2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी, जो इस साल अक्टूबर की तुलना में लगभग 18 दिन लेट होगी। अधिकमास के कारण त्योहार की तिथियां आगे बढ़ गई हैं। इस वर्ष ठंड के मौसम में दिवाली का उत्सव होगा, जिसमें लक्ष्मी-गणेश की पूजा, आतिशबाजी और सामाजिक कार्यक्रम शामिल होंगे। यह समय ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ और समृद्धि लाने वाला माना जा रहा है।
Diwali 2026: अगले वर्ष दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी, जो इस साल की तुलना में लगभग 18 दिन लेट होगी। उत्तर भारत और अन्य हिस्सों में लोग इस दिन घरों को सजाएंगे, लक्ष्मी-गणेश की पूजा करेंगे और आतिशबाजी का आनंद लेंगे। अधिकमास के प्रभाव के कारण त्योहार की तिथियां आगे बढ़ी हैं, और ठंडी हवा में यह उत्सव और खास होगा। इस अवसर पर परिवार और पड़ोसियों के साथ सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
दिवाली 2026 की तारीख और समय
2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस साल की तुलना में यह त्योहार लगभग 18 दिन लेट होगा। देशभर में लक्ष्मी-गणेश की पूजा और आतिशबाजी के साथ दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय अत्यंत शुभ माना जा रहा है क्योंकि सूर्य, शनि और बृहस्पति की स्थिति विशेष फलदायक रहेगी। इस वर्ष दिवाली का आनंद ठंडी हवा के साथ मनाया जाएगा, जिससे त्योहार की रातें और भी खास हो जाएंगी।
अधिकमास का प्रभाव और दिवाली में देरी
हिंदू पंचांग के अनुसार हर तीन साल में एक बार अधिकमास आता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। 2026 में यह अधिकमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इसका असर जून के बाद आने वाले त्योहारों की तिथियों पर पड़ता है। इसी वजह से अक्टूबर में आने वाली दिवाली 2026 में नवंबर में पड़ रही है। अधिकमास का यह प्रभाव अन्य त्योहारों पर भी देखा जाएगा, जैसे रक्षाबंधन, तीज, गणेश पूजन, नवरात्रि और छठ।

त्योहारों की तैयारी और उत्सव की खासियत
दिवाली के समय लोग घरों की साफ-सफाई और सजावट में जुट जाएंगे। इस साल ठंड की शुरुआत पहले से हो चुकी होगी, इसलिए दीपक जलाने और पटाखे फोड़ने का आनंद ठंडी रातों में लिया जाएगा। व्यवसायिक दृष्टि से यह समय व्यापारियों और दुकानदारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि खरीदारी और उत्सव संबंधी बिक्री बढ़ती है।
लक्ष्मी पूजा और आतिशबाजी के अलावा, दिवाली सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। परिवार और पड़ोसियों के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान, दान और पूजा-पाठ के कार्यक्रम मनाए जाएंगे। ज्योतिषीय अनुसार, नववर्ष की शुरुआत के लिए यह समय सौभाग्य और समृद्धि लाने वाला रहेगा।
संपूर्ण प्रभाव और आगामी त्योहारों की तिथियां
इस वर्ष दिवाली की देरी से छठ पर्व भी 14-15 नवंबर 2026 को पड़ रहा है। इससे पूरे त्योहारों का शृंखला थोड़ा आगे खिसक जाएगी। अधिकमास के प्रभाव से अगले वर्ष के धार्मिक कार्यक्रमों की योजना पहले से बना लेना और समाज में तालमेल बनाए रखना आवश्यक है।








