बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इससे पहले BJP मुख्यालय में मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा हुई। इस बीच विपक्ष ने बयानबाजी करते हुए सरकार पर निशाना साधा।
पटना: बिहार की राजनीति में हालिया बदलावों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री बनने के महज छह दिन बाद यह उनकी प्रधानमंत्री के साथ पहली औपचारिक बैठक है, जिसे राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में बिहार के विकास एजेंडा, केंद्र-राज्य समन्वय और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राज्य में नई सरकार अपने शुरुआती फैसलों और रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटी है।
BJP मुख्यालय में नितिन नवीन से हुई चर्चा
प्रधानमंत्री से मिलने से पहले सम्राट चौधरी ने दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्यालय में वरिष्ठ नेता नितिन नवीन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब पांच मिनट तक बातचीत हुई।
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि इस दौरान बिहार मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर संभावित नामों पर चर्चा हुई और सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। यह संकेत देता है कि राज्य में जल्द ही कैबिनेट विस्तार हो सकता है।
नई सरकार के लिए अहम है केंद्र का समर्थन
विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच यह मुलाकात केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए अहम है। बिहार जैसे बड़े राज्य में विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग बेहद जरूरी माना जाता है।
इस बैठक में बुनियादी ढांचा, रोजगार, निवेश और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर भी चर्चा होने की संभावना जताई गई है।
विपक्ष का हमला: अखिलेश यादव का बयान
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर बिहार के नेतृत्व को लेकर तीखी टिप्पणी की।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि अपराध, दल-बदल और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से जुड़े लोगों को मुख्यमंत्री बनने पर सवाल उठाए जाने चाहिए। हालांकि, इस बयान पर सत्तारूढ़ दल की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
महिला आरक्षण पर बीजेपी का जोर
दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भाजपा महिला मोर्चा द्वारा आयोजित ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई।
कार्यक्रम के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी प्रतीकात्मक रूप से हाथों में जंजीर बांधकर शामिल हुईं, जिससे महिलाओं के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की मांग को उजागर किया गया।
सम्राट चौधरी का बयान
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष केवल अपने परिवार तक राजनीति सीमित रखना चाहता है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि महिला आरक्षण बिल पहले लागू होता, तो बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएं विधानसभा में पहुंचतीं। उनके अनुसार, यह कदम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

मंत्रिमंडल विस्तार पर नजर
राजनीतिक हलकों में अब सबसे ज्यादा चर्चा बिहार कैबिनेट विस्तार को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि:
नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा जाएगा
कुछ पुराने चेहरों को बदला जा सकता है
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई बैठकों के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।
बिहार की राजनीति में नए संकेत
यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में आने वाले बदलावों का संकेत भी मानी जा रही है। नई सरकार जहां अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर रही है, वहीं संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव की तैयारी दिख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति में कई बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं, जो राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेंगे।











