डॉक्टर अंजलि गर्ग ने MBBS के दौरान 12 घंटे की ड्यूटी और थकान के बावजूद UPSC की तैयारी की और दूसरी बार प्रयास में UPSC 2022 में 79वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनीं। उनकी कहानी संघर्ष, समय प्रबंधन और दृढ़ निश्चय की प्रेरणास्त्रोत मिसाल है।
Doctor to IAS Journey: अंजलि गर्ग ने दिल्ली के VMMC और सफदरजंग अस्पताल में MBBS के दौरान 12 घंटे की नाइट ड्यूटी और पढ़ाई के बीच UPSC की तैयारी शुरू की। उनका जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ। पहले प्रयास में असफल होने के बाद दूसरी बार उन्होंने UPSC 2022 में 79वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बनीं। अंजलि ने अपने बैच में मेडिकल साइंस टॉपर का खिताब भी पाया। उनका यह सफर दिखाता है कि दृढ़ निश्चय, मेहनत और सही समय प्रबंधन से बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
MBBS और बदलता नजरिया
अंजलि गर्ग का जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ। बचपन से ही उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा और स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद उन्होंने NEET परीक्षा पास कर दिल्ली के VMMC और सफदरजंग अस्पताल में MBBS शुरू की।
तीसरे साल में उन्होंने अस्पताल में मरीजों की स्थिति और सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली की सीमाओं को देखा। उन्हें महसूस हुआ कि केवल इलाज करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार लाना भी जरूरी है। यही सोच उन्हें UPSC की ओर ले गई।

ड्यूटी के बाद किताबों का समय
MBBS के दौरान अंजलि ने UPSC की तैयारी शुरू की। अस्पताल में 12 घंटे की नाइट ड्यूटी के बाद भी वे पढ़ाई में जुटी रहीं। थकान और नींद की कमी के बावजूद उन्होंने हर खाली पल का सही इस्तेमाल किया। दिन में मरीजों की देखभाल और रात में किताबों के साथ समय बिताना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।
पहले प्रयास में निराशा, दूसरे प्रयास में सफलता
पहले प्रयास में अंजलि सफल नहीं हो पाईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरी बार उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ तैयारी की और UPSC 2022 में 79वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनीं। इस दौरान वह अपने बैच की मेडिकल साइंस टॉपर भी रहीं।
अंजलि गर्ग की कहानी बताती है कि हिम्मत, समय प्रबंधन और दृढ़ निश्चय से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। डॉक्टर से आईएएस तक का यह सफर युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है और यह साबित करता है कि सही योजना और मेहनत से सपने पूरे किए जा सकते हैं।











