में सीसीटीएनएस यानी क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम के नियमित इस्तेमाल पर भी जोर दिया। इस प्रणाली में प्राथमिकी, स्टेशन डायरी और अन्य जरूरी पुलिस दस्तावेजों की प्रविष्टि समय पर होनी चाहिए। रिकॉर्ड अपडेट नहीं रहने से मामले की प्रगति की निगरानी में परेशानी हो सकती है। इसलिए थानों को निर्देश दिया गया कि डिजिटल प्रणाली में जरूरी जानकारियां वास्तविक समय के अनुसार दर्ज की जाएं।

बैठक में ई-साक्ष्य ऐप के उपयोग को लेकर भी निर्देश दिए गए। मामलों से संबंधित महत्वपूर्ण वीडियो, तस्वीरें और अन्य डिजिटल साक्ष्य निर्धारित नियमों के अनुसार अपलोड किए जाने हैं। पुराने मामलों की केस डायरी को भी वर्षवार सीसीटीएनएस में अपलोड करने पर जोर दिया गया। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य पुलिस रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना और जरूरत पड़ने पर जांच से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।

न्यायालय में लंबित समन, वारंट, कुर्की और इश्तिहार के अलावा किशोर न्याय बोर्ड में लंबित एसबीआर तथा आरोपपत्र से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों को लंबित एसबीआर और आरोपपत्र जल्द न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र समय पर दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसमें देरी होने पर मामलों के निपटारे पर असर पड़ सकता है।

बैठक में जीरो एफआईआर और गुमशुदा व्यक्तियों से संबंधित मामलों की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया गया। जीरो एफआईआर को आवश्यक प्रक्रिया के तहत संबंधित राज्य या थाने तक भेजना, आरोपपत्र और अंतिम प्रपत्र को सीसीटीएनएस में दर्ज करना तथा गुमशुदगी से जुड़े मामलों में तय नियमों का पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी है। अधिकारियों को सीआरआईएमएसी और आईसीजेएस पोर्टल पर नियमित रूप से लॉगिन कर आवश्यक जानकारी की जांच करने को भी कहा गया।

इस पूरी समीक्षा का मकसद केवल अनुपस्थित अधिकारियों से जवाब मांगना नहीं, बल्कि पुलिस की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाना भी है। लंबित मामलों की निगरानी, केस डायरी का अद्यतन, न्यायालय के आदेशों का पालन और डिजिटल रिकॉर्ड की नियमित प्रविष्टि पुलिस प्रशासन के महत्वपूर्ण काम हैं। इन कार्यों में देरी होने पर जांच की प्रगति और न्यायालय से संबंधित प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

अब बैठक से अनुपस्थित रहे 12 थानों के पदाधिकारियों को अपनी गैरहाजिरी का कारण स्पष्ट करना होगा। वहीं, बहेड़ी थानाध्यक्ष और आईटी पदाधिकारी को केस डायरी अपडेट नहीं रहने के संबंध में जवाब देना है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई क्या होगी, यह संबंधित तथ्यों और प्रशासनिक समीक्षा पर निर्भर करेगा। फिलहाल एसएसपी के निर्देशों से स्पष्ट है कि दरभंगा पुलिस प्रशासन लंबित मामलों के निपटारे, डिजिटल रिकॉर्ड के रखरखाव और न्यायालय से जुड़ी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दे रहा है।

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