दुधवा में 117 साल बाद दिखा दुर्लभ सर्प, CM योगी ने जैव विविधता संरक्षण पर दिया संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जैव विविधता संरक्षण में जनभागीदारी की अपील की। दुधवा में 117 साल बाद दुर्लभ सर्प और जर्डन्स बैबलर पक्षी की मौजूदगी दर्ज की गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'योगी की पाती' के जरिए जैव विविधता संरक्षण में जनभागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व में 117 साल बाद दुर्लभ सर्प और तराई क्षेत्र में जर्डन्स बैबलर पक्षी की मौजूदगी दर्ज की गई है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम लिखे पत्र 'योगी की पाती' में जैव विविधता संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण में जनता की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने राज्य में वन्यजीव संरक्षण के सकारात्मक परिणामों का उल्लेख करते हुए कई दुर्लभ प्रजातियों की वापसी को उत्साहजनक बताया।

दुर्लभ प्रजातियों की वापसी को बताया सकारात्मक संकेत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि जिन जीवों और पक्षियों को कभी प्रदेश से लगभग विलुप्त माना जा रहा था, वे अब फिर से प्राकृतिक आवासों में नजर आने लगे हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, तराई क्षेत्र के घास के मैदानों में अत्यंत दुर्लभ जर्डन्स बैबलर पक्षी वर्षों बाद देखा गया है। वहीं दुधवा टाइगर रिजर्व में पेंटेड कीलबैक नामक दुर्लभ सर्प की मौजूदगी 117 वर्षों बाद दर्ज की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे प्रदेश की जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

प्रकृति से जुड़ने का किया आह्वान

'योगी की पाती' में मुख्यमंत्री ने लोगों, विशेष रूप से युवाओं से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब भी प्रकृति के बीच जाने का अवसर मिले, तो केवल पर्यटक बनकर नहीं बल्कि एक जिज्ञासु विद्यार्थी की तरह वहां के पर्यावरण, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों को समझने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने लोगों को अपने अनुभव ब्लॉग, लेख और अन्य माध्यमों से साझा करने के लिए भी प्रेरित किया। मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रकृति के प्रति जागरूकता और अपनापन ही जैव विविधता संरक्षण की सबसे मजबूत नींव है।

छोटे जीवों की भूमिका भी अहम

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि आधुनिकता जरूरी है, लेकिन इसका मतलब प्रकृति से दूरी बनाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जुगनू, गौरैया, मैना और अन्य छोटे जीव-जंतु पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी संख्या में कमी चिंता का विषय है और यह पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन से लेकर खाद्य श्रृंखला तक, प्रकृति के प्रत्येक जीव का अपना महत्व है। पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छोटे पक्षी, कीट और अन्य जीव भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

नौ वर्षों में बढ़ी वन्यजीवों की संख्या

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई थी। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में बाघ, तेंदुआ और राज्य पक्षी सारस की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के 13 आर्द्रभूमि स्थलों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर सूची में शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। बच्चों और युवाओं को प्रकृति से जोड़ने के लिए उन्होंने स्कूल प्रोजेक्ट्स और अवकाश के दौरान प्राकृतिक स्थलों के अध्ययन को भी प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री ने अंत में प्रदेशवासियों से अपील की कि वे प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं। उनका कहना है कि यदि समाज और सरकार मिलकर प्रयास करें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

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