CAG की ऑडिट रिपोर्ट में झारखंड के जल जीवन मिशन में टेंडर आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अयोग्य ठेकेदारों को काम मिला, दस्तावेज अधूरे थे और कुछ मामलों में मिलीभगत की आशंका जताई गई।
रांची: झारखंड में जल जीवन मिशन की योजनाओं के टेंडर आवंटन को लेकर CAG की रिपोर्ट में कई खामियां सामने आई हैं। ऑडिट में ऐसे ठेकेदारों को काम दिए जाने का उल्लेख है, जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे। रिपोर्ट में दस्तावेजों की कमी, सीमित प्रतिस्पर्धा और गढ़वा-जमशेदपुर में कुछ निविदाओं के आवंटन को लेकर मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है।
जल जीवन मिशन के टेंडर में अयोग्य ठेकेदारों को काम मिलने का खुलासा
झारखंड में जल जीवन मिशन की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर CAG की ऑडिट रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ऐसे ठेकेदारों को भी काम दिया गया, जो निविदा की निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करते थे।

CAG ने जांच के लिए 39 निविदाओं को सैंपल के तौर पर लिया था। इनमें से सात निविदाएं एक ही संवेदक या ठेकेदार को आवंटित किए जाने की बात सामने आई। करीब 54.05 करोड़ रुपये मूल्य वाली एक निविदा में ठेकेदार से पिछले पांच वित्तीय वर्षों का लेखाजोखा मांगा गया था, ताकि सिविल कार्यों के टर्नओवर का आकलन किया जा सके।
ऑडिट के दौरान पाया गया कि संबंधित ठेकेदार ने केवल दो वर्षों का पूरा लेखाजोखा प्रस्तुत किया। बाकी तीन वर्षों के लिए अधूरे दस्तावेज जमा किए गए। इसके बावजूद निविदा आवंटित कर दी गई।
इंजीनियर और मशीनरी की शर्तों पर भी सवाल
टेंडर की शर्तों में काम पूरा करने के लिए जरूरी इंजीनियर और ड्रिल मशीन जैसी तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता भी निर्धारित की गई थी। CAG के अनुसार संबंधित एजेंसी ने सातों कामों के लिए एक ही सूची में इन संसाधनों का विवरण दिया और इसके आधार पर पात्रता हासिल कर ली।
रिपोर्ट में इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऑडिट के मुताबिक यदि अलग-अलग परियोजनाओं के लिए जरूरी तकनीकी संसाधन एक ही समय में उपलब्ध होने चाहिए थे, तो एक ही सूची के आधार पर सभी निविदाओं के लिए पात्रता स्वीकार करना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
गढ़वा और जमशेदपुर में ज्वाइंट वेंचर को लेकर सवाल
CAG ने निविदाओं के आवंटन में सीमित प्रतिस्पर्धा का भी उल्लेख किया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के दो प्रमंडलों में पांच निविदाओं में केवल दो ठेकेदारों ने हिस्सा लिया। इनमें तीन निविदाएं एक ठेकेदार को और दो दूसरे ठेकेदार को आवंटित की गईं।
इसके बाद गढ़वा और जमशेदपुर प्रमंडल में इसी तरह की निविदाएं उन्हीं दोनों ठेकेदारों को ज्वाइंट वेंचर के रूप में दिए जाने की बात सामने आई। CAG ने इन परिस्थितियों को देखते हुए निविदा आवंटन में मिलीभगत की आशंका जताई है।
डिमांड ड्राफ्ट और भुगतान प्रक्रिया पर भी आपत्ति
ऑडिट रिपोर्ट में डिमांड ड्राफ्ट की खरीद से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। CAG ने आशंका जताई कि डिमांड ड्राफ्ट की खरीद में आपसी मिलीभगत के जरिए बोली प्रक्रिया को प्रभावित किया गया हो सकता है।
इसके अलावा कुछ योजनाओं में ठेकेदारों को निर्धारित 85 प्रतिशत भुगतान के बजाय 100 प्रतिशत भुगतान किए जाने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है। CAG के निष्कर्षों के बाद जल जीवन मिशन के तहत टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदारों की पात्रता और भुगतान व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।











