Sonia Gandhi: मोदी सरकार पर सोनिया गांधी का निशाना, बोलीं- 12 साल में लोकतंत्र को हुआ नुकसान

Sonia Gandhi Interview: सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। कांग्रेस और विपक्ष के भविष्य पर भी बात की

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा हालत, विपक्षी गठबंधन, मनमोहन सिंह के साथ काम करने के अनुभव और आपातकाल पर भी अपनी राय रखी है।

नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने अपनी नई किताब आने से पहले देश की राजनीति और अपनी जिंदगी से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए हैं। अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' को दिए इंटरव्यू में उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। सोनिया गांधी का आरोप है कि बीते 12 वर्षों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर भी बात की। 

साथ ही बताया कि विपक्षी दलों के साथ मिलकर राजनीति करना कितना मुश्किल होता है। इंटरव्यू में साल 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ काम करने की यादें भी साझा कीं।

मोदी सरकार के 12 साल पर क्या बोलीं सोनिया गांधी?

सोनिया गांधी का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई करने में काफी वक्त लगेगा। उनके मुताबिक, अगर आने वाले समय में केंद्र की सरकार बदल भी जाती है, तब भी संस्थाओं को पहले जैसी स्थिति में लाना आसान नहीं होगा। इसके लिए राजनीतिक दलों को मिलकर कोशिश करनी पड़ेगी।

सोनिया ने दावा किया कि अब आम लोग भी देश के राजनीतिक हालात को समझने लगे हैं। लोगों के बीच नाराजगी बढ़ रही है और वे मौजूदा व्यवस्था को लेकर सवाल कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर उम्मीद जताई। उनका मानना है कि जनता आने वाले समय में बेहतर शासन का समर्थन करेगी। ये बातें सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कही हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचने से जुड़े उनके बयान राजनीतिक आरोप हैं।

चुनाव आयोग और मीडिया को लेकर भी लगाए आरोप

कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी को पिछले कई वर्षों से बराबरी के मौके नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का चुनाव आयोग समेत कई संस्थाओं पर प्रभाव है। सोनिया ने मुख्यधारा के मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि चुनावों में पैसे और धर्म का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे विपक्षी दलों के लिए राजनीतिक मुकाबला कठिन हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कई चुनावों में गड़बड़ी होने की आशंका भी जताई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस के भविष्य को लेकर सोनिया ने कहा कि वह निराश नहीं हैं। उनके मुताबिक, मुश्किल हालात के बावजूद पार्टी अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखे हुए है।

विपक्षी दलों के साथ गठबंधन पर भी उन्होंने खुलकर बात की। सोनिया ने माना कि गठबंधन की राजनीति में कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जिनसे व्यक्तिगत रूप से सहमत होना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजनीतिक जरूरतों के चलते कुछ समझौते जरूर किए, लेकिन भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ कभी वैचारिक समझौता नहीं किया। 

आगे भी पार्टी ऐसा नहीं करेगी। धर्मनिरपेक्षता को लेकर सोनिया ने कहा कि कांग्रेस हर नागरिक के अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार जीवन जीने के अधिकार का समर्थन करती है।

Sonia Gandhi: मोदी सरकार पर सोनिया गांधी का निशाना, बोलीं- 12 साल में लोकतंत्र को हुआ नुकसान

प्रधानमंत्री पद ठुकराने और मनमोहन सिंह पर क्या कहा?

इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी से साल 2004 के उस फैसले के बारे में भी पूछा गया, जब उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया था। उस समय लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को सरकार बनाने का मौका मिला था। सोनिया ने कहा कि उन्हें अपने उस फैसले पर कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने कभी इस बारे में नहीं सोचा कि अगर वह प्रधानमंत्री बन जातीं तो देश की राजनीति या सरकार के फैसले किस तरह अलग होते।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर सोनिया ने कहा कि उनके साथ काम करने का अनुभव अच्छा रहा। मनमोहन सिंह सरकार का काम देखते थे और वह कांग्रेस संगठन की जिम्मेदारी संभालती थीं। दोनों के काम अलग थे और इसी तरह सरकार और संगठन का कामकाज चलता रहा।

आपातकाल को लेकर सोनिया गांधी ने क्या कहा?

साल 1975 से 1977 के बीच देश में लगे आपातकाल पर भी सोनिया गांधी ने अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि उस समय लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाबंदियां लगाई गई थीं। बंदी प्रत्यक्षीकरण जैसे अधिकार को भी निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, सोनिया ने कहा कि उस समय आपातकाल संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लागू किया गया था। उनके मुताबिक, आपातकाल खत्म होने के बाद ही उन्हें उस दौर में हुई घटनाओं की गंभीरता का पूरी तरह एहसास हुआ।

उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने मौजूद राजनीतिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। सोनिया ने कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में चुनाव कराने का फैसला लिया था और आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर खेद भी जताया था।

10 नवंबर को आएगी सोनिया गांधी की नई किताब

सोनिया गांधी की आत्मकथा 'Belonging: A Journey of Love' 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। भारत में इसे हार्परकॉलिन्स इंडिया प्रकाशित कर रहा है। इस किताब में सोनिया गांधी ने अपने बचपन से लेकर भारत आने और राजनीति में कदम रखने तक की कहानी लिखी है। इसमें राजीव गांधी से पहली मुलाकात, शादी के बाद की जिंदगी और इंदिरा गांधी के साथ बिताए दिनों का भी जिक्र है।

सोनिया ने बताया कि उन्होंने कई साल पहले अपनी जिंदगी के बारे में लिखना शुरू किया था, लेकिन करीब पांच साल पहले इस काम को गंभीरता से आगे बढ़ाया। बीच-बीच में लिखना बंद भी हुआ।

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