डेमी वोलरिंग ने टूर डी फ्रांस फेम्स का दूसरा खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। नीदरलैंड की राइडर ने निर्णायक अंतिम चरण में शानदार जीत दर्ज की और कातर्जिना निवियादोमा-फिनी को पीछे छोड़ते हुए पीली जर्सी अपने नाम रखी।
स्पोर्ट्स न्यूज़: नीदरलैंड की स्टार साइकिलिस्ट डेमी वोलरिंग ने टूर डी फ्रांस फेम्स में इतिहास रचते हुए अपना दूसरा खिताब जीत लिया है। एफडीजे-सुएज की 29 वर्षीय राइडर ने निर्णायक अंतिम चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ स्टेज जीत हासिल की, बल्कि पीली जर्सी पर अपना कब्जा भी बरकरार रखा। इसके साथ ही वोलरिंग इस प्रतिष्ठित महिला साइकिलिंग रेस को दो बार जीतने वाली पहली राइडर बन गई हैं। वोलरिंग ने अंतिम चरण में अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी और पोलैंड की राइडर कातर्जिना निवियादोमा-फिनी से करीब एक मिनट से अधिक की बढ़त के साथ जीत दर्ज की। इससे पहले उन्होंने रेस के पेनल्टीमेट स्टेज में भी जीत हासिल कर येलो जर्सी अपने नाम की थी। रविवार के निर्णायक मुकाबले से पहले वोलरिंग के पास निवियादोमा-फिनी पर आठ सेकंड की बढ़त थी।
नीस में हुआ रोमांचक अंतिम चरण
टूर डी फ्रांस फेम्स का पांचवां संस्करण 99.2 किलोमीटर लंबे पहाड़ी अंतिम चरण के साथ समाप्त हुआ। यह रूट नीस से शुरू होकर वहीं समाप्त हुआ। राइडर्स को इस दौरान कुल 2,100 मीटर की चढ़ाई का सामना करना पड़ा और रूट में कुख्यात कोल डी'एज की चार बार चढ़ाई शामिल थी।
अंतिम चरण की शुरुआत से ही रेस बेहद प्रतिस्पर्धी रही। ब्रिटेन की जो बैकस्टेड्ट ने शुरुआती हिस्से में तेज गति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद रेस की पूर्व लीडर मार्लेन रॉइसर को कोल डी'एज की दूसरी डाउनहिल पर दुर्घटना का सामना करना पड़ा।
रॉइसर उस समय सामान्य वर्गीकरण में तीसरे स्थान पर थीं और वोलरिंग से 72 सेकंड पीछे चल रही थीं। दुर्घटना के बाद उन्होंने रेस पूरी तो की, लेकिन वह दोबारा खिताब की दौड़ में वापसी नहीं कर सकीं।
वोलरिंग और निवियादोमा-फिनी के बीच सीधा मुकाबला
रॉइसर के बाहर होने के बाद खिताब की दौड़ मुख्य रूप से वोलरिंग और निवियादोमा-फिनी के बीच सिमट गई। दोनों ही पहले टूर डी फ्रांस फेम्स जीत चुकी हैं और इस बार भी पूरी रेस के दौरान दोनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।
वोलरिंग ने शनिवार के प्रदर्शन को रविवार को भी दोहराया। उन्होंने अंतिम चढ़ाई के शिखर पर पहुंचने से ठीक पहले निवियादोमा-फिनी से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद डाउनहिल हिस्से में उन्होंने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली।
अंततः वोलरिंग ने अपने प्रतिद्वंद्वियों से एक मिनट से ज्यादा की बढ़त के साथ फिनिश लाइन पार की। यह इस साल की नौ स्टेज वाली रेस में उनकी तीसरी स्टेज जीत थी।
पीली जर्सी में पहली बार मिली जीत
वोलरिंग के लिए इस जीत की खासियत सिर्फ दूसरा टूर खिताब जीतना नहीं था। उन्होंने पहली बार पीली जर्सी पहनकर टूर डी फ्रांस फेम्स का कोई चरण जीता।
जीत के बाद वोलरिंग ने कहा कि पीली जर्सी में जीतना उनके लिए खास सपना था। उन्होंने टीम के साथ मेहनत, जुनून और इस खेल से जुड़ी जिंदगी को भी अपनी सफलता का हिस्सा बताया।
वोलरिंग के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि अंतिम दो चरणों में उनके और निवियादोमा-फिनी के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली थी।
स्टेज आठ के विवाद के बाद दिया जवाब
रेस के आठवें चरण के दौरान निवियादोमा-फिनी ने वोलरिंग की टीम की एक साथी साइकिलिस्ट सेलिया गेरी के व्यवहार पर आपत्ति जताई थी। पोलिश राइडर का आरोप था कि गेरी ने जानबूझकर उन्हें रास्ते में रोकने या भीड़ की तरफ धकेलने जैसा व्यवहार किया, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।
