किडनी डायलिसिस हर मरीज के लिए अलग अवधि के लिए जरूरी होता है। एक्यूट किडनी डिजीज में यह अस्थायी हो सकता है, जबकि क्रोनिक किडनी फेल्योर में जीवनभर जारी रह सकता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि खानपान, लाइफस्टाइल और समय पर नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श से किडनी स्वास्थ्य में सुधार संभव है और डायलिसिस की जरूरत कम हो सकती है।
Kidney Dialysis: यह प्रक्रिया तब जरूरी होती है जब किडनी अपना काम ठीक से नहीं कर पाती। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के HOD डॉ. हिमांशु वर्मा के अनुसार, एक्यूट किडनी डिजीज वाले मरीजों में डायलिसिस कुछ समय के लिए ही किया जाता है, जबकि एंड स्टेज क्रोनिक किडनी फेल्योर में यह जीवनभर जारी रह सकता है। सही खानपान, पर्याप्त पानी, नियमित एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह पालन करने से किडनी स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।
कब होता है शॉर्ट-टर्म डायलिसिस
एक्यूट किडनी डिजीज में किडनी अचानक प्रभावित होती है। ऐसे मरीजों को कुछ हफ्तों या महीनों के लिए डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है। जैसे ही किडनी धीरे-धीरे ठीक होने लगती है, डॉक्टर डायलिसिस बंद कर सकते हैं।
क्रोनिक किडनी डिजीज में किडनी धीरे-धीरे खराब होती है और एंड स्टेज तक पहुंचती है। इस स्थिति में डायलिसिस लंबे समय तक या जीवनभर चल सकता है। मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के विकल्प की भी सलाह दी जाती है।

किडनी खराब होने के कारण
डॉ. वर्मा बताते हैं कि हाई-सोडियम डाइट, स्मोकिंग, शराब का सेवन और पानी कम पीना किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही, गलत लाइफस्टाइल और अधिक स्ट्रेस भी किडनी की कार्यक्षमता घटाते हैं।
स्वस्थ किडनी के लिए डाइट में कम नमक, पर्याप्त पानी, नियमित एक्सरसाइज और अस्वास्थ्यकर आदतों से बचाव जरूरी है।
किडनी खराब होने के लक्षण
मरीजों को पैर में सूजन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब का रंग बदलना और त्वचा में खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ये संकेत तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श लेने का संकेत हैं।
डायलिसिस की अवधि पूरी तरह मरीज की किडनी की स्थिति पर निर्भर करती है। एक्यूट किडनी डिजीज में डायलिसिस अस्थायी हो सकता है, जबकि एंड स्टेज क्रोनिक किडनी फेल्योर में यह जीवनभर जारी रह सकता है। मरीजों को खानपान, लाइफस्टाइल और डॉक्टर की सलाह पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।













