MTNL Asset Sale: सरकार बेचेगी 9,000 करोड़ की संपत्ति, 50,000 करोड़ की देनदारी घटाने की तैयारी

MTNL Asset Sale: सरकार 2027-28 में MTNL की 9,000 करोड़ रुपये की संपत्ति बेचने की तैयारी में है। कंपनी पर 50,000 करोड़ की देनदारी है। जानें पूरा प्लान।

केंद्र सरकार ने कर्ज में डूबी सरकारी टेलीकॉम कंपनी MTNL की 9,000 करोड़ रुपये की संपत्ति बेचने की योजना बनाई है। वित्त वर्ष 2027-28 में करीब 40 संपत्तियां बिक्री के लिए रखी जाएंगी। कंपनी पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये की देनदारी है।

बिजनेस न्यूज़: भारी कर्ज और लगातार घाटे से जूझ रही सरकारी टेलीकॉम कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार अगले वित्त वर्ष 2027-28 में कंपनी की करीब 9,000 करोड़ रुपये की जमीन और दूसरी संपत्तियां बेचने की तैयारी कर रही है। इस रकम का इस्तेमाल कंपनी की देनदारियां कम करने के लिए किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार, 6 नवंबर को इस योजना की जानकारी दी।

MTNL की 40 संपत्तियों को बेचने की तैयारी

सरकार ने MTNL की उन संपत्तियों की पहचान शुरू कर दी है, जिन्हें बेचकर पैसा जुटाया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 40 ऐसी संपत्तियां चुनी गई हैं, जिनके मालिकाना हक से जुड़े विवाद सुलझाए जा चुके हैं। इन संपत्तियों को अगले वित्त वर्ष में बिक्री के लिए बाजार में उतारा जाएगा। सरकार का लक्ष्य इनसे लगभग 9,000 करोड़ रुपये जुटाना है।

हालांकि यह रकम फिलहाल प्रस्तावित योजना का हिस्सा है। वास्तव में कितनी राशि मिलेगी, यह संपत्तियों की कीमत, खरीदारों की दिलचस्पी और बिक्री प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा। इससे पहले कई संपत्तियों को लेकर कानूनी और मालिकाना हक से जुड़े मामले सामने आ रहे थे। कुछ जमीनों का रिकॉर्ड साफ नहीं था, जबकि कुछ पर अलग-अलग सरकारी विभागों के दावे थे। अब इन मामलों को सुलझाकर बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

MTNL पर 50 हजार करोड़ का बकाया, सरकार के सामने कर्ज घटाने की चुनौती

सरकारी टेलीकॉम कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) की आर्थिक परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक समय दिल्ली और मुंबई में टेलीकॉम सेवाओं के लिए पहचानी जाने वाली यह कंपनी अब भारी कर्ज के बोझ तले दबी है। कारोबार से होने वाली कमाई घट गई है, जबकि पुराने कर्ज और दूसरे खर्च लगातार बने हुए हैं।

सरकारी सूत्रों की मानें तो MTNL पर इस समय करीब 50 हजार करोड़ रुपये की देनदारी है। इसमें लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के सरकारी गारंटी वाले बॉन्ड भी शामिल हैं। इन बॉन्ड के भुगतान से सरकार की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि कंपनी की आर्थिक हालत सुधारना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

MTNL के पास दिल्ली और मुंबई में कई जमीनें और इमारतें हैं। सरकार अब इन संपत्तियों को बेचकर पैसा जुटाना चाहती है। शुरुआती योजना करीब 9 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति बेचने की है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे मिलने वाली रकम पुराने बकाये चुकाने में इस्तेमाल की जा सकती है। हालांकि, 9 हजार करोड़ रुपये जुटा लेने से MTNL का पूरा कर्ज खत्म नहीं होगा। कंपनी पर इसके बाद भी हजारों करोड़ रुपये की देनदारी रहेगी। ऐसे में सरकार को आगे भी कर्ज कम करने के दूसरे उपाय तलाशने पड़ेंगे।

कर्मचारियों की सैलरी के लिए किराये की कमाई का सहारा

MTNL Asset Sale: सरकार बेचेगी 9,000 करोड़ की संपत्ति, 50,000 करोड़ की देनदारी घटाने की तैयारी

