शाहजहांपुर की खुशी ने इस्तांबुल में जीता ग्रैपलिंग गोल्ड, 64 किलो वर्ग में ईरान की अइदा को हराया

शाहजहांपुर की खुशी ने इस्तांबुल में ग्लोबल ग्रैपलिंग सीरीज के सीनियर 64 किग्रा वर्ग में ईरान की अइदा को 6-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

शाहजहांपुर की खुशी ने तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित ग्लोबल ग्रैपलिंग सीरीज में 64 किग्रा सीनियर वर्ग का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने फाइनल मुकाबले में ईरान की अइदा को हराकर यह उपलब्धि हासिल की।

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की खुशी ने अंतरराष्ट्रीय ग्रैपलिंग प्रतियोगिता में देश का नाम रोशन किया है। तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित ग्लोबल ग्रैपलिंग सीरीज के सीनियर 64 किग्रा वर्ग में उन्होंने ईरान की अइदा को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। खुशी ने मुकाबले में शुरुआत से बढ़त बनाए रखी और 6-1 के अंतर से जीत दर्ज की।

इस्तांबुल में खुशी ने जीता स्वर्ण पदक

शाहजहांपुर के जैतीपुर क्षेत्र के अगरौली नवादा मोड़ गांव की रहने वाली खुशी ने अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल ग्रैपलिंग सीरीज में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित प्रतियोगिता के सीनियर 64 किग्रा भार वर्ग में उनका मुकाबला ईरान की खिलाड़ी अइदा से हुआ।

मुकाबले की शुरुआत से ही खुशी ने अपनी प्रतिद्वंदी पर दबाव बनाए रखा। उन्होंने मुकाबले में 6-1 के अंतर से जीत दर्ज की। मुकाबले के दौरान अइदा को ज्वाइंट लॉक में फंसने के बाद मैट पर टैप करना पड़ा, जिसके साथ ही मुकाबला खुशी के पक्ष में समाप्त हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद खुशी के परिवार में खुशी का माहौल है।

हरिद्वार में स्वर्ण जीतकर हासिल किया था अंतरराष्ट्रीय मौका

किसान रामफल चौधरी की बेटी खुशी पिछले पांच वर्षों से हरियाणा में रहकर एक अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। कुछ महीने पहले हरिद्वार में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने इस्तांबुल में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए अपनी जगह पक्की की थी।

हरिद्वार की प्रतियोगिता में प्रदर्शन के बाद खुशी को सीनियर 64 किग्रा वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इस्तांबुल में भी उन्होंने अपने प्रदर्शन को जारी रखा और ईरान की अइदा को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया।

बचपन से ही पदक जीतती रही हैं खुशी

खुशी ने कम उम्र से ही ग्रैपलिंग में कई पदक अपने नाम किए हैं। उन्होंने अंडर-19 स्कूल स्टेट चैंपियनशिप में रजत पदक जीता है। इसके अलावा अंडर-15 और अंडर-17 राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। अंडर-23 वर्ग में भी उनके नाम रजत पदक है।

सीनियर स्टेट स्तर पर खुशी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अंडर-15 और सीनियर वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया है। जूनियर नेशनल ग्रैपलिंग रेसलिंग प्रतियोगिता में भी वह स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।

खुशी के परिवार का खेलों से पुराना जुड़ाव है। उनके बड़े भाई अमित चौधरी क्रिकेट खिलाड़ी हैं और पिछले दस वर्षों से क्रिकेट अकादमी भी संचालित कर रहे हैं। उनके भाई गोविंद चौधरी बॉक्सिंग से जुड़े हैं, जबकि कुश और लव कबड्डी में सक्रिय हैं।

क्या है ग्रैपलिंग और कैसे खेला जाता है?

ग्रैपलिंग कुश्ती से मिलता-जुलता खेल है, जिसमें खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी को पकड़कर मैट पर गिराने और उस पर नियंत्रण बनाने का प्रयास करता है। इस खेल में मुक्का या किक मारने की अनुमति नहीं होती है।

खेल के दौरान किसी खिलाड़ी को एक स्थिति में अपने प्रतिद्वंद्वी पर तीन सेकेंड तक नियंत्रण बनाए रखने पर अंक मिल सकता है। इसके अलावा लॉक या सबमिशन की स्थिति में यदि प्रतिद्वंद्वी मैट पर टैप करके हार स्वीकार करता है तो मुकाबला वहीं समाप्त हो सकता है।

इस्तांबुल में खुशी ने इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ईरान की अइदा को मुकाबले में पीछे छोड़ा। ज्वाइंट लॉक के बाद अइदा के टैप करने से खुशी को जीत मिली और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल ग्रैपलिंग सीरीज में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

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