दिल्ली में करीब 30% आबादी की नजर कमजोर है, जिसमें 50 साल से अधिक उम्र वाले और स्कूल जाने वाले बच्चों में समस्या तेजी से बढ़ रही है। AIIMS की RESAT रिपोर्ट के अनुसार लगभग 60 लाख लोग सही इलाज या चश्मा नहीं ले पा रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल और आई केयर सुविधाओं की कमी प्रमुख कारण हैं।
Delhi Eye Health Report 2026: दिल्ली में नजर कमजोर होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। AIIMS की RESAT रिपोर्ट के अनुसार शहर की लगभग 30% आबादी, यानी करीब 60 लाख लोग रिफ्रैक्टिव एरर और प्रेसबायोपिया जैसी दृष्टि समस्याओं से प्रभावित हैं। यह समस्या खासकर 50 साल से अधिक उम्र वालों और स्कूल जाने वाले बच्चों में अधिक देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती लाइफस्टाइल, मोबाइल और लैपटॉप के अधिक इस्तेमाल के कारण आंखों पर दबाव बढ़ा है, वहीं पर्याप्त आई केयर सुविधाओं का अभाव भी समस्या को बढ़ावा दे रहा है।
कितने लोग प्रभावित हैं और किस उम्र में ज्यादा समस्या
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लगभग 60 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें चश्मे की जरूरत है, लेकिन वे सही इलाज या ऑप्टिकल मदद नहीं ले पा रहे हैं। 50 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में नजर की समस्या अधिक पाई गई है, जबकि स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया तेजी से बढ़ रहा है।
महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को आंखों के इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। इस असमानता के कारण कई महिलाओं की दृष्टि संबंधी समस्याएं समय पर ठीक नहीं हो पातीं।

आंखों के इलाज की मौजूदा सुविधाएं और कमी
दिल्ली में आंखों की देखभाल के लिए 249 आई केयर संस्थान हैं, जिनमें 77.5% निजी, 14.5% सरकारी और 8% NGO द्वारा संचालित हैं। शहर में कुल 1085 आंखों के डॉक्टर और 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई टेक्नीशियन हैं।
हालांकि, दिल्ली में 270 आई केयर सेंटर की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 50 केंद्र ही मौजूद हैं। इससे समय पर आंखों की जांच और इलाज में बाधा आती है, जो कई मामलों में समस्या बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञ की राय और मुख्य कारण
AIIMS के डॉ. प्रवीण वशिष्ट के अनुसार, बदलती लाइफस्टाइल, लगातार इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल और स्क्रीन टाइम का बढ़ना नजर कमजोर होने के प्रमुख कारण हैं। उनका कहना है कि समय पर जांच और उचित चश्मे का इस्तेमाल लोगों को गंभीर दृष्टि समस्याओं से बचा सकता है।