MTNL की आर्थिक हालत कितनी खराब है, इसका अंदाजा कंपनी की रोजमर्रा की कमाई से लगाया जा सकता है। टेलीकॉम सेवाओं से अब इतनी आमदनी नहीं हो रही कि कर्मचारियों की तनख्वाह और बाकी खर्च आसानी से निकाले जा सकें। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, MTNL अपनी जमीन और इमारतों से मिलने वाले किराये की रकम का इस्तेमाल कर्मचारियों की सैलरी देने में कर रही है। यानी कंपनी के पास मौजूद संपत्तियां फिलहाल उसके लिए कमाई का एक जरूरी जरिया बनी हुई हैं।

दूसरी ओर, सरकार संपत्ति बेचने से मिलने वाले पैसे को अलग काम में लगाना चाहती है। योजना यह है कि बिक्री से जुटाई गई रकम कर्मचारियों के हर महीने के वेतन पर खर्च न होकर कंपनी के पुराने कर्ज और दूसरी देनदारियों को चुकाने में लगे।

इससे MTNL पर बकाया रकम कुछ कम हो सकती है, लेकिन कंपनी की असली परेशानी सिर्फ पुराने कर्ज तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की तनख्वाह, दफ्तरों के खर्च और दूसरी जरूरतों के लिए हर महीने पैसे चाहिए। अगर कारोबार से आमदनी नहीं बढ़ती है, तो नियमित खर्च चलाना आगे भी मुश्किल बना रह सकता है।

दिल्ली और मुंबई में MTNL की सेवाएं संभाल रही BSNL

MTNL की शुरुआत साल 1986 में हुई थी। उस दौर में दिल्ली और मुंबई में लैंडलाइन फोन सेवाओं का बड़ा हिस्सा इसी कंपनी के पास था। बाद में कंपनी ने मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवाएं भी शुरू कीं। लंबे समय तक दोनों महानगरों में MTNL की अच्छी पहचान रही। लेकिन टेलीकॉम बाजार में निजी कंपनियों की एंट्री के बाद हालात बदलने लगे। ग्राहकों को मोबाइल और इंटरनेट के नए विकल्प मिलने लगे। दूसरी कंपनियां तेजी से अपनी सेवाएं बढ़ाती रहीं, जबकि MTNL प्रतिस्पर्धा में पिछड़ती चली गई। धीरे-धीरे कंपनी की कमाई घटने लगी और घाटा बढ़ता गया।

इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने MTNL के टेलीकॉम कारोबार का संचालन भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) को सौंपने का रास्ता चुना। नवंबर 2024 में दोनों कंपनियों के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत दिल्ली और मुंबई में MTNL की सेवाओं को चलाने की जिम्मेदारी BSNL को दी गई।

समझौते के बाद मोबाइल नेटवर्क, बिलिंग और ग्राहकों से जुड़े कामों को चरणबद्ध तरीके से BSNL के संचालन में लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि MTNL का BSNL में विलय हो गया है। दोनों अब भी अलग-अलग सरकारी कंपनियां हैं। MTNL में केंद्र सरकार की 56.25 फीसदी हिस्सेदारी है और कंपनी BSNL की सब्सिडियरी भी नहीं है। समझौते के तहत BSNL केवल उसकी टेलीकॉम सेवाओं का संचालन संभाल रही है।

संपत्ति बेचने में पहले क्यों आ रही थी परेशानी?

MTNL की जमीनों को बेचने की योजना नई नहीं है। सरकार पहले भी कंपनी की गैर-जरूरी संपत्तियों से पैसा जुटाने की कोशिश कर चुकी है। लेकिन कई जमीनों और इमारतों के दस्तावेज स्पष्ट नहीं होने से बिक्री में परेशानी आ रही थी। MTNL, BSNL, दूरसंचार विभाग और डाक विभाग के बीच भी कुछ संपत्तियों के इस्तेमाल और मालिकाना हक को लेकर उलझन थी।

पिछले दो वर्षों में सरकार ने ऐसे कई मामलों को सुलझाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग विभागों से जुड़ी लगभग 862 संपत्तियों के मालिकाना हक की स्थिति स्पष्ट की गई है। अब जिन संपत्तियों के दस्तावेज पूरे हैं, उन्हें नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) के जरिए बिक्री की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा सकता है।

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