दरभंगा में सांप के डसने से महिला की मौत: झाड़-फूंक में गंवाया समय, अस्पताल ले जाते रास्ते में तोड़ा दम

दरभंगा के कासिमपुर में 45 वर्षीय महिला को सांप ने डस लिया। परिजन झाड़-फूंक में समय गंवाते रहे। अस्पताल ले जाते समय महिला ने दम तोड़ दिया।
दरभंगा में सांप के डसने से महिला की मौत: झाड़-फूंक में गंवाया समय, अस्पताल ले जाते रास्ते में तोड़ा दम
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दरभंगा जिले के तिलकेश्वर थाना क्षेत्र के कासिमपुर गांव में सर्पदंश की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। शनिवार देर रात सो रही 45 वर्षीय महिला को सांप ने पैर में डस लिया। सर्पदंश के बाद परिजनों ने तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया। जब महिला की हालत बिगड़ने लगी तो उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है और गांव में भी शोक का माहौल है।

मृतका की पहचान कासिमपुर गांव के वार्ड संख्या 11 निवासी नुजा यादव की पत्नी पूनम देवी के रूप में बताई गई है। जानकारी के मुताबिक शनिवार की रात करीब 12 से 1 बजे के बीच महिला घर में सो रही थी। इसी दौरान सांप ने उसके पैर में डस लिया। सर्पदंश का पता चलने के बाद परिवार के लोग उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लग गए। कुछ समय इसी प्रक्रिया में बीत गया और महिला की हालत लगातार खराब होती चली गई।

सर्पदंश के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जहरीले सांप के काटने पर शरीर में विष फैलने की गति सांप की प्रजाति, काटने की जगह और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है, जहां डॉक्टर उसकी स्थिति के अनुसार उपचार और जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध करा सकते हैं। इस घटना में अस्पताल पहुंचने में हुई देरी को परिवार के लिए बेहद दुखद परिणाम से जोड़कर देखा जा रहा है।

बताया गया है कि महिला को सांप के डसने के बाद परिजन पहले झाड़-फूंक कराने लगे। ग्रामीण इलाकों में आज भी सर्पदंश की घटनाओं के दौरान कई परिवार पारंपरिक उपचार या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। ऐसी स्थिति में अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी कई बार मरीज की हालत को गंभीर बना सकती है। बिहार में हाल के दिनों में भी सर्पदंश के कई मामलों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल जाने की अपील की है।

दरभंगा में सामने आई यह घटना ऐसे समय हुई है जब बारिश और मानसून के दौरान ग्रामीण इलाकों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। पानी जमा होने, खेतों में नमी बढ़ने और सांपों के सुरक्षित ठिकानों से बाहर निकलने के कारण लोगों का इनसे सामना होने का खतरा बढ़ सकता है। घरों, खेतों, झाड़ियों और लकड़ी या सामान रखने वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

इस घटना में महिला को सांप ने उस समय डसा जब वह सो रही थी। रात के समय सांप दिखाई नहीं देने के कारण कई बार लोग यह भी नहीं समझ पाते कि उन्हें किस प्रकार के सांप ने काटा है। ऐसे मामलों में सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश करने के बजाय मरीज की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। अगर सांप की पहचान सुरक्षित दूरी से हो जाए तो इसकी जानकारी डॉक्टरों को दी जा सकती है, लेकिन सांप को पकड़ने के प्रयास में दूसरा हादसा होने का खतरा रहता है।

सर्पदंश के बाद पीड़ित को शांत रखना भी जरूरी होता है। घबराहट और अधिक शारीरिक गतिविधि से शरीर में विष के फैलने की गति प्रभावित हो सकती है। इसलिए मरीज को कम से कम हिलाने-डुलाने की कोशिश करनी चाहिए और जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू नुस्खे को चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

बिहार में हाल के दिनों में सर्पदंश से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। भभुआ में भी सर्पदंश की कई घटनाओं के बाद एक युवती की मौत हुई थी और पांच अन्य लोगों का इलाज चल रहा था। उस मामले में भी परिजनों द्वारा पहले झाड़-फूंक कराने की जानकारी सामने आई थी। डॉक्टरों ने लोगों से स्पष्ट रूप से अपील की थी कि सर्पदंश के बाद समय बर्बाद किए बिना पीड़ित को नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं।

दरभंगा में भी कुछ दिन पहले एक महिला को गेहुंअन सांप ने डस लिया था। परिजन समय रहते उसे जाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार बताया गया। यह मामला भी इस बात को रेखांकित करता है कि सर्पदंश के बाद जल्द चिकित्सा सहायता मिलने से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

कासिमपुर की घटना में परिवार ने महिला को बाद में अस्पताल ले जाने का फैसला किया, लेकिन तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। महिला की मौत से घर में अचानक मातम छा गया और आसपास के लोग भी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।

सर्पदंश को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। खासकर बारिश के मौसम में लोगों को घर और आसपास साफ-सफाई रखने, रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करने और फर्श पर सोने से बचने जैसी सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए। घर के आसपास झाड़ियां और अनावश्यक सामान जमा नहीं होने देना भी उपयोगी हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि सांप के काटने के बाद लक्षणों का इंतजार नहीं करना चाहिए। पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। कई जहरीले सांपों के काटने पर शुरुआती समय में लक्षण हल्के दिखाई दे सकते हैं, लेकिन बाद में स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए मरीज की हालत सामान्य दिखाई देने पर भी चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

कासिमपुर में हुई इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश को लेकर जागरूकता की जरूरत सामने ला दी है। एक ओर मानसून के दौरान सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ती हैं, वहीं दूसरी ओर समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से जोखिम और बढ़ जाता है। परिवारों को यह समझना जरूरी है कि सर्पदंश की स्थिति में सबसे पहले अस्पताल पहुंचना चाहिए। झाड़-फूंक में बीता समय कई बार वापस नहीं आता।

पूनम देवी की मौत परिवार के लिए गहरा सदमा है। एक सामान्य रात अचानक हुई इस घटना ने पूरे परिवार को दुख में डाल दिया। अगर सर्पदंश के बाद तत्काल चिकित्सकीय सहायता ली जाए तो कई मामलों में गंभीर स्थिति से बचने की संभावना रहती है। इसलिए दरभंगा की यह घटना लोगों के लिए भी एक जरूरी संदेश है कि सांप के काटने पर किसी तरह की देरी किए बिना मरीज को अस्पताल पहुंचाएं।

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