देवगौड़ा का खरगे पर पलटवार: कहा- 'कांग्रेस से जबरदस्ती की शादी थी, अपमानजनक रिश्ते के कारण देना पड़ा तलाक'

राजनीति में नया विवाद! देवगौड़ा ने खरगे पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस से उनकी शादी जबरदस्ती थी और अपमानजनक रिश्ते के कारण उन्हें तलाक लेना पड़ा।

पूर्व प्रधानमंत्री और राज्यसभा सांसद एच.डी. देवगौड़ा ने बुधवार को मल्लिकार्जुन खरगे की संसद में की गई मजाकिया टिप्पणी का जवाब दिया। खरगे ने सदन में कहा था कि देवगौड़ा जी कांग्रेस के प्रति ‘प्रेम’ रखते थे, लेकिन आखिरकार उन्होंने भाजपा और नरेंद्र मोदी से ‘शादी’ कर ली।

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी पर तीखा लेकिन व्यंग्यात्मक जवाब दिया। संसद में की गई एक हल्की-फुल्की टिप्पणी के बाद दोनों नेताओं के बीच शब्दों का यह आदान-प्रदान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है, खासकर कर्नाटक की गठबंधन राजनीति के संदर्भ में।

देवगौड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पत्र साझा करते हुए कहा कि अगर राजनीतिक रिश्तों को “शादी” की भाषा में समझाया जाए, तो कांग्रेस के साथ उनका संबंध एक “जबरदस्ती की शादी” जैसा था, जिसे अंततः “अपमानजनक व्यवहार” के कारण खत्म करना पड़ा।

क्या था विवाद की शुरुआत

राज्यसभा में बोलते हुए खरगे ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि देवगौड़ा को कांग्रेस से “प्रेम” था, लेकिन अंत में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ “शादी” कर ली। इस टिप्पणी पर सदन में हंसी का माहौल बन गया था, लेकिन देवगौड़ा ने इसे राजनीतिक संदर्भ में लेते हुए विस्तार से जवाब दिया।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि जब यह टिप्पणी की गई, उस समय वह सदन में मौजूद नहीं थे क्योंकि उन्हें बेंगलुरु में उगादी समारोह में शामिल होना था। बाद में टिप्पणी की जानकारी मिलने पर उन्होंने अपना पक्ष स्पष्ट करना जरूरी समझा।

कांग्रेस के साथ रिश्ता मजबूरी में बना - देवगौड़ा

देवगौड़ा ने कहा कि अगर राजनीतिक गठबंधन को वैवाहिक रिश्ते से तुलना करें, तो कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन परिस्थितियों के कारण बना था। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता बराबरी का नहीं था और कई बार उनकी पार्टी की भावनाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 2018 की कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति का जिक्र किया। उस समय विधानसभा चुनाव के बाद कोई भी दल पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाया था। 

देवगौड़ा के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने उनके बेटे और नेता एच. डी. कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने सुझाव दिया था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी दी जाए। इसके बावजूद गठबंधन की शर्तों को लेकर मतभेद बने रहे, जिससे दोनों दलों के बीच विश्वास की कमी बढ़ती गई।

2019 में गठबंधन टूटने का आरोप

देवगौड़ा ने अपने पत्र में कहा कि 2019 में कर्नाटक की गठबंधन सरकार गिरने के लिए कांग्रेस की रणनीति भी जिम्मेदार थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कुछ विधायकों ने दल बदल किया, तब कांग्रेस उन्हें रोकने में नाकाम रही। उनका कहना था कि अगर उस समय सख्त कदम उठाए जाते, तो गठबंधन सरकार बच सकती थी। 

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने गठबंधन तोड़ने का फैसला नहीं लिया, बल्कि परिस्थितियों ने उन्हें अलग रास्ता चुनने के लिए मजबूर किया। देवगौड़ा ने लिखा कि उन्हें “स्थिर और सम्मानजनक साझेदारी” की तलाश करनी पड़ी, इसलिए बाद में उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया।

खरगे की तारीफ भी, लेकिन कांग्रेस पर सवाल

दिलचस्प बात यह रही कि देवगौड़ा ने अपने जवाब में खरगे को व्यक्तिगत रूप से ईमानदार और अनुभवी नेता बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा उन्हें उतनी राजनीतिक जगह नहीं दी, जिसके वह हकदार थे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उन्हें अन्य दलों से अधिक सम्मान मिला। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी नए गठबंधन का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान को भाजपा के प्रति नरम रुख के रूप में देखा जा रहा है।

देवगौड़ा और कांग्रेस के बीच संबंध लंबे समय तक सहयोग और टकराव दोनों से भरे रहे हैं। उनकी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) कई बार कांग्रेस के साथ गठबंधन में रही है, खासकर कर्नाटक की राजनीति में। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ी है, और हाल के बयानों से यह साफ दिखता है कि पुराने मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

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