इस घटना को लेकर निवियादोमा-फिनी नाराज थीं और उन्होंने इसे वोलरिंग की टीम की रणनीति से जोड़कर देखा था। हालांकि, वोलरिंग ने अंतिम चरण में अपनी जीत के बाद स्पष्ट किया कि वह चाहती थीं कि उनकी जीत किसी विवाद या घटना की वजह से नहीं, बल्कि उनकी टीम के प्रदर्शन के कारण मानी जाए।
उन्होंने अंतिम चरण में अकेले निकलकर जीत हासिल की और अपने प्रदर्शन के जरिए यह संदेश दिया कि टीम खिताब को किसी विवाद के सहारे नहीं, बल्कि खेल के दम पर जीतने की हकदार थी।
वोलरिंग और निवियादोमा-फिनी का लगातार शानदार रिकॉर्ड
इस जीत के साथ वोलरिंग और निवियादोमा-फिनी ने टूर डी फ्रांस फेम्स के हर संस्करण में पोडियम पर रहने का अपना रिकॉर्ड बरकरार रखा।
31 वर्षीय निवियादोमा-फिनी ने एक बार फिर शीर्ष तीन में जगह बनाई। वहीं इटली की 34 वर्षीय एलिसा लोंगो बोर्गिनी ने पहली बार इस रेस में टॉप-3 में स्थान हासिल किया।
इससे महिला साइकिलिंग की दुनिया में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा की गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है। रेस के दौरान कई चरणों में खिताब की स्थिति बदलती रही और अंतिम दो दिनों तक विजेता को लेकर रोमांच बना रहा।

मोंट वेंटू ने बदला रेस का रुख
इस साल के टूर डी फ्रांस फेम्स की सबसे खास बातों में से एक मोंट वेंटू की वापसी रही। महिला रेस में 2022 में स्टेज रेस के रूप में दोबारा शुरू होने के बाद पहली बार राइडर्स ने इस प्रतिष्ठित पर्वत का सामना किया।
मोंट वेंटू के कठिन चढ़ाई वाले चरण ने निवियादोमा-फिनी को अपनी क्षमताएं दिखाने का बड़ा मौका दिया। उन्होंने बेहद कठिन चढ़ाई के दौरान शानदार संघर्ष किया और माउंटेन फिनिश के जरिए वोलरिंग को पीछे छोड़ते हुए पीली जर्सी हासिल की।
मोंट वेंटू की चढ़ाई ऐतिहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह वही पर्वत है जहां 1967 के टूर डी फ्रांस के दौरान ब्रिटिश साइकिलिस्ट टॉम सिम्पसन की दुखद मृत्यु हुई थी।
रेस में लगातार बदलती रही तस्वीर
मोंट वेंटू पर शानदार प्रदर्शन के बाद निवियादोमा-फिनी ने येलो जर्सी हासिल की, लेकिन उनकी बढ़त लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी। इसके अगले ही दिन वोलरिंग ने शानदार प्रदर्शन करके फिर से रेस का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
अंतिम चरण से पहले दोनों के बीच अंतर सिर्फ आठ सेकंड था। ऐसे में एक छोटी सी गलती भी रेस का परिणाम बदल सकती थी। लेकिन वोलरिंग ने दबाव में शानदार प्रदर्शन किया और अंतिम चढ़ाई के बाद अपने प्रतिद्वंद्वी से दूरी बना ली।
महिला साइकिलिंग में यादगार संस्करण
इस साल का टूर डी फ्रांस फेम्स बेहद रोमांचक संस्करणों में से एक रहा। रेस के आयोजकों ने अलग-अलग तरह के पहाड़ी और तकनीकी मार्गों को शामिल किया, जिससे विभिन्न क्षमताओं वाली राइडर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।
रेस में कठिन पर्वतीय चढ़ाइयों से लेकर तेज डाउनहिल और रणनीतिक चरणों तक सब कुछ देखने को मिला। इसी वजह से सामान्य वर्गीकरण की लड़ाई आखिरी चरण तक खुली रही।
वोलरिंग की लगातार दो स्टेज जीत ने अंत में उनके पक्ष में फैसला किया, लेकिन निवियादोमा-फिनी और अन्य राइडर्स ने उन्हें पूरे टूर्नामेंट में कड़ी चुनौती दी।
वोलरिंग के करियर की बड़ी उपलब्धि
डेमी वोलरिंग का दूसरा टूर डी फ्रांस फेम्स खिताब उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। वह अब इस रेस के इतिहास में दो बार खिताब जीतने वाली पहली राइडर बन गई हैं।
उनकी सफलता ने एफडीजे-सुएज टीम की रणनीति और मजबूत टीमवर्क को भी सामने रखा। अंतिम चरण में वोलरिंग ने व्यक्तिगत क्षमता के साथ-साथ टीम की मदद का फायदा उठाया और निर्णायक मौके पर अपनी प्रतिद्वंद्वी से दूरी बनाने में सफल रहीं।
टूर डी फ्रांस फेम्स के इस संस्करण ने यह भी साबित किया कि महिला साइकिलिंग में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। खिताब की लड़ाई अंतिम दिन तक पहुंचना इस बात का प्रमाण रहा कि शीर्ष राइडर्स के बीच अंतर बेहद कम है।










