देहरादून ट्रैफिक जाम से बढ़ी ईंधन की बर्बादी, रोज 60 हजार लीटर पेट्रोल हो रहा खर्च

देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक जाम के कारण रोज करीब 60 हजार लीटर अतिरिक्त ईंधन खर्च हो रहा है, जिससे पेट्रोल-डीजल की खपत तेजी से बढ़ी है।

देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक जाम के कारण ईंधन की खपत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना हजारों वाहन जाम में फंसने से करीब 60 हजार लीटर ईंधन अतिरिक्त बर्बाद हो रहा है।

देहरादून: राजधानी देहरादून में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद शहर में वाहनों का दबाव और बढ़ा है, जिससे सड़कें अपनी क्षमता से कई गुना अधिक ट्रैफिक झेल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार जाम में फंसने से ईंधन की बर्बादी में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

देहरादून की सड़कों पर क्षमता से कई गुना अधिक दबाव

राजधानी देहरादून के प्रमुख जंक्शन और सड़कें अब अपनी तय क्षमता से कई गुना ज्यादा ट्रैफिक का दबाव झेल रही हैं। ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञों के मुताबिक शहर के कई चौराहों पर वाहनों की संख्या डिजाइन क्षमता से पांच से छह गुना तक पहुंच चुकी है।

घंटाघर, प्रिंस चौक, लालपुल, रिस्पना पुल और सर्वे चौक जैसे प्रमुख इलाकों में हर घंटे हजारों पीसीयू (Passenger Car Unit) का दबाव दर्ज किया जा रहा है। इससे दिनभर लंबा जाम और धीमी यातायात व्यवस्था बनी रहती है।

जाम में फंसने से तेजी से बढ़ रही ईंधन खपत

विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य कार इंजन चालू रहने की स्थिति में प्रति घंटे 0.6 से 1 लीटर तक ईंधन खर्च करती है। एसयूवी और भारी वाहनों में यह खपत और ज्यादा होती है, जबकि दोपहिया वाहन भी लगातार आइडल रहने पर अतिरिक्त पेट्रोल खर्च करते हैं।

आंकड़ों के अनुसार यदि कोई वाहन रोज औसतन 30 मिनट जाम में फंसा रहता है तो करीब 0.4 लीटर अतिरिक्त ईंधन खर्च हो जाता है। इसी आधार पर शहर में कुल ईंधन खपत में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी मानी जा रही है।

10 मिनट के जाम में रोज बर्बाद हो रहा हजारों लीटर पेट्रोल

अनुमान के मुताबिक देहरादून में रोज करीब पांच लाख वाहन सड़कों पर चलते हैं। यदि इनमें से हर वाहन केवल 10 मिनट भी जाम में फंसता है तो कुल मिलाकर 83 हजार घंटे से ज्यादा समय ट्रैफिक में बर्बाद होता है।

ईंधन खपत के औसत के हिसाब से रोजाना 58 हजार से 60 हजार लीटर तक पेट्रोल और डीजल केवल जाम की वजह से अतिरिक्त खर्च हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क ढांचे में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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