Harmeet Dhillon Resigns: ट्रंप को चुनावी हार के बाद दूसरा झटका, भारतीय मूल की हरमीत ढिल्लों ने दिया इस्तीफा

Harmeet Dhillon Resigns: भारतीय मूल की हरमीत ढिल्लों ने अमेरिकी न्याय विभाग से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि फैसला चुनाव से पहले लिया था। जानें पूरी वजह।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी सहयोगी हरमीत कौर ढिल्लों ने न्याय विभाग के अहम पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने साफ किया कि पद छोड़ने का फैसला मध्यावधि चुनाव से पहले लिया था। अब वह दोबारा निजी वकालत शुरू करेंगी।

वॉशिंगटन: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद ट्रंप प्रशासन से एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय मूल की वरिष्ठ अधिकारी हरमीत कौर ढिल्लों ने अमेरिकी न्याय विभाग के सिविल राइट्स डिवीजन के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार, 5 नवंबर को अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने इसकी पुष्टि की। 

हालांकि, ढिल्लों ने चुनावी नतीजों से अपने इस्तीफे का संबंध होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह कई सप्ताह पहले ही पद छोड़ने का मन बना चुकी थीं।

हरमीत ढिल्लों ने क्यों छोड़ा ट्रंप प्रशासन?

अमेरिका में चुनावी नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच हरमीत कौर ढिल्लों ने न्याय विभाग से अलग होने का फैसला किया है। वह अप्रैल 2025 से सिविल राइट्स डिवीजन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। फॉक्स न्यूज डिजिटल को दिए इंटरव्यू में ढिल्लों ने बताया कि उन्होंने करीब तीन सप्ताह पहले ही इस्तीफे की इच्छा जताई थी। उस समय व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स ने उनसे मध्यावधि चुनाव तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया था।

ढिल्लों ने कहा कि उनसे किसी ने इस्तीफा नहीं मांगा था। पद छोड़ना उनका अपना फैसला है। अब वह निजी क्षेत्र में लौटकर फिर से वकालत करना चाहती हैं। हालांकि, उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इसी वजह से उनके फैसले को ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टॉड ब्लैंच ने की हरमीत ढिल्लों के काम की तारीफ

अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हरमीत ढिल्लों का इस्तीफा स्वीकार करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ढिल्लों ने पिछले 18 महीनों में सिविल राइट्स डिवीजन का नेतृत्व किया और अपने काम के दौरान अमेरिकी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की कोशिश की। ब्लैंच ने उनके कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी डर या पक्षपात के कानून लागू करने का प्रयास किया। साथ ही न्याय विभाग में दी गई उनकी सेवाओं के लिए आभार जताया।

दूसरी तरफ ढिल्लों ने भी राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस पद पर काम करना उनके जीवन का बड़ा सम्मान रहा है। अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से जुड़े मामलों, महिलाओं के खेलों और नागरिक अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर किए गए काम को महत्वपूर्ण बताया।

कौन हैं हरमीत कौर ढिल्लों, जिनका डोनाल्ड ट्रंप से पुराना संबंध है?

Harmeet Dhillon Resigns: ट्रंप को चुनावी हार के बाद दूसरा झटका, भारतीय मूल की हरमीत ढिल्लों ने दिया इस्तीफा

भारतीय मूल की हरमीत कौर ढिल्लों अमेरिका की राजनीति और वकालत की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं। उनका जन्म चंडीगढ़ में हुआ था। बचपन में ही वह अपने माता-पिता के साथ भारत से ब्रिटेन चली गई थीं। कुछ समय बाद परिवार अमेरिका में बस गया। ढिल्लों ने वहीं अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर वकालत को करियर बनाया।

उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया से कानून की पढ़ाई की। वकील बनने के बाद उन्होंने कई चर्चित मामलों में पैरवी की। बाद में अपनी लॉ फर्म भी खोली। हरमीत लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी की राजनीति से जुड़ी रही हैं। वह कैलिफोर्निया रिपब्लिकन पार्टी में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। साल 2023 में उन्होंने रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली।

डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी उनका जुड़ाव नया नहीं है। वह उनके कई कानूनी मामलों में काम कर चुकी हैं। साल 2024 में रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन के दौरान हरमीत ने मंच पर सिख परंपरा के अनुसार अरदास की थी। उस कार्यक्रम के बाद वह काफी चर्चा में आई थीं।

ट्रंप जब दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने हरमीत को न्याय विभाग के सिविल राइट्स डिवीजन की जिम्मेदारी सौंपी। सीनेट की मंजूरी के बाद 7 अप्रैल 2025 को उन्होंने पद की शपथ ली। करीब डेढ़ साल तक इस जिम्मेदारी को संभालने के बाद 5 नवंबर 2026 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। हरमीत का कहना है कि वह दोबारा निजी वकालत करना चाहती हैं और इस बारे में कुछ सप्ताह पहले ही फैसला कर चुकी थीं।

अमेरिकी चुनाव में 1,000 मॉनिटर भेजने पर क्यों हुआ था विवाद?

हरमीत ढिल्लों के न्याय विभाग में रहते हुए चुनावी निगरानी का एक फैसला काफी चर्चा में रहा। नवंबर 2026 में अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के दौरान न्याय विभाग ने करीब 1,000 मॉनिटर और पर्यवेक्षकों को मतदान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए भेजा था। यह अभियान सभी 50 राज्यों तक फैला हुआ था। इसकी जिम्मेदारी सिविल राइट्स डिवीजन के पास थी। विभाग का कहना था कि अधिकारियों को इसलिए तैनात किया गया है, ताकि मतदान के दौरान नियमों का पालन हो और किसी मतदाता के अधिकारों का उल्लंघन न होने पाए।

लेकिन इतनी बड़ी संख्या में संघीय अधिकारियों की तैनाती पर सवाल भी उठे। डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ नेताओं और नागरिक अधिकार संगठनों ने चिंता जताई कि इससे चुनाव में केंद्र सरकार का दखल बढ़ सकता है। उनका कहना था कि मतदान केंद्रों पर अधिकारियों की मौजूदगी से कुछ मतदाता असहज महसूस कर सकते हैं।

हरमीत ढिल्लों के कार्यकाल में कर्मचारियों ने क्यों छोड़ा विभाग?

हरमीत ढिल्लों के न्याय विभाग में रहते हुए सिविल राइट्स डिवीजन के कामकाज में कई बदलाव हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने विभाग छोड़ दिया। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में मौजूद कर्मचारियों में से तीन-चौथाई से ज्यादा लोग बाद में विभाग से अलग हो गए।

इन इस्तीफों और बदलावों पर भी सवाल उठे। कई पूर्व अधिकारियों का आरोप था कि विभाग अब उन मामलों पर पहले जितना ध्यान नहीं दे रहा, जिनके लिए इसे बनाया गया था। इनमें नस्ली भेदभाव और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े नागरिक अधिकारों के मामले शामिल थे। दूसरी तरफ ढिल्लों का कहना था कि विभाग को कानून लागू करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि किसी खास राजनीतिक सोच के अनुसार काम करना चाहिए।

उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालयों में कथित भेदभाव, यहूदी विरोधी घटनाओं, हथियार रखने के अधिकार और चुनाव से जुड़े मामलों को ज्यादा महत्व दिया गया।

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