मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के एक दिन बाद अब आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर भी विवाद सामने आया है।
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ECINet को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से इसे रद्द करने और इसके कारण हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में ECINet को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से कुछ नागरिकों को जरूरी सेवाओं और अपने संवैधानिक अधिकारों से जुड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रभावित लोगों से माफी मांगने की मांग भी की। हालांकि, ECINet को लेकर थरूर द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके प्रभाव के बारे में स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
क्या है ECINet?
ECINet चुनाव आयोग का एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों के लिए अलग-अलग चुनावी सेवाओं को एक ही डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध कराना है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ECINet को जनवरी 2026 में लॉन्च किया गया था। इससे पहले इसका ट्रायल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव और कुछ उपचुनावों के दौरान किया गया था। चुनाव आयोग ने इसे पहले इस्तेमाल किए जा रहे करीब 40 अलग-अलग चुनाव संबंधी ऐप और वेबसाइटों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की पहल के तौर पर पेश किया था।
ECINet के जरिए मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची की जानकारी, आवेदन की स्थिति, मतदान केंद्र से जुड़ी जानकारी, उम्मीदवारों की जानकारी, ई-EPIC और चुनावी अपडेट जैसी सेवाओं को एक जगह उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया है।
SIR और ECINet का क्या है कनेक्शन?

ECINet का इस्तेमाल मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी किया गया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इसके बीटा संस्करण को 2025 में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के दौरान भी इस्तेमाल किया गया था। इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से विभिन्न फॉर्म और दस्तावेज जमा कराए गए, जिन्हें चुनावी अधिकारियों द्वारा आगे की प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया गया।
यही प्रक्रिया अब राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। थरूर ने आरोप लगाया है कि डिजिटल सिस्टम से जुड़ी समस्याओं के कारण नागरिकों को नुकसान हुआ। उन्होंने विशेष रूप से जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होने का दावा किया है। इन आरोपों को फिलहाल उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने ECINet के बारे में क्या कहा था?
ECINet लॉन्च होने से पहले चुनाव आयोग ने नागरिकों से ऐप को आजमाने और उसमें सुधार के लिए सुझाव देने को कहा था। आयोग ने नवंबर 2025 में बताया था कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्लेटफॉर्म के ट्रायल से मिले अनुभव और अधिकारियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर इसमें सुधार किए जा रहे हैं।
जनवरी 2026 में आधिकारिक लॉन्च के समय चुनाव आयोग ने बताया कि ECINet को भारतीय कानूनों के अनुरूप विकसित किया गया है और यह 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी में उपलब्ध है। प्लेटफॉर्म में नागरिकों और चुनाव अधिकारियों के लिए अलग-अलग सेवाओं को एकीकृत किया गया है।












