मनोरंजन उद्योग में इन दिनों वर्क-लाइफ बैलेंस और 8 घंटे की शिफ्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बहस के बीच टीवी अभिनेत्री Deepika Singh ने लंबे समय तक काम करने को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रिएटिव फील्ड में समय की सीमाएं तय करना हमेशा संभव नहीं होता और गुणवत्ता के लिए अतिरिक्त समय देना जरूरी हो सकता है।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से 8 घंटे की वर्किंग शिफ्ट को लेकर बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे ने तब जोर पकड़ा जब Deepika Padukone ने फिल्म ‘स्पिरिट’ के मेकर्स के सामने कथित तौर पर 8 घंटे की शिफ्ट की शर्त रखी। कहा गया कि सहमति नहीं बनने पर उन्होंने फिल्म छोड़ दी, जिसके बाद यह मुद्दा इंडस्ट्री में चर्चा का केंद्र बन गया।
इस बहस में कई कलाकारों ने अपने-अपने विचार रखे हैं। वहीं हाल ही में टीवी एक्ट्रेस Deepika Singh ने लंबे काम के घंटों को सही ठहराते हुए अलग नजरिया पेश किया है, जिससे इस मुद्दे पर और भी चर्चा बढ़ गई है।
इंडस्ट्री में 8 घंटे की शिफ्ट पर क्यों छिड़ी बहस?
हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री Deepika Padukone द्वारा एक फिल्म प्रोजेक्ट में 8 घंटे की कार्य-शिफ्ट की शर्त रखने की खबरों के बाद यह मुद्दा सुर्खियों में आया। रिपोर्ट्स के अनुसार, सहमति न बनने पर उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया। इसके बाद से कई कलाकारों और तकनीशियनों ने इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखी है—कुछ 8 घंटे के पक्ष में हैं, तो कुछ इसे क्रिएटिव कार्य की प्रकृति के खिलाफ मानते हैं।
लोकप्रिय टीवी शो Diya Aur Baati Hum से पहचान बनाने वाली दीपिका सिंह ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, “मैंने 24 साल की उम्र में इंडस्ट्री जॉइन की थी। आज भी मुझे लगता है कि जितना काम करूं, उतना कम है। दीपिका ने बताया कि वह आमतौर पर 12 घंटे काम करती हैं और जरूरत पड़ने पर 13 से 14 घंटे तक भी शूटिंग करती हैं। उनके अनुसार, यह अतिरिक्त समय काम की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करता है।
“क्रिएटिव फील्ड में समय देना जरूरी”
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दीपिका सिंह का मानना है कि मनोरंजन उद्योग में समय की पाबंदी हमेशा संभव नहीं होती। उन्होंने कहा,
'यह एक क्रिएटिव फील्ड है। अगर हम समय सीमित कर देंगे, तो शायद सीन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। डायरेक्टर और टीम को सही आउटपुट देने के लिए पर्याप्त समय चाहिए।'
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लंबे काम के घंटे व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर जब परिवार को समय देने की बात आती है।
मोटिवेशन का अनोखा तरीका
दीपिका ने अपने मोटिवेशन का एक दिलचस्प पहलू भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब कभी उन्हें लगता है कि काम ज्यादा हो रहा है, तो वह अपने शुरुआती दिनों को याद करती हैं। 'मैं याद करती हूं कि जब मैं पहली बार ट्रेन से मुंबई आई थी और आज फ्लाइट से सफर करती हूं। यह सोच मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है,” उन्होंने कहा। यह दृष्टिकोण उनके करियर के प्रति समर्पण और निरंतर प्रगति की इच्छा को दर्शाता है।









