बांका की दो बहनें बनीं बैंक अधिकारी, जमुई और सुपौल में मिली जिम्मेदारी, पिता ने जताई खुशी

बिहार के बांका की रचना रानी और रश्मि प्रिया बिहार ग्रामीण बैंक में सह शाखा प्रबंधक बनी हैं। दोनों की पोस्टिंग जमुई और सुपौल में है।

बिहार के बांका जिले की रहने वाली रचना रानी और रश्मि प्रिया ने बैंकिंग क्षेत्र में सफलता हासिल की है। दोनों बहनें बिहार ग्रामीण बैंक में सह शाखा प्रबंधक हैं। उनकी उपलब्धि से परिवार में खुशी है। पिता सियाराम बरनवाल ने बेटियों की पढ़ाई को जरूरी बताया है।


बांका: चांदन बाजार के व्यवसायी सियाराम बरनवाल के घर इन दिनों खुशी का माहौल है। उनकी दो बेटियां रचना रानी और रश्मि प्रिया बिहार ग्रामीण बैंक में सह शाखा प्रबंधक के पद पर काम कर रही हैं। एक की पोस्टिंग जमुई में है, जबकि दूसरी सुपौल में अपनी जिम्मेदारी संभाल रही है। बेटियों की इस कामयाबी पर पिता बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि लड़कियों को भी आगे बढ़ने के लिए लड़कों जितने मौके मिलने चाहिए।

चार बेटियों के पिता हैं सियाराम बरनवाल

बांका जिले के चांदन बाजार में रहने वाले सियाराम बरनवाल व्यवसाय करते हैं। उनके परिवार में चार बेटियां हैं। तीसरे नंबर की बेटी रचना रानी और सबसे छोटी रश्मि प्रिया ने बैंकिंग क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है। दोनों बहनों के अधिकारी बनने से परिवार के साथ आसपास के लोग भी खुश हैं।

छोटे शहरों और कस्बों में कई परिवार अपने बच्चों को अच्छी नौकरी करते देखना चाहते हैं। इसके लिए पढ़ाई के साथ लगातार मेहनत और परिवार का सहयोग भी जरूरी होता है। रचना और रश्मि की सफलता इसी बात का उदाहरण है कि बेटियों को आगे बढ़ने का मौका मिले तो वे भी अपने परिवार की उम्मीदों पर खरी उतर सकती हैं।

दोनों बहनों ने बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाया है। खास बात यह है कि वे एक ही बैंक में काम कर रही हैं, हालांकि उनकी पोस्टिंग बिहार के अलग-अलग जिलों में हुई है।

रचना जमुई में तो रश्मि सुपौल में संभाल रहीं जिम्मेदारी

रचना रानी बिहार ग्रामीण बैंक की चंद्रमंडीह शाखा में सह शाखा प्रबंधक हैं। यह शाखा जमुई जिले में स्थित है। वहीं उनकी छोटी बहन रश्मि प्रिया की पोस्टिंग सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज क्षेत्र की पिपरा शाखा में है। वह भी सह शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं।

दोनों बहनों का एक ही बैंक में अधिकारी बनना परिवार के लिए खास उपलब्धि है। घर से निकलकर अलग-अलग जिलों में नौकरी की जिम्मेदारी संभालना उनके करियर का अहम हिस्सा है।

बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी करने वाले अधिकारियों को ग्राहकों से जुड़े कामों के साथ शाखा के रोजमर्रा के कामकाज में भी भूमिका निभानी होती है। ऐसे में दोनों बहनों को मिली जिम्मेदारी उनके पेशेवर जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

चांदन बाजार में भी उनकी उपलब्धि की चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों और परिचितों ने परिवार को बधाई दी है। खासकर पढ़ाई कर रही लड़कियों के लिए रचना और रश्मि की कहानी एक अच्छा उदाहरण बनकर सामने आई है।

पिता बोले- बेटा और बेटी को एक जैसी शिक्षा मिलनी चाहिए

बेटियों की सफलता से खुश सियाराम बरनवाल ने अभिभावकों को एक जरूरी संदेश दिया है। उनका मानना है कि बच्चों की पढ़ाई के मामले में बेटा और बेटी के बीच फर्क नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बेटियों को भी अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। परिवार अगर उनकी शिक्षा पर ध्यान दे और उनका साथ बनाए रखे, तो वे भी अच्छी नौकरी हासिल कर सकती हैं।

सियाराम बरनवाल के मुताबिक, बेटी का पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनना परिवार के लिए गर्व की बात है। इससे समाज में भी अच्छा संदेश जाता है। उन्होंने दूसरे माता-पिता से अपील की कि वे अपनी बेटियों को पढ़ाएं और करियर बनाने में उनकी मदद करें।

उनकी बात ऐसे परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहां आज भी बेटियों की आगे की पढ़ाई या नौकरी को लेकर अलग-अलग तरह की सोच देखने को मिलती है।

बांका की छात्राओं को मिला आगे बढ़ने का हौसला

रचना और रश्मि की सफलता से चांदन और आसपास के इलाकों में पढ़ाई कर रही छात्राओं को भी प्रोत्साहन मिला है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली लड़कियों के लिए दोनों बहनों की उपलब्धि खास मायने रखती है।

बिहार के छोटे कस्बों में रहने वाले कई युवा बैंकिंग और दूसरी सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल हैं। ऐसे युवाओं के लिए अपने ही क्षेत्र की लड़कियों को अधिकारी के पद पर देखना उत्साह बढ़ाने वाला अनुभव हो सकता है।

बरनवाल परिवार को बधाई देने वालों ने भी बेटियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच अपनाने की बात कही है। रचना और रश्मि की कामयाबी ने यह दिखाया है कि परिवार का भरोसा और पढ़ाई के प्रति गंभीरता करियर बनाने में कितनी अहम भूमिका निभा सकती है।

फिलहाल दोनों बहनें अपनी-अपनी बैंक शाखाओं में काम कर रही हैं। उनकी सफलता की खुशी सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं है। चांदन बाजार में भी लोग इस उपलब्धि को बेटियों की पढ़ाई और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देख रहे हैं।

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