डीआर कांगो में इबोला का बढ़ता खतरा: पांच मौतों के बाद 255 यात्रियों वाली नाव क्वारंटीन, WHO की टीम जांच में जुटी

डीआर कांगो में इबोला और हैजा के खतरे के बीच 255 यात्रियों वाली नाव को क्वारंटीन किया गया। पांच लोगों की मौत के बाद WHO और स्वास्थ्य टीमें जांच में जुटीं।

डीआर कांगो में इबोला संक्रमण की आशंका के चलते 255 यात्रियों से भरी एक नाव को क्वारंटीन कर दिया गया है। पांच लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और WHO जांच कर रहे हैं, जबकि अब तक किसी यात्री में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।

किंशासा: अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य अधिकारियों ने 255 यात्रियों को लेकर जा रही एक नदी की नाव को एहतियातन क्वारंटीन कर दिया है। नाव पर यात्रा के दौरान पांच लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त टीम को मौके पर भेजा है। फिलहाल सभी यात्रियों की इबोला और हैजा (कॉलेरा) की जांच की जा रही है। शुरुआती परीक्षणों में किसी भी यात्री में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी अगले 21 दिनों तक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

चीन की कंपनी संचालित नाव को किंशासा पहुंचने से पहले रोका गया

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यिंगफेंग-2 नामक नाव, जिसे एक चीनी कंपनी संचालित करती है, को राजधानी किंशासा से लगभग 65 किलोमीटर पहले कांगो नदी के बेंडे-बेंडे बंदरगाह के पास रोक दिया गया। यह नाव उत्तर-पश्चिमी डीआर कांगो के मोंगाला प्रांत से करीब 1,700 किलोमीटर की यात्रा कर राजधानी की ओर आ रही थी। यात्रा के दौरान एक यात्री को तेज बुखार और दस्त की शिकायत हुई थी। उसे मोंगाला प्रांत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद दो अन्य वयस्कों, एक तीन वर्षीय बच्चे और एक नवजात शिशु की भी मृत्यु हो गई। इन लगातार हुई मौतों ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी, जिसके बाद पूरी नाव को क्वारंटीन करने का फैसला लिया गया।

WHO और स्वास्थ्य मंत्रालय ने बनाई मोबाइल लैब

नाव को रोके जाने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और डीआर कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ टीम ने जहाज पर चढ़कर यात्रियों की मेडिकल जांच शुरू की। मौके पर एक मोबाइल प्रयोगशाला भी स्थापित की गई है, जहां इबोला और हैजा सहित अन्य संक्रामक बीमारियों के सैंपल की जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने बताया कि अभी तक किसी भी यात्री में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि 21 दिनों की निगरानी अवधि पूरी होने तक कोई नया मामला सामने नहीं आता, तो संक्रमण फैलने की आशंका काफी कम हो जाएगी।

संक्रमण की आशंका पर एहतियाती कदम

सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह एहतियाती है। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि नाव को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार नदी के बीच सुरक्षित दूरी पर क्वारंटीन रखा जाए ताकि संभावित संक्रमण राजधानी किंशासा तक न पहुंच सके।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस मोंगाला प्रांत से नाव रवाना हुई थी, वहां फिलहाल इबोला का कोई सक्रिय मामला दर्ज नहीं है। शुरुआती रिपोर्टों में इस संबंध में भ्रम की स्थिति थी, जिसे बाद में सरकार ने स्पष्ट किया।

डीआर कांगो में 17वां इबोला प्रकोप जारी

डीआर कांगो इस समय अपने 17वें इबोला प्रकोप का सामना कर रहा है। यह प्रकोप 15 मई को घोषित किया गया था और इस बार संक्रमण का कारण Bundibugyo प्रजाति का इबोला वायरस है। यह वायरस पिछले एक दशक से अधिक समय से सामने नहीं आया था, इसलिए इसे लेकर वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।

Bundibugyo प्रजाति के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत दवा उपलब्ध नहीं है और न ही इसका कोई प्रमाणित टीका मौजूद है। हालांकि, यूनाइटेड किंगडम में इस वायरस के खिलाफ पहले मानव परीक्षण जारी हैं, जिनसे भविष्य में प्रभावी वैक्सीन विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

लगातार बढ़ रहे हैं संक्रमण और मौत के मामले

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, प्रकोप घोषित होने के तीन महीने बाद भी संक्रमण की रफ्तार थमी नहीं है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3,973 पुष्ट इबोला मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 1,801 लोगों की मौत हो चुकी है। यह देश के इतिहास में दूसरा सबसे घातक इबोला प्रकोप माना जा रहा है।

वर्तमान में 17,000 से अधिक लोग स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं क्योंकि वे संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए थे। इसके अलावा 674 मरीज विभिन्न आइसोलेशन और उपचार केंद्रों में भर्ती हैं, जबकि 776 लोग इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

राजधानी किंशासा में बढ़ाई गई निगरानी

संक्रमण को राजधानी तक पहुंचने से रोकने के लिए किंशासा प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी है। विशेष रूप से मालुकु क्षेत्र, जिसे राजधानी का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है, वहां मेडिकल स्क्रीनिंग, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की संख्या बढ़ा दी गई है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल राजधानी में इबोला संक्रमण का कोई नया मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियाती कदम इसलिए उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

इबोला वायरस क्या है?

इबोला एक गंभीर और अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रव, रक्त या संक्रमित जानवरों के संपर्क से फैलती है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी, दस्त और कई मामलों में आंतरिक व बाहरी रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं। समय पर इलाज और संक्रमित व्यक्ति को अलग रखना संक्रमण रोकने के लिए सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।

वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की नजर

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां डीआर कांगो की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निगरानी, जांच और आइसोलेशन की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से जारी रहती है, तो संक्रमण को व्यापक स्तर पर फैलने से रोका जा सकता है।

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