दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की उपाध्यक्ष पद पर जीत को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दीपांशु की जीत को जेन-जी की जीत बताते हुए सरकार पर भी निशाना साधा।
DUSU Election Result 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव की ओर ध्यान खींचा है। प्रमुख छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के बीच हुए मुकाबले में शौकीन ने 30,615 वोट हासिल किए और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार ईशू मौर्या को 13,705 मतों के अंतर से हराया। उनकी जीत के बाद राजनीतिक नेताओं और छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सौरव दास ने जीत को बताया Gen Z की कहानी
सीजेपी नेता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दीपांशु शौकीन की जीत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस परिणाम को Gen Z की बदलती सोच और स्वतंत्र उम्मीदवारों के प्रति छात्रों के समर्थन से जोड़कर देखा। दास ने कहा कि एक निर्दलीय उम्मीदवार ने रिकॉर्ड संख्या में वोट हासिल करके इतिहास रचा है। अपने पोस्ट में दास ने चुनाव परिणाम को बदलते समय का संकेत बताया और सरकार में बैठे लोगों से युवा पीढ़ी के संदेश को समझने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि इस नतीजे के गहरे राजनीतिक अर्थ हो सकते हैं या नहीं, लेकिन इसे बदलते दौर की निशानी के रूप में देखा जाना चाहिए। दास की टिप्पणी उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, इसलिए इसे चुनाव परिणाम का स्वतंत्र विश्लेषण नहीं, बल्कि एक नेता की प्रतिक्रिया के रूप में समझना जरूरी है।
दीपांशु शौकीन को मिले 30,615 वोट
DUSU उपाध्यक्ष पद के चुनाव में दीपांशु शौकीन को कुल 30,615 वोट मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी ABVP के ईशू मौर्या को 16,910 वोट प्राप्त हुए। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के वीर चतरथ 4,313 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार, शौकीन को कुल केंद्रीय पैनल उम्मीदवारों में सबसे अधिक वोट मिले।
शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनकी जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि DUSU के केंद्रीय पैनल में लंबे अंतराल के बाद किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया है। हालांकि, इस परिणाम से पूरे छात्र समुदाय की एक जैसी राजनीतिक राय का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

ABVP ने तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की
DUSU चुनाव में ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत हासिल की। यश डबास अध्यक्ष चुने गए, जबकि रिया छाबड़ी ने सचिव पद और लक्ष्यराज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत के कारण ABVP सभी चार प्रमुख पदों पर कब्जा नहीं कर सकी।
चुनाव में छात्र सुरक्षा, हॉस्टल और विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे। हालिया हॉस्टल भवन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा और आवास संबंधी मांगों को लेकर छात्र संगठनों ने अपनी-अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं। चुनाव परिणामों के बाद विभिन्न संगठनों ने अपनी रणनीति और छात्र मुद्दों पर आगे की भूमिका को लेकर प्रतिक्रियाएं दी हैं।
जीत के बाद क्या बोले दीपांशु शौकीन?
जीत के बाद दीपांशु शौकीन ने छात्रों के भरोसे के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने उन पर विश्वास किया है और वह इस भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने छात्रों के अधिकारों और उनकी समस्याओं के लिए आवाज उठाने की बात कही। रिपोर्टों के अनुसार, शौकीन छात्र आवास, हॉस्टल सुविधाओं और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करना चाहते हैं। अब उनके सामने चुनाव के दौरान किए गए वादों को संस्थागत स्तर पर उठाने और छात्रों की शिकायतों पर काम करने की चुनौती होगी।











