RIMS NEET PG Seats 2026: रिम्स में बढ़ीं पीजी की 36 नई सीटें, अब 212 सीटों पर मिलेगा एडमिशन

RIMS NEET PG Seats 2026: रांची रिम्स में पीजी की 36 नई सीटों को NMC ने मंजूरी दी। अब 212 सीटों पर एडमिशन होगा। जानें किन 7 विभागों में बढ़ीं सीटें।

रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में पीजी की 36 नई सीटों को मंजूरी मिली है। अब संस्थान में कुल 212 सीटें हो गई हैं। NMC के इस फैसले से सात विभागों में मेडिकल छात्रों को विशेषज्ञ पढ़ाई के ज्यादा मौके मिलेंगे।

एजुकेशन न्यूज़: झारखंड में NEET PG की तैयारी कर रहे मेडिकल छात्रों के लिए अच्छी खबर है। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) रांची में पोस्ट ग्रेजुएट की 36 नई सीटें बढ़ाई गई हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इन सीटों को मंजूरी दी है। इसके बाद संस्थान में पीजी की कुल सीटें 176 से बढ़कर 212 हो गई हैं। यह बढ़ोतरी सात विभागों में हुई है, जिनमें जनरल मेडिसिन और एनेस्थीसियोलॉजी भी शामिल हैं।

रिम्स में अब 212 सीटों पर होगी पीजी की पढ़ाई

रांची के रिम्स में मेडिकल की उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों के लिए अब पहले से ज्यादा सीटें उपलब्ध होंगी। NMC ने 6 नवंबर 2026 को पीजी ब्रॉड स्पेशियलिटी कोर्स की नई सीट मैट्रिक्स जारी की है। इसमें रिम्स की 36 अतिरिक्त सीटों को शामिल किया गया है। पहले संस्थान में पीजी की 176 सीटें थीं। अब यह संख्या बढ़कर 212 हो गई है। यानी एक ही शैक्षणिक सत्र में लगभग 20 प्रतिशत सीटों की बढ़ोतरी हुई है।

इस फैसले से उन छात्रों को फायदा हो सकता है, जो MBBS पूरा करने के बाद MD या MS जैसे कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं। खासकर झारखंड के मेडिकल छात्रों के लिए अपने राज्य में रहकर आगे की पढ़ाई करने के अवसर बढ़ेंगे।

किन सात विभागों में बढ़ाई गई हैं सीटें?

रिम्स में सबसे ज्यादा आठ नई सीटें एनेस्थीसियोलॉजी विभाग को मिली हैं। इस विभाग में ऑपरेशन और इलाज के दौरान मरीजों को बेहोशी देने और उनकी स्थिति पर नजर रखने से जुड़ी विशेषज्ञ पढ़ाई कराई जाती है। कम्युनिटी मेडिसिन और माइक्रोबायोलॉजी विभाग में छह-छह सीटें बढ़ाई गई हैं। जनरल मेडिसिन विभाग को पांच अतिरिक्त सीटें मिली हैं।

इसके अलावा एनाटॉमी और फार्माकोलॉजी में चार-चार सीटों को मंजूरी दी गई है। फिजियोलॉजी विभाग में तीन सीटें बढ़ाई गई हैं। इस तरह सात विभागों में कुल 36 नई सीटें जोड़ी गई हैं। इन विभागों में सीटें बढ़ने से छात्रों को अपनी पसंद की स्पेशियलिटी चुनने के लिए पहले से अधिक विकल्प मिल सकेंगे।

कुछ महीनों में MBBS और PG की 106 सीटें बढ़ीं

रिम्स के लिए यह साल मेडिकल एजुकेशन के लिहाज से खास रहा है। जुलाई 2026 में NMC ने संस्थान में MBBS की 70 अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दी थी। उस समय MBBS की सीटें 180 से बढ़कर 250 हो गई थीं। अब नवंबर में पीजी की 36 सीटें और बढ़ गई हैं। इस तरह पिछले कुछ महीनों में रिम्स को MBBS और PG मिलाकर कुल 106 नई सीटें मिल चुकी हैं।

संस्थान में पढ़ाई की क्षमता बढ़ने से अधिक छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। हालांकि बढ़ी हुई सीटों पर एडमिशन निर्धारित काउंसलिंग और आरक्षण नियमों के अनुसार ही होगा।

RIMS NEET PG Seats 2026: रिम्स में बढ़ीं पीजी की 36 नई सीटें, अब 212 सीटों पर मिलेगा एडमिशन

झारखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने में मिलेगी मदद

झारखंड के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कई मरीजों को विशेषज्ञ इलाज के लिए बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। रिम्स में पीजी की सीटें बढ़ने से आने वाले वर्षों में ज्यादा डॉक्टर विशेषज्ञ प्रशिक्षण पूरा कर सकेंगे।

जनरल मेडिसिन और एनेस्थीसियोलॉजी जैसे विभागों में सीटें बढ़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज, ऑपरेशन और इमरजेंसी सेवाओं के लिए इन विशेषज्ञों की जरूरत होती है। हालांकि केवल सीटें बढ़ने से डॉक्टरों की कमी तुरंत खत्म नहीं होगी। इसके लिए पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों की नियुक्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी होगा।

स्वास्थ्य विभाग ने जताई खुशी

रिम्स में नई सीटों की मंजूरी मिलने के बाद संस्थान और स्वास्थ्य विभाग ने इसे मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि पीजी सीटें बढ़ने से राज्य के मेडिकल स्नातकों को विशेषज्ञ शिक्षा हासिल करने के ज्यादा अवसर मिलेंगे।

संस्थान के प्रबंधन ने भी इस उपलब्धि के लिए डीन एकेडमिक्स, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, डॉक्टरों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की है। नई सीटों की स्वीकृति मिलने से संस्थान की पढ़ाई और प्रशिक्षण की क्षमता में विस्तार होगा। साथ ही भविष्य में अस्पताल को अधिक प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे।

